ओली सरकार ! ये “भीड़” नहीं “ऊर्जा” है। छेड़ोगे, जल जाओगे : गंगेश मिश्र

गंगेश मिश्र, २,नवम्बर,वीरगंज |

हवा के वेग को टोकोगे,
उड़ जाओगे।
ये “भीड़” नहीं “ऊर्जा” है।
छेड़ोगे,
जल जाओगे ।

वीरगंज में उमड़ी जनता (Jahangast)


धीरे धीरे, आन्दोलन तीसरे माह में प्रवेश कर चुकी है। एक सरकार गई, अब ओली जी की सरकार है। मधेश के प्रति, यहाँ के शासकों का वर्ताव हमेशा से पक्षपात पूर्ण ही रहा।

इन्होंने कभी भी मधेशियों को स्वीकार ही नहीं किया, यही यथार्थ है। इसका जीता जागता प्रमाण है, राष्ट्रपति महोदया का यह कहना कि मधेशियों की माँग ही स्पष्ट नहीं है। स्व. मदन भण्डारी जी की पत्नी का ऐसा कहना शायद उचित भी है, अस्पष्टता उनकी नियति है। मधेश के अहिंसात्मक आन्दोलन को दबाने के लिए सरकार हिंसा का सहारा ले
रही है,साथ ही वार्ता का खेल भी खेल रही है। दो नवम्बर की सुबह बीरगंज के मितेरी पुल पर, आन्दोलनकारियों पर सरकार के जवानों ने लाठियों से पीटा। साथ ही टेंटो पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी, जिससे कई आन्दोलनकारी घायल हो गए। सरकार के इस बर्बरतापूर्ण रवैये से लगता है, कि वास्तव में यह सरकार जंगलराज चलाना चाहती है।

birganj latest (Jahangast)


सरकार शायद भूल रही है, इतिहास को। तानाशाही के बल पर सरकारें नहीं चला करती।सत्य भले कमज़ोर दिखाई दे, जीत सदा सत्य की ही होती है। मधेशी जनता

को “भीड़” समझने की भूल, इस सरकार को बहुत महंगी पड़ने वाली है। सरकार जितना चाहे, कोशिश करले अब आन्दोलन को दबा नहीं सकती। हजारों हजार
की संख्या में मधेशी आवाम सड़को पर उतर रही है, जो इस से पहले की सरकारों ने नहीं देखी थी।
बकरे की माँ, कब तक
खैर मनाएगी।।।
अब आ गया है वक्त,
जान तो इसकी; जाएगी।।

अपडेट

( बीरगंज में नाकाबन्दी कर रहे आन्दोलनकारियों को सोये हुए अवस्था में जिन्दा जलाने के नेपाल पुलिस के खूनी खेल के खिलाफ बीरगंज में उमडा रोष, हर गली, हर मुहल्ले, हर चौक चौराहा और हर गांव गांव में नेपाल पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है।बीरगंज का मितेरी पुल के नाकाबन्दी स्थल को एक बार फिर आन्दोलनकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। वहां रहे नेपाल प्रहरी और सशस्त्र प्रहरी को आन्दोलनकारियों ने खदेड दिया है और उस पूरे क्षेत्र को पुलिस निषेधित क्षेत्र बना दिया है
)

birganj (Jahangast)

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