एमाले–माओवादी बीच विश्वास का संकट, एकता प्रक्रिया अवरुद्ध

काठमांडू, १५ मई । सत्ता–सहयात्री दल नेकपा एमाले और एमाओवादी केन्द्र के बीच विश्वास का संकट बढ़ता गया है । जिसके चलते पार्टी एकता प्रक्रिया ही अवरुद्ध होने लगा है । सरकार सञ्चालन संबंधी विषयों को लेकर दो पार्टी के बीच मनमुटाव बढ़ता गया है । यह समाचार आज प्रकाशित अन्नपूर्ण पोष्ट में है ।
सौद्धान्तिक–राजनीतिक विषयों से लेकर संगठनात्मक संचरना में एकरुपता कायम कर एकता प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदवारी दो अध्यक्ष (पुष्पकमल दाहाल और केपीशर्मा ओली) को दी गई थी । कृषिमन्त्री तथा माओवादी केन्द्र के नेता चक्रमणि खनाल कहते हैं– ‘संकेत अच्छी नहीं है, शंका और आशंका व्यप्त है । अपसी समझदारी के साथ सहकार्य, समन्वय कर आगे बढ़ना चाहिए था, एक–दूसरे के बीच अपासी विश्वास में आगे बढ़ना चाहिए था, उसमें कुछ कमी–कमजोरियां दिखाई दिया है ।’
माओवादी मन्त्रियों का कहना है कि सरकार सञ्चालन के सवाल में प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली स्वेच्छाचारी होकर अकेले ही निर्णय करते हैं । सोमबार सम्पन्न संसद बैठक में माओवादी केन्द्र के नेतृ पम्फा भुसाल ने कहा कि अरुण–३ परियोजना संसद् से दो तिहाई बहुमत लेकर आगे बढ़ाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है । उन्होंने कहा– ‘प्राकृतिक स्रोत–साधन संबंधी सन्धि–सम्झौता प्रतिनिधसभा में दो तिहाई मत लेकर होना चाहिए, यह संवैधानिक व्यवस्था है, लेकिन सरकार ने संवैधानिक व्यवस्था का अनुशरण नहीं किया है ।’
माओवादी मन्त्रियों का कहना है कि प्रधानमन्त्री की कार्यशैली स्वेइच्छाचारी है, विभिन्न निकाय में होनेवाला मनोनयन तथा बढ़ोत्तरी, बजट निर्माण आदि विषयों में भी प्रधानमन्त्री अकेले ही आग बढ़ते हैं । स्मरणीय है, पिछली बार अरुण–३ परियोजना शिलान्यास में माओवादी से प्रतिनिधित्व करनेवाले विभागी मन्त्री को ही आमन्त्रण नहीं करने से माओवादी मन्त्रीगण प्रधानमन्त्री ओली से रुष्ट हैं ।

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