ओली जी को समझना चाहिए, यह देश उनके पूर्वजों द्वारा अर्जित (पैतृक) संपत्ति नहीं है

गंगेशकुमार मिश्र, कपिलबस्तु, 21 जनवरी । 

मधेशियों  को चिढ़ाने की क़ीमत, देश को अपने विखण्डन से चुकानी पड़ सकती है।”
” दबाव उतना ही दो कि रोटी फूल जाए, इतना ना दो की रोटी फट जाए और हाथ जल जाए।” received_778050945655169
” राजेन्द्र महतो जी को, दिल्ली से वार्ता के लिए; काठमांडू बुला कर,
वार्ता की मेज सजा कर। मधेश आन्दोलन का मज़ाक उड़ाया गया है।”
” सत्य को स्थापित करने में,  समय तो लगता है,पर जीत सदा सत्य की होती
है। अधिक समय तक मधेश के अधिकारों को दबा कर, नहीं रख सकती; सरकार।
क्योंकि सत्य मधेश के साथ है।”
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जहाँ सच्चाई होती है, वहीं अच्छाई होती है।झूठ का कारोबार करने वालों से, सच्चाई की उम्मीद कहाँ होती है ? पर एक पहल करना होता है, बड़प्पन के लिए।भारत जब चाहे, पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा सकता है, पर वार्ता के लिए हमेशा तैयार रहता है; आतंक का दंश सहते हुए भी। क्या इसे मज़बूरी कहेंगे ? मधेशी मोर्चा के नेताओं की भलमनसाहत है कि फिर उन्हीं ठगों से वार्ता करने आ गये, जिनसे वार्ता की सफलता की कोई उम्मीद न थी।
वार्ता के लिए सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र महतो को, दिल्ली से
सीधे काठमांडू बुलाया; सत्ता सर्कस के रिंग मास्टर ओली जी ने।शायद भारत को दिखाने के लिए, ये भद्दा मज़ाक प्रायोजित किया गया था कि कुछ न कुछ तो हम कर ही रहे हैं। पर वही हुआ, जो पूर्व नियोजित था; ” सत्ता का खेल-वार्ता फेल।  ओली जी को समझना चाहिए, यह देश उनके पूर्वजों द्वारा अर्जित (पैतृक) संपत्ति नहीं है।मधेश ने अपने ख़ून, पसीने से सींचा है; इस देश के विकास में योगदान दिया है।जब मधेश के साथ नाइंसाफी होगी, तो यह देश  चैन की साँस नहीं ले सकेगा। मधेशी आवाम की सजगता बड़ी है, अपने अधिकारों के प्रति; यही इस आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मधेश का युवावर्ग आक्रोशित है, बेचैन है; कुछ कर गुज़रने को लालायित है। ऐसे में यह सरकार, इस आन्दोलन का मज़ाक उड़ा रही है; वार्ता के बहाने। इसकी बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है, देश की अखंडता निःसंदेह खतरे में है। रोटी को फुलाने के लिए, उतना ही दबाया जाता है, जितने में वह फूल जाय; अधिक दबाया कि हाथ जल जाया करता है। अब से पहले मधेश ऐसा आन्दोलित नहीं हुआ था, इससे प्रतीत होता है; इस बार
मधेशी युवा हाथ पर हाथ धरे बैठने वाला नहीं है; अब कहने वाला
है,…………
” मत घबराओ सत्ता वालों, अभी कहाँ कुछ हुआ विशेष।
लम्बी, गहरी निद्रा लेकर; अभी-अभी है, जगा मधेश।”

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