ओली की चीन यात्रा मृगतृष्णा तो नहीं ?

प्रो. नवीन मिश्रा:नेपाली प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने अपनी चीन यात्रा के दौरान चीनी प्रधानमन्त्री प्रधानमन्त्री खछयाङ के साथ बेजिंग में दस सहमति तथा समझौता पर हस्ताक्षर किए जिसमें पारवहन तथा यातायात समझौता भी शामिल है । अभी तक भारत एक मात्र देश था, जिसके साथ नेपाल का पारवहन तथा यातायात समझौता था । बहुत दिनों के इन्तजार के बाद अब चीन के साथ भी यह समझौता सम्भव हो सका है । इसके साथ ही दोनों देशों के बीच हुम्ला के हिल तथा तिब्बत के भारी भाग को जोड़ने वाला पुल के निर्माण सम्बन्धी भी समझौते किए गए हैं । हालांकि यह समझौता सिर्फ मानसिक सुख ही प्रदान करेगा । व्यवहार में इसका तत्कालिक लाभ नेपाल को मिलने वाला नहीं है । अभी नेपाल की यह अवस्था नहीं है कि इस समझौते के तहत वह किसी तीसरे देश के साथ व्यापार कर सके । भविष्य में नेपाल काजिकस्तान जैसे देशों के साथ पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति के लिए चीन की भूमि का उपभोग कर सकेगा । इसके लिए चीनी विद्युत लाइन तथा रेलवे सेवा नेपाली सीमा क्षेत्र में होना आवश्यक होगा । ऐसा होने पर नेपाल चीन बन्दरगाह का भी उपभोग कर सकेगा । लेकिन व्यवहार में यह सब कब सम्भव होगा, यह कहना मुश्किल है ।

अभी की परिस्थिति में नेपाल के लिए सबसे जरुरी पेट्रोलियम पदार्थ आयात सम्बन्धी कोई भी सम्झौता चीन के साथ नहीं हुआ है । लगभग पाँच महीना पहले नेपाल ने चीन के साथ नेपाल आयल निगम की आवश्यकता का एक तिहाई ईन्धन आयात करने सम्बन्धी एक समझदारी पत्र पर हस्ताक्षर किया था । लेकिन इसके बाद चीन के तरफ से कहा गया कि इस सम्बन्ध में वार्ता और अध्ययन अपूर्ण होने के कारण पूर्वाधार निर्माण के बाद ही यह सम्भव हो पाएगा । नेपाल में पेट्रोलियम पदार्थ की सम्भाव्यता अध्ययन करने के विषय में अभी तक दोनों देशों के बीच पत्राचार ही चल रहा हे । शुरु से ही चीन नेपाल के साथ पेट्रोलियम पदार्थों के आयात के बदले नेपाल में पेट्रोल उत्खनन पर विशेष जोड देता रहा है । इसी कारण चीन ने नेपाल के साथ पेट्रोलियम उत्खनन संभाव्यता सम्बन्धी समझौता किया है । पोखरा एयरपोर्ट निर्माण सम्बन्धी भी चीन के साथ तीन सम्झौता हुए हैं । पोखरा एयरपोर्ट को क्षेत्रीय रूप में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का विमानस्थल बनाने के लिए चीन नेपाल को एक्कीस अरब रुपए का सहुलियतपूर्ण ऋण सहयोग प्रदान करेगा । इस रकम के पचीस प्रतिशत ब्याज मुक्त होंगे जबकि पच्चहत्तर प्रतिशत पर सहुलियतपूर्ण ब्याज देना होगा । चीन पोखरा ने में महावाणिज्य दूतावास खोलने के लिए भी नेपाल के सामने प्रस्ताव रखा है ।

दोनों देशों के बीच चीन में नेपाल के व्यापार वृद्धि सम्भाव्यता के अध्ययन सम्बन्धी सम्झौते भी किए गए । इस अन्तर्गत चीन, नेपाल में उत्पादित वस्तुओं को चीन तथा अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पहुँचाने के लिए पहल करेगा । इसके लिए चीन नेपाल को आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग प्रदान करेगा । नेपाल तथा चीन के बीच बौद्धिक सम्पत्ति संरक्षण अधिकार के विषय में भी समझौते हुए हैं । इसके अन्तर्गत विशेष रूप से उत्पत्ति के अधिकार तथा कौपिराइट सम्बन्धी अधिकार को सम्बोधित किया गया है । चीन ने नेपाल को लगभग चालीस करोड़ का सोलर पैनल देने की बात कही है । दूसरा महत्वपूर्ण सम्झौता नेपाल में चीनी बैंकों के शाखा खोलने सम्बन्धी है । इससे चीनी व्यापारियों को नेपाल में काम करने में सहूलियत होगी । इस समझदारी के परिणामस्वरुप भविष्य में नेपाली बैंक भी चीन में अपनी शाखा खोल सकते हैं । इन समझौतों और समझदारी का व्यवहार में जो भी प्रतिफल हो, लेकिन तत्काल नेपाली टोली बहुत उत्साहित है तथा उसका मानना है कि नेपाल चीन सम्बन्ध और सुदृढ़ हुए हैं । नेपाली प्रधानमन्त्री ओली ने चीनी राष्ट्रपति सी को नेपाल आने का न्यौता भी दिया है । ओली ने इसी तरह का निमन्त्रण चीनी प्रधानमन्त्री ली को भी दिया है । भविष्य में आशा की जानी चाहिए की भ्रमणों के आदन–प्रदान से नेपाल और चीन के बीच समझदारी बढ़ेगी ।

इतना कुछ होने के बावजूद भी तातोपानी नाका खोलने के सम्बन्ध में अभी भी चीन की आनाकानी बरकरार है । प्रधानमन्त्री ओली के भ्रमण की एक और उपलब्धि है, जलविद्युत परियोजनाओं में चीन की सहायता । चीन चार सौ मेगावाट वाले अरुण जल विद्युत परियोजना में लगानी करने को तैयार हो गया है । नेपाल की ईच्छा थी कि चीन कालिगण्डकी परियोजना के लिए भी सहायता करे, लेकिन यह सम्भव नहीं हो सका । चीनी प्रधानमन्त्री ली ने नेपाली प्रधानमन्त्री ओली से नेपाल में संविधान निर्माण पर सन्तोष जताते हुए कहा कि अब नेपाल को अपने दोनों ही बडेÞ और आर्थिक दृष्टिकोण से सम्पन्न पड़ोसी राष्ट्रों की मदद से विकास के मार्ग में अग्रसर होना चाहिए क्योंकि नेपाल अभी भी एक पिछड़ा राष्ट्र है । चीनी प्रधानमन्त्री के कहने का तात्पर्य यह था कि नेपाल को दोनों ही पड़ोसी राष्ट्रों से सहायता तो लेनी चाहिए लेकिन वह कभी भी भारत के विरोध में चीन और चीन के विरोध में भारत को इस्तेमाल करने की नीति का परित्याग करे । पता नहीं नेपाली प्रधानमन्त्री और प्रतिनिधिमण्डल को यह बात कितनी समझ में आई । नेपाल ने चीन से अपने देश में रेल लाईन बिछाने का आग्रह तो किया, लेकिन इस सन्दर्भ में भी नेपाल के ही ढ़ीला सुस्ती के कारण कोई प्रगति नहीं हो सकी है । नेपाल के पास आग्रह के अलावा कोई ठोस योजना नहीं थी, जिसे वह चीन के समक्ष प्रस्तुत कर सके ।

वास्तव में केरुङ तक रेल लाईन बिछाने का काम चीन का है लेकिन यह कार्य आर्थिक, प्राविधिक तथा भौगोलिक अवस्था पर निर्भर है । हो सकता है, भविष्य में नेपाल और चीन रेल मार्ग से जुड़ जाए । चीन के राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री दोनों ही ने नेपाल के एक चीन नीति पर सन्तोष व्यक्त करते हुए नेपाल की भूमि से किसी भी प्रकार की चीन विरोधी गतिविधि नहीं होने देने का आग्रह भी किया । इस पर प्रधानमन्त्री ओली ने नेपाल सदा ही एक चीन नीति का अवलम्बन करता रहा है और वह अपनी भूमि में किसी भी प्रकार की चीन विरोधी गतिविधि नहीं होने देगा । नेपाली प्रधानमन्त्री के आमन्त्रण को स्वीकार करते हुए चीन के राष्ट्रपति सी ने वर्ष २०१६ के अन्दर ही नेपाल आने की प्रतिवद्धता दर्शाई मिला जुला कर कहा जा सकता है कि नेपाली प्रधानमन्त्री का चीन भ्रमण सामान्य रहा । कोई बहुत बड़ी उपलब्धि दिखाई नहीं देती ।

चाहे कुछ भी हो जाए चीन कभी भी भारत का विकल्प नहीं हो सकता है । इसके कई कारण हैं । पहला, भारत की तुलना में चीनी सीमा की दूरी अधिक है । दूसरे, भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है । तीसरे, चीन का मौसम नेपाल के लिए प्रतिकुल है । अभी हाल ही में हमने यह आजमा कर भी देख लिया है । मधेश आन्दोलन के कारण जब लगभग ६ महीनों तक नेपाल में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति हुई भी तो हमने चीन के माध्यम से इस कमी को दूर करने का प्रयास किया था, जो सफल नहीं हो सका । भ्रमण के दौरान चीन राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया कि नेपाल की स्थिरता और विकास में ही चीन और भारत दोनों पड़ोसी राष्ट्रों का हित समाहित है । उनका यह भी मानना था कि चीन, नेपाल और भारत तीनों ही देशों को मिल कर सहयोग तथा विकास के मुद्दों पर वार्ता होनी चाहिए । चीनी राष्ट्राध्यक्षें ने भी बार बार भारत का जिक्र कर नेपाल के लिए भारत के महत्व को दर्शाया है, जिसे नेपाली शासकों को भी समझ लेना चाहिए ।

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