एक स्वप्न सम्राट का अवसान : बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा, काठमांडू ,२५ जुलाई |

इस संसार में सभी जीवों या वस्तुओं का एक दिन अंत निश्चित है । पर स्वप्न में ही परिभ्रमण कर रहे एक स्वप्न सम्राट को इस बात का पता तब चला जब उस के हाथ से गद्दी छीन ली गई । आखिर स्वप्न है कितने दिन आंख बंद कर के देखा जा सकता है । नौ महीने में ही टूट गया । एक मां का बच्चे के जन्म से पहले ही गर्भपात हो जाए तो उस का दुखी होना स्वाभाविक है । पर गर्भावस्था में जो एहतियात बरतने के लिए कहा जाता है वह अगर न बरता जाए तो दुर्घटना निश्चित है ।

सपने का आयतन जब आंख की आकार से बड़ा हो तो उस सपने का टूटना लाजमी है । हवाई किले बना कर उस में सेज सजाने का स्वप्न कोई दुस्साहसी ही देख और दिखा सकता है । राष्ट्रवाद को सत्ता का मोल मलाई का भद्धा प्रहसन कर के इस स्वप्न सम्राट ने वाहवाही तो खूब बटोरी । पर अंत मे तख्तो ताज को त्यागन ही पड़ा । पद और तख्त कभी एक का ही बन कर नहीं रहता । जिसके पास शक्ति और भक्ति होगी वह ही इस पद और तख्त असली दावेदार होगा ।

dream-king

अपने मुहावरों से जनता को भुलाने वाले और कटाक्ष से अपने विरोधियों को तिलमिलाने को वाध्य कर इस स्वप्न सम्राट ने सोचा होगा कि मैंने बड़ा भारी तीर मार दिया । पर जब तीर सही जगह और व्यक्ति पर जा कर न लगे तो वह वापस नहीं आता । स्वप्न सम्राट के तरकश में हवा महल बनाने के जितने भी तीर थे वह सब एक, एक कर के खत्म हो गए थे । देश भ्रष्टाचार के तालाब में लबालब डूब रहा था । और स्वप्न सम्राट के अनुयायी इस तालाब में डुबकी मार रहे थे । जनता भूखे कौए की तरह कांव कांव कर रही थी । पर काला बजारी और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी स्वप्न सम्राट और उनकी भजन मंडली को इस बात की सुध ही नहीं थी । इसी लिए स्वप्न सम्राट का अंत निश्चित था ।

जब मधेश में आंदोलन हुआ और सरकारी गोली से मधेशी जन मारे गए । तब इस स्वप्न सम्राट ने कहा था आम के पेड़ से दो चार आम के गिरने से पेट को कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला । आज खुद ही सिंह दरवार के अंदर पाए जाने वाला प्रधान मंत्री के पेड़ से आम की तरह गिरने पर इस स्वप्न सम्राट को कैसा महसूस हो रहा होगा ? दूसरों को ताने दे दे कर मर्माहत करने में पारंगत इस स्वप्न सम्राट ने कभी दूसरो के घाव में मरहम लगाना जरुरी नहीं समझा । अब सब खुद के पीठ पर सत्ता साझेदार और विपक्षियों ने छूरा घोंपा तो बौखला गए और समर्थन फिर्ता होने पर अल्पमत में पड़ने के बाद बहुमत के लिए एड़ी, चोटी का जोर लगाने लगे । पर चंद्रमा हमेशा दाहिना नहीं होता है ।

जब मधेश आंदोलन के दौरान मधेशियों ने अपनी हक प्राप्ति के लिए पूर्व, पश्चिम तक लंबा मानव जंजीर बनाया तो इसी स्वप्न सम्राट ने उसे मक्खी का जंजीर बताया था । अब वही मक्खी उन्हे काट्ने के लिए भिनभिना रही है तो इस स्वप्न सम्राट की रातों की नींद खराब हो गई है । जो जैसा बोएगा वैसा ही काटेगा यही प्रकृति का नियम है स्वप्न सम्राट । अब आप नींद से जगिए । आपके सिपाही सलाहकार भले ही आप को सम्राट मानते हो पर अब आप सत्ता च्यूत हो चूके हैं । इस सत्य को स्वीकार कर लीजिए की आपका अवसान हो चुका है । अब आप सिर्फ सिंह दरवार में टंगे अन्य पूर्व प्रधान मंत्रियों की लहर में एक फोटो बन कर जड़े रहेंगे और दीवार कि शोभा बढाएँगें ।

स्वप्न सम्राट आप ने कहा था कि आप हवा से बिजली निकलवाएगें ? घर, घर में पाईप लाईन से रसोई गैस भेजा जाएगा ? देश की राजधानी में ५ साल के अंदर मेट्रो ट्रेन दौडेगी । देश में ही पेट्रोल का उत्खनन कर के निर्यात किया जाएगा ? १ साल के अंदर देश लोड सेडिंग से मुक्त होगा ? यह सब हुआ क्या ? क्यों आपने गरीब जनता की आंख से बड़े स्वप्न दिखाए ? क्या इसका खामियाजा आपको नहीं देना पडेगा ? आप तो चाहते तो यह भी कह सकते थे कि रेत से भी तेल निकालुंगा । आप तो बोल देगें आपका कुछ नहीं जाएगा । कल पत्रकार इसी विषय पर प्रश्न पूछेगें तो आपके पास सीधा सपाट उत्तर होगा मुझे पद में टिकने ही नहीं दिया । समय मिलता तो आप और हवाई किले बना कर जनता की भावना और विश्वास को लूटते । आप को बोलने के सिवा और कुछ करना आया ही नहीं ।

आप के सत्ता से बहिर्गमन होने से वही लोग दुखी है जिन्हे सत्ता में तर मारने कि खुली छूट थी । जिन्हें नरभक्षी बाघ जैसा काला बजारी और भ्रष्टाचार से महल खड़ा करने की लत लग गई थी वही बौरा कर अपनी कुंठा फेसबुक और ट्विटर में परोस रहे हैं । आप तनिक भी महंगाई और काला बजारी को नियंत्रण कर के देश के नागरिकों का कष्टकर दैनिकी को थोड़ा सा भी कम करते तो सब के दिलों मे राज करते । पर आपने तो महाभारत के धूर्त शकुनी की तरह राष्ट्रवाद का पाशा फेंक कर युद्ध जितना चाहा । पर आज देखिए आपका राष्ट्रवाद आपको कहाँ ले आया और देशप्रेम की चाशनी ही आपको डुबा गई । ज्यादा कड्वा बोलना और आंख से बड़े सपने देखना ही आपके लिए घातक सावित हुआ ।

आप तो वार्षिक बजट में कर्मचारियों का वेतन २५ प्रतिशत बढ़ा कर और वृद्ध भत्ता को भी सौ प्रतिशत बढ़ा कर लोकप्रिय होना चाहते थे । आपने गरीबी और महंगाई की मार झेल रहे नागरिको को देश का अवाम माना ही नहीं । मानते तो जरुर उनके लिए कुछ ठोस पहल करते । आपने भूकंप पीड़ितों के पूनर्वास के लिए आया पैसा और योजनाओं के साथ भी न्याय नहीं किया । टेंट मे रहने को वाध्य पीडितों ने पिछले साल और इस साल की बर्षात के पानी में इनके आंसू भी शामिल है । क्या आपको इनकी हाय नहीं लगेगी ? आप तो बस अपने दल एमाले और अपने कार्यकर्ताओं के प्रिय बने रहे और उन्ही के भजन, कीर्तन में मशगूल हो कर अपने नौ महीने के शासन काल को अंजाम दिया ।

इसी लिए आप का अवसान होना निश्चित था । “अब पछताय होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत ।” (व्यग्ंय)

 

Loading...