ओली एंड कंपनी को मधेश और मधेशी से एलर्जी है : प्रदीप यादव

प्रदीप यादव, अध्यक्ष, पर्सा,संघीय समाजवादी फोरम नेपाल

प्रदीप यादव, अध्यक्ष, पर्सा,संघीय समाजवादी फोरम नेपाल, १७ मार्च |
संघीय समाजवादी फोरम नेपाल पर्सा के अध्यक्ष प्रदीप यादव अपने स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं । पिछले संविधान सभा चुनाव में बेहद कम मत के अंतर से हारने वाले यादव संविधान संसोधन किए बगैर निर्वाचन भाग लेने के खिलाफ है । यादव का कहना है अगर स्थानीय निकाय निर्वाचन से पहले सरकार संविधान संसोधन कर ले तो उनका दल फोरम सहित मोर्चा में आवद्ध अन्य दल भी निर्वाचन में भाग लेगें । पर्सा जिले के मनियारी गाँव में जन्मे औरवीरगंज के ठाकुर राम क्याम्पस से शिक्षा संकाय में स्नातक ४० वर्षीय यादव का राजनीति के अलावा मुख्य पेशा कृषि है । पिछले १७ साल से राजनीति में सलंग्न यादव शुरु के सात साल राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी में थें । ०६३
साल के मधेश आंदोलन के बाद वह फोरम में आ गए । १६ साल की किशोर उम्र से ही विधार्थी राजनीति कर रहे और वामपंथ के घोर विरोधी यादव से
वर्तमान राजनीति और आगामी चुनाव के सम्बन्ध में हिमालिनी की वीरगंज संवाददाता बिम्मी शर्मा से हुई लंबी बातचीत का प्रमुख अंश ।
० वर्तमान परिस्थिति में सरकार और एमाले के लिए आप क्या सोचते हैं ?
निश्चिन्त रूप से सरकार और नेकपा एमाले का रवैया गलत है मधेशी मोर्चा के प्रति, यही कारण है कि मोर्चा को उनके हर कदम का विरोध करना पड़ रहा है । हालत यही रही तो होली के बाद नाकाबंदी भी हो सकती है । मधेशी मोर्चा के साथ जो  ३ बुदें सहमति की गयी थी सरकार उसको पूरा करे हमें और कुछ नहीं चाहिए । मधेशी जनता ने इतना बलिदान क्यों और किसके लिए दिया ? १९ साल से स्थानीय निकाय का निर्वाचन नही हुआ । अब होने वाला है, तो हम भी चाहते हैं कि हमारी संविधान संशोधन की मांग पूरी कर के हमें भी निर्वाचन में शरीक होने का मौका दे । निर्वाचन में जाने का निर्णय करने से पहले संविधान संशोधन करते तो क्या बिगड जाता ? मधेशी मोर्चा के संशोधन की मांग पूरी हो जाती तो हम लोग निश्चिन्त रूप से निर्वाचन में भाग लेते । मधेशी जनता को हम पर भरोसा है । केपी ओली एंड कंपनी को मधेशी जनता से एलर्जी है । ओली और एमाले पार्टी को लगता है कि जितना मधेशी को गाली देंगें उतना ही ज्यादा उनको पहाड़ी वोट मिलेगा । पर हम लोगों की सोच उस तरह की नहीं है । हम नेपाल में रहने वाले सभी जाति और वर्ग के लिए लड़ रहे हैं । मधेश हाथ से निकल गया इसी लिए पहाड़ को अपनी मुठ्ठी मे करने के लिए एमाले यह सब कर रहा है । सरकार की बात मान कर यदि निर्वाचन में हमलोग अभी भाग लेगें तो हमारी मागं पूरी नहीं की जाएगी । १० महीने कें बाद इस संविधान सभा की उम्र खत्म हो जाएगी । यदि अभी हम मधेश के लिए आवाज नहीं उठाएगें तो इस संविधान सभा का विसर्जन होने के बाद हमारी मांग को  संबोधन नहीं किया जाएगा ।
० मधेश आन्दोलन के बाद आपकी क्या रणनीति होगी ?
– मधेश आंदोलन के बाद हम लोगों का एजेंडा विकास का है । इसीलिए हम लोग अपने विरोध का स्वरूप परिवर्तन कर रहे हैं । मधेशी मोर्चे के इस आंदोलन में अब बीरगंज नहीं काठमांडु बंद होगा । राजधानी को घेर कर वहां अभाव होने पर ही सरकार हमारी मागों पर ध्यान देगी । हमारे शहर का कोई नुकसान न हो, जब तक काठमाडु को अभाव और दुख महसूस नहीं होगा तब तक हमारी मागों पर सुनवाई नहीं होगी ।
० पर्सा जिले की स्थिति पर आप क्या कहेंगे ?
– पर्सा जिला में वीरगंज का छोड़ कर कंही कोई विकास नहीं है । इस जिले में एक किलोमीटर भी सड़क पक्की नहीं है । देश में सबसे ज्यादा वीरगंज भन्सार से ही राजस्व कलेक्सन होता है ।  भारत से खरीदी गई बिजली भी यही से हो कर देश की राजधानी में जाती हैं पर यहां की जनता को सिर्फ लोडसेडिगं मिलती है । मधेश प्रदेश बनने के बाद राजधानी कहां बनेगा इस पर भी मधेशी दलों में विवाद होगा ही और यह विवाद नेकपा एमाले और काग्रेंस करवा रहा है । वीरगंज ही २ नंबर प्रदेश की राजधानी बननी चाहिए । पहले मछली को दाना फेंक कर जाल बिछा कर पकड़ना चाहिए  । उसके बाद ही इसका हिस्सा किसको कितना और क्या मिलेगा लगाना चाहिए । आप भारत को ही देखिए न । भारत के उत्तर प्रदेश में कोई भी शहर किसी से कमजोर है क्या ? संघीयता में जाने
के बाद मधेश के हर शहर और नगर का उतना ही महत्व होगा । यदि इसी बीच में संविधान संशोधन होगा तो निसन्देह हम लोग भाग लेंगे ।
० क्या आपको लगता है कि एमाले देश में संघीयता लागू होने देगा ?
– संघीयता का कट्टर विरोधी है ओली  । वह राजा से हाथ मिला कर देश से संघीयता को खत्म करना चाहते हैं । ६३ साल का अंतरिम संविधान इस संविधान से अच्छा था । उसी को लागु कर दे ना, हम उसको मानने के लिए तैयार हैं । मधेशियों पर हमेशा से ही भारत परस्त होने का आरोप लगता आया है । हमारा रंग काला है इसी लिए हम पर यह आरोप लगता है । हम पर आरोप लगता है कि भारत हम लोगों को सहयोग करता है । हम से ज्यादा खस लोग भारतीय राजदूतावास से मदद लेते आए हैं । यह पहाड़ी लोग भारतीय दूतावास का खाते हैं और उसी को गाली भी देते हैं । हम मधेशी माँ की कोख से पैदा हुए सच्चे धरती पुत्र हैं इसी नेपाली धरती में जन्मे और यहीं के नागरिक हैं ।
० यहाँ हमेशा से भारत विरोधी राजनीति होती रही है, खुली सीमा बन्द करने की बात भी सामने आती है इस सन्दर्भ में आप कुछ कहना चाहेंगे ?
– आज तक नेपाल की धरती में जो भी परिवर्तन हुआ है वह भारत के सहयोग से हुआ है इस सच्चाई से हम मुँह नहीं मोड़ सकते हैं । आज भारत से बिजली आयी नेपाल में । भारत के कारण नेपाल का लोडसेडिंग हट रहा है । सब कुछ सहयोग भारत से ही हो रहा है ।  नाकाबंदी अगर भारत ने सच  में  किया होता तो एक हवा भी इधर से उधर नहीं होती । सिर्फ एक वीरगंज नाका बंद था तो इतना कोहराम क्यों मचा रहे हो ? अगर सच में भारत सभी नाका बंद करता तो क्या
होता ? नेपाल भारत सीमा कभी भी बंद नहीं होनी चाहिए । दोनों देशों का सदिंयो पुराना संबंध है । मधेश से तो विशेष रूप से भारत के साथ रोटी  बेटी का संबंध है जो केपी ओली इतना भारत का विरोध करते हैं वह भारत का ही खाते हैं । ओली की किडनी फेल होने पर भारत के ही विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम ने बचाया था । उनको भारत ही अपने खर्च में ईलाज कराके बचाया है और वही हम लोगों को भारत परस्त होने का आरोप लगाते हैं । हम नेकपा एमाले को मधेश और मधेशियों का जानी दुश्मन मानते है उसका हर प्रकार से प्रतिकार करने के लिए मधेशी मोर्चा तैयार है ।
० क्या आपको लगता है कि मधेशी को अधिकार मिलेगा ?
पिछले साल मधेश आंदोलन के समय जब ओली प्रधान मंत्री थे । एक ट्याकंर डीजेल चीन से लाने पर फूलमाला से सजा कर दुल्हन की तरह लाया गया था । ओली की मानसिकता ही भारत विरोधी है । हम लोग और कुछ नहीं चाहते बस संविधान में बराबरी का अधिकार अधिकार चाहते हैं । आपकी टोपी, भाषा और कल्चर का हम सम्मान करते हैं । आप भी हमारी कल्चर, धोती और भाषा का सम्मान करो । पहले जब यह खस लोग हम मधेशियों को धोती बोलते थे तो गुस्सा आता था पर अब खुशी होती है और सम्मान महसूस होता है । हमें और कछ नहीं चाहिए इस देश के नागरिक है इसीलिए बराबरी का अधिकार और सम्मान चाहते हैं और कुछ नहीं। हम कभी नहीं चाहते कि मधेश अलग देश बनें । हम नेपाल में पैदा हुए हैं और नेपाल देश में ही रहना चाहते हैं ।राजा की गद्दी जब तक थी तब तक प्रजा बहुत मानती थी और डरती भी थी । लोकतंत्र आने के बाद एक राजा गया तो ओली और प्रचंड नयां राजा बन कर आ गए । राजतंत्र में सभी संवैधानिक बड़े पदों में खस पहाडी लोगों का राज था अब मधेशी भी पढ़ लिख कर योग्य हैं और अपने बल पर पदों पर आने लगे हैं तो इन्हें जलन हो रही है । अब मधेशी जनता शिक्षा के कारण जागरुक हो गयी है तो यह उन्हें अपने अधिकार सें वचिंत करना चाहते हैं । अभी हाल ही में प्रधान न्यायाधीश सुशिला कार्की ने कहा कि घूघंट में बंद मधेशी महिलाओं को
अधिकार क्यों चाहिए ? मधेश में गरीब से गरीब औरत भी खुले में नहीं नहाती, पर्दा करती है तो आपको एतराज क्यों है भई ? हम मधेशी आपके कल्चर के लिए  कछ नहीं बोलते सम्मान करते हंै तो आप भी हमारे कल्चर का सम्मान कीजिए । घूघंट हम मधेशियों की कल्चर और शान है तो आपको इसमें एतराज क्यों है ?
० आपका मूल पेशा क्या है ?
– मेरा पेशा ही फूल टाईम राजनीति है ।
० आप की पार्टी संघीय समाजवादी फोरम का स्पष्ट दृष्टिकोण और लक्ष्य क्या है ?
– मधेश और मधेशी लगायत पहाड़ के पिछडेÞ दलित आदिवासी जनजाति और महिलाओेंं को उनका अधिकार दिलवाना यही हमारा लक्ष्य और यही दृष्टिकोण भी है ।
० क्या देश में इतने प्रदेश की आवश्यक्ता है ? ७ प्रदेश ज्यादा नही हुए ?
– हम लोगों को ज्यादा प्रान्त नहीं चाहिए । इतने छोटे देश में ७ प्रदेश चाहिए ही क्यों ? हिमाल, पहाड़ और मधेश कर के ३ प्रदेश बना दें तो हम लोग खुशी–खुशी मान लेगें ।
० पुरानी बात, आप लोगों नें सुशील कोईराला को वोट क्यों दिया ?
– कोईराला को वोट दे कर हम नेपाली काग्रेंस को अन्य दलों से अलग कर के तोड देना चाहते थे  ।
० नकली राजीनामा का खेल क्यों खेला ?
– यह हम नहीं खेलें । यह एमाले और काँग्रेस ने करवाया था ।
० सभी नाका बंद क्यों नही हआ ?
– हम लोग चाहते थे सभी नाका बंद हो पर सम्भव नहीं हो पाया । लेकिन इस बार के मधेश आदोंलन में सभी नाका बंद कर के काठमाडंू के नाक में दम करेगें ।
० तेल गैस की तस्करी किसने करवायी ?
– उस समय की ओली सरकार ने करवायी तेल और गैस की तस्करी । मधेश आंदोलन को बदनाम करने के लिए हमें बदनाम किया गया । सरकार की सारी विग्ंस, प्रशासन, प्रहरी, सशस्त्र और सेना इसमें संलग्न थे ।
० आप लोगों ने प्रचंड का साथ क्यों दिया ?
– उस वक्त यही सही था इसलिए ।  पूरा मधेश थक गया था । प्रचंड ने आश्वासन दिया था कि संविधान संसोधन करेंगे, शहीद घोषणा करेंगे इसीलिए हम लोग मान गए । कितना लड़ें ?  हमें उम्मीद थी कि वह मधेश के लिए कुछ करेंगे पर उन्होंने हम मधेशियों को धोखा दिया ।
० आप लोग कितने शहीदों के घर मिलने गए और उनका ५० लाख रुपया कौन खा गया ?
– करीब–करीब सभी शहीदों के घर हम मिलने गए थे  । कोई नहीं खाया है । जब मधेश प्रदेश बनेगा तब सभी मधेशी शहीदों को ५० लाख रुपया मिलेगा ।
० आपके कितने बच्चे विदेशों में पढते हैं, किसके खर्च पर ?
– मेरे तीनों बच्चे भारत में पढ़ते हैं । दोनों बेटे देहरादून में और बेटी राजस्थान में पढ़ती है । भारत के नहीं मेरे अपने निजी खर्च पर बच्चे वहां पढ़ रहे हैं ।
० विजय गच्छेदार से कैसा संबध है ?
– कोई भी संवंध नहीं है । विजय गच्छेदार से हमारी कोई सोच नहीं मिलती  । गच्छेदार बस पद और सत्ता चाहते हैं ।
० समर्थन  वापस क्यों नही लिए, क्या सत्ता और भत्ता के लालच में ?
हम सत्ता मे नहीं हैं और हमें लालच नहीं है सत्ता और भत्ता का । संसोधन हुए बगैर हम निर्वाचन होने नहीं देंगे । सरकार चाहे सेना लगाए या प्रहरी, चुनाव नहीं होगा । चुनाव करने का जो षडयंत्र हो रहा है उसी के लिए मेचीकाली भ्रमण किया गया है ।
० संविधान घोषणा के वक्त की तरह फिर सभी पहाड़ी पार्टी चुनाव करने के लिए एकमत हैं आप किसको कैसे रोक पाएगें ?
– जब तक जिएगें तब तक विरोध करेंगे । हम लोग मधेशियों के विरुद्ध हुए भेदभाव के खिलाफ । चुनाव के विरुद्ध किसी  भी हद तक जा सकते है हम ।
० मेची काली अभियान में क्या आप लोग एमाले का अश्वमेध का घोड़ा रोक पाएँगें, कहीं  फिर गौर कांड की पुनरावृति तो नहीं होगी ?
– हम नहीं रोकेगें जनता रोकेगी एमाले की इस अश्वमेध घोड़े को । हम लोग शातिंपूर्ण तरीका से जाएँगें और आंदोलन करगें ।

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