ओली सरकार कुर्सी बचाने के लिए सांसदों को मंत्रालय का उपहार दे रही है : श्वेता दीप्ति

वर्ष-१९,अंक-१,जनवरी २०१६ (सम्पादकीय)

बिना किसी विशेष उपलब्धि के बीता हुआ वर्ष नेपाल की जनता को कई दर्द दे गया । अभाव और पीड़ा को झेलता जनमानस, उम्मीदों की आस और अकर्मण्य शासन के साए में जीने को विवश है । अन्याय और भ्रष्टाचार को देखना और बहुत ही आसानी के साथ पचाना, राष्ट्रवाद की घुट्टी ने आसान कर दिया है । कल तक पहाड़ की जो जनता छोटी–छोटी बातों पर सड़कें जाम किया करती थी, टायर जलाया करती थी, आज अपनी असीम सहनशीलता का परिचय दे रही है और कालाबाजारी तथा मंहगाई की मार को राष्ट्रवाद की मजबूत भावना के साथ स्वीकार कर रही है । जनता विरोध जताए बगैर सरकार के हर कदम पर खामोशी के साथ सहयोग कर रही है ।
‘अभी–अभी आए और चल दिए, अभी तो हमने अपना दामन सम्भाला भी न था’, जी हाँ, सत्ता परिवर्तन का खेल पर्दे के पीछे जारी है । फिर भी,


नगण्य उपलब्धियाँ और असंख्य मंत्रालयो का गठन करती ओली सरकार, अपनी कुर्सी बचाने के लिए रोज जनता को भार और सांसदों को मंत्रालय का उपहार दे रही है । मंत्री अपने मंत्रालय की तलाश में भटक रहे हैं । असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि बँटे हुए मंत्रालय को व्यवस्थित नहीं किया जा सका है । काम नहीं, किन्तु पद, विदेश भ्रमण, वेतन और भत्ता की सुविधा तो मिल रही है । इससे अधिक और क्या चाहिए ? एक पड़ोसी को गाली देकर, दूसरे पड़ोसी से सहयोग पाने की ख्वाहिश और दावे किए जाते रहे किन्तु परिणाम शून्य । आर्थिक व्यवस्था की चरमराई हुई स्थिति किन्तु नेताओं की झोलियाँ भरी की भरी । यह है एक विवेक शून्य और अदूरदशीं शासन और शासक की पहचान जिसके तहत जनता, नए नेपाल की भरपूर सम्भावना तलाश कर रही है ।
चार महीनों से चल रहे मधेश आन्दोलन अनेक व्यवधानों के बावजूद आज भी अनवरत रूप से जारी है । गरमी की तीखी धूप, बारिश की बौछार और शीत के कहर ने भी उन्हें अपने मार्ग और विश्वास से नहीं डिगाया है । आन्दोलन जारी है और आगे भी जारी रहने की सम्भावना स्पष्ट तौर पर देखी जा रही है । मजे की बात तो यह है कि इस स्थिति को यथावत रखने में हमारी सरकार पूरा सहयोग कर रही है । इस आस में हैं हम कि—
रह–रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी,
आगे और बढ़ें तो शायद दृश्य सुहाने आएँगे ।

(दुष्यन्त कुमार)shwetasign

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