ओली प्रधानमन्त्री के प्रति आक्रामक, अपने ही पीठ थप–थपाते किया अपमान

काठमांडू, ११ अश्वीन
प्रमुख प्रतिपक्ष दल नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली, प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के प्रति संसद् में आक्रमक रुप में प्रस्तुत हुए हैं । साथ में अपने ही पीठ थप–थपाते हुए उन्होंने प्रधानमन्त्री का अपमान भी किया है । अध्यक्ष ओली का मानना है कि अभी तक प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने कुछ भी नहीं किया है । ओली का आरोप है कि प्रचण्ड अपनी औकात और क्षमता से कुछ ज्यादा ही दिखाई पड़ने लगे हैं ।

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माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ नेतृत्व में सरकार बनने के बाद ओली का यह संसद–सम्बोधन दूसरा है । इससे पहले उन्होंने प्रचण्ड प्रधानमन्त्री बनते वक्त सम्बोधन किया था । सामान्यतः प्रतिपक्षी दल, भारत और मधेशी–जनजाति मोर्चा के प्रति आक्रमक दिखाई देनेवाले एमाले अध्यक्ष ओली ने अपना पुराना ही रुप प्रकट किया है, जो इससे पहले भी दिखाई देता था ।
मंगलबार संसद् में सम्बोधन करते वक्त ओली ने कहा है कि प्रधानमन्त्री प्रचण्ड के द्वारा नेपाल में विदेशी हस्तक्षप आमन्त्रित हो रहा है । ओली का मानना है कि संविधान संशोधन नेपालकी आन्तरिक मामला है और प्रधानमन्त्री प्रचण्ड की भारत–भ्रमण के दौरान किया गया २५ सूत्रीय समझौता राष्ट्रहित विपरित है । प्रधानमन्त्री प्रचण्ड के ऊपर उंगली उठाते हुए ओली ने आगे कहा– ‘प्रधानमन्त्री ने दावा किया है की मैंने नेपाल–भारत सम्बन्ध में सुधार किया है । भारत के साथ सम्बन्ध कैसे बिगड़ गया था ? और कहाँ और कैसे सुधार किया, मुझे पता नहीं है । इसका जानकारी संसद् में होना चाहिए ।’
इसी तरह अध्यक्ष ओली ने प्रचण्ड का हर दावा झूठ रहने की बात बताई । भूकम्प पीडितों में राहत वितरण सम्बन्धी प्रसंग को आगे लाकर ओली ने कहा– ‘पीडित लोगों को राहत देने के लिए मैंने ही सम्पूर्ण प्रक्रिया को पूरा किया । सम्बन्धित स्थलों में वित्तीय संस्था और रुपये पहुँच चुका था । जिस तरह टंकी में पानी है और धारा खोलने से आ जाती है, उसी तरह उन्होंने भी धारा खोल दिया और पीडितों को राहत मिल गई । लेकिन प्रचण्ड इस कार्य का भागीदार सिर्फ अपने को ही मानते हैं । यह सब झूठ नहीं है तो क्या है ?’ सांसद में जब ओली बोल रहे थे, वहाँ मौजुद सांसद लोग उनकी बात सुनकर ऊँचा स्वर में खिलखिला रहे थे ।
उसी वक्त ओली, और उत्साहित होते हुए ‘तुइन’ (रस्सी का पुल, जिसको पकड़ कर आदमी कष्टप्रद ढंग से नदियाँ पार करते हैं) सम्बन्धी प्रसंग में पहुँच गए और कहने लगे– ‘अब कुछ समय के बाद वह काम भी पूरी हो जाएगी और हमारे प्रधानमन्त्री (अपने ही पीठ थपथपाते हुए) कहेंगे– वाह ! वाह ! वाह !!’
सुरु से ही ओली, हांस्य कलाकारों की तरह अभिनय–शैली में संसद में प्रस्तुत हुए थे । ऐसा लगता था कि ओली का उद्देश्य प्रधानमन्त्री को अपमान करना है और अपने ऊँचा दिखाना है । उनकी इस प्रस्तुती को लेकर सञ्चार माध्यम तथा सामाजिक सञ्जालों में आलोचना भी होने लगी है । लोग कहने लगे हैं– ‘ओली द्वारा प्रधानमन्त्री का अपमान प्रधानमन्त्री के लिए सह्य नहीं है, प्रधानमन्त्री की तरफ से इसका प्रतिवाद होना चाहिए ।’

 

 

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