औरत खरीद-फरोख्त नेपाल-भारत के लिए एक बड चुनौती

विनय कुमार: भारत की मुर्म्बई, मायानगरी के रूप में चर्चित है । यहाँ अपने अनेक सपनों को सच करने के लिए बहुत सारे लोग हर दिन पहुँचते हैं । लेकिन अपनी मन्जिल तक ranjit raeकोई-कोई पहुँच पाते हैं । नेपाल से भी बेरोजगार लोग इसी उद्देश्य से मुर्म्बई पहुँचते हैं । नेपाली महिलाएं भी मुर्म्बई की चमक-दमक और सिनेमा के आकर्षा से खींची हर्ुइ दलाल के हाथों अनेक कोठियों में पहुँचाई जाती हैं ।
मुर्म्बई के ही किसी कोने में नेपाली महिलाओं का एक कार्यक्रम था । वे लोग अपने विचार बडÞी मुश्किल से रख पा रही थी । उसी समय एक युवती कुछ बोलने के लिए तैयार हर्ुइ । लेकिन उसे रोक दिया गया । रोकने वाली उसकी ही फुफी थी । नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज के एक कार्यक्रम में अधिवक्ता राममाया लामिछाने ने अपना कार्यपत्र प्रस्तुत करते समय ऐसी बात बताई ।
नेपाल में औरतों का व्यापार एक समस्या और चुनौती के रूप मंे है । इस समस्या के समाधान के लिए अनेक गैर सरकारी संघ-संस्थाएं भी कार्यरत हैं । फिर भी औरतों की खरीद-फरोख्त कितनी संख्या में हर वर्षहो रही है, इसका बास्तविक तथ्यांक किसी के पास नहीं है ।
आखिर औरतों के इस व्यापार की परिभाषा क्या है – यह कैसे होता है – कहाँ से होता है – इस गिरोह में कौन-कौन है – हमंे ऐसे बहुत सारे प्रश्नों का जवाब ढूंढÞना होगा । संयुक्त राष्ट्रसंघीय मानव अधिकार उच्च आयुक्त कार्यालय की परिभाषा के अनुसार “दासतापर्ूण्ा व्यवहार के लिए किसी भी व्यक्ति को डरा, धामका कर अपनी शक्ति और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए काम में जबरन लगाना, एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, और ले जाने में सहयोग करना, ऐसे सारे काम को बढÞावा देना औरतों की खरीद-विक्री माना गया है ।’ इसके लिए लिए बहुत सारे गिरोह सक्रिय हैं । खास तौर पर अपना ही नाते-रिस्तेदारों से ठगी हर्ुइ महिलाएं रोजगार के प्रलोभन में बेची जाती है । राजनीतिक दलों के नेता भी ऐसे गिरोह से ताल्लुकात रखते हैं और आर्थिक लाभ भी लेते हैं, ऐसा सुनने में आया है । नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा होने से भी दलालों को यह काम करने के लिए सहज होता है । इसे जडÞ से उखाडÞ फेंकने के लिए दोनों देशों के सुरक्षाकर्मियों को nt6मिलजुल कर काम करना होगा ।
ऐसे अपराधी को सजायस्वरुप २० वर्षकैद और २ लाख तक जरिवाना की व्यवस्था की गई है । इसी सवाल पर भारतीय राजदूत महामहिम रञ्जित रे ने कहा है कि महिलाओं की बिक्री तथा देह व्यपार जैसे मुद्दे पर दोनो देशों के सुरक्षा निकाय को कडÞा कदम चालने की जरुरत है । २१ फेव्रुअरी शुक्रवार को राजधानी मंे देह व्यपार के विरुद्ध नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज द्वारा आयोजित अन्तरक्रिया कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि राजदूत रञ्जित रे ने कहा था -‘यह कोई साधारण मुद्दा नहीं है, इसके ऊपर दोनो देशों को मिल कर सख्ती से कदम उठाना होगा । महिलाओं पर हो रही हिंसा और दर्ुर्व्यबहार पर अपनी चिन्ता जताते हुए राजदुत महोदय ने महिलाओं की बिक्री के मुद्दे को मिडिया, सुरक्षाकर्मी तथा इससे सम्बन्धित निकायों को जोडÞदार आवाज उठाने का सुझाव भी दिया । उन्होने आगे कहा- ‘महिलाओं की विक्री दोनो देशों की प्राथमिक समस्या में है, सिर्फएनजिओ ही इसका समाधान नहीं दे सकते । सरकार और भारतीय राजदूत इस मुद्दे पर सहयोग करने के लिए हरपल तैयार हैं ।’
नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज की अध्यक्ष चन्दा चौधरी ने इस समस्या के समाधान के लिए खुली सीमा पर कडÞी चौकसी और सावधानी बरतने का सुझाव दिया । दहेज प्रथा, घूंघट प्रथा, घरेलू हिंसा मे सिर्फमहिलाएं ही क्यों, उन्होने प्रश्न किया । संविधानसभा मे विभिन्न वगोर्ं की महिलाओं को उचित भूमिका नहीं दी जाने पर उन्होने रोष प्रकट किया । महिला मैत्री समाज राजधानी में ही नहीं बल्कि गाउँ-गाउँ में भी संगठन और चेतना फैलाने की बात पर उन्हो ने जोडÞ दिया । चौधरी का कहना था- महिला कोमल है, मगर कमजोर नहीं । नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज एक सेतु बनकर काम करने के लिए तैयार रहने की जानकारी भी उन्होंने दी । इसके लिए महिलाओं को आगे आने के लिए उन्होंने आग्रह भी किया । राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष शेख चानतारा ने कहा कि नेपाल से दास प्रथा हट गई, लेकिन नयें दास-दासी फिर से जन्म ले चुके हैं । उन्होने कहा कि नेपाली महिला बहुत देशों में काम करती हैं मगर कोई सुरक्षित नहीं है । संविधानसभा मंे महिलाओं की सिट ३३ प्रतिशत नहीं, ५० प्रतिशत होनी चाहिए ।  इसीतरह काँग्रेस की पर्ूव महिला मन्त्री मिना पाण्डे का कहना था कि दलीय रुप से इस का समाधान खोजना जरुरी है । उन्होने कहा- ‘राजनीतिक दलों ने इस समस्या को महत्व नहीं दिया है । ऐसे मुद्दे के ऊपर जोडÞदार बहस होनी चाहिए । माहानगरीय पुलिस परिसर प्रमुख एसएसपी रमेश खरेल ने सीमा सुरक्षा में महिलाओं की विक्री पर कडÞी निगरानी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की । कार्यक्रम में डिसिएम जयद्विप मजूमदार, पर्ूव आइजिपी शैलेन्द्र श्रेष्ठ, पीआइसी प्रमुख अभय कुमार, मोनिका श्रीवास्तव, विभिन्न संस्था से आवद्ध करीब सयकडÞों महिलाओं की सहभागीता थी । कार्यक्रम नेपाल भारत पुस्तकालय में आयोजन किया गया था । नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज ने एक वर्षमें ९ बार कार्यक्रम कर चूका है ।

नेपाल-भारत बीच समझदारी जरूरी
वीपी कोइराला फाउण्डेशन के तत्वांधान में एवं नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के संयोजन में प्राध्यापक डा. लोकराज बराल की नवीनतम कृति पर एक र्सार्थक वार्ता सम्पन्न हर्ुइ । जिसके मोडरेटर थे, कान्तिपुर दैनिक के संपादक एवं लेखक सुधीर शर्मा ।
चौहत्तर वषर्ीय राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर डा. बराल की दर्जन के लगभग पुस्तकें प्रकाशित हैं । हाल में उनका जीवन-चरित्र -अटो बायोग्राफी) प्रकाशित और चर्चित है, जिसका नामकरण विद्वान लेखक ने ‘रोमांचित जीवन’ किया है ।
सुधीर शर्मा का इस पुस्तक के बारे में सब से पहला प्रश्न था, अक्सर लोग अपनी जिन्दगी के सफरनामे में अपनी खामियों को छुपाते हैं, सिर्फअपनी खूबियों का इजहार करते हैं । आप इस में कहाँ तक खुले हैं – भारत में नेपाल की ओर से चौध महीने राजदूत रह चुके डा. बराल ने कूटनैतिक भाषा में ही जवाब दिया- इस मामले में जहाँ तक सम्भव हुआ मेंनर्ेर् इमानदारी बरती है ।
संपादक सुधीर शर्मा द्वारा पूछे गए अनेकों सवाल का जवाब देने के दरम्यान युवावस्था में तरुणदल के नेता भी रह चुके प्रो. बराल ने बहुत सारी नीजी बातों का खुलासा भी किया । मसलन, उनका २०१५ साल में पहली बार काठमांडू आना, २०१७ साल में पिता की इच्छा के विरुद्ध अन्तरजातीय शादी करना, अपना व्रि्रोही चरित्र सम्भवतः विराटनगर के प्रसिद्ध कोईराला परिवार से प्रभावित, तत्कालीन काठमांडू का यथार्थ अविकसित अवस्था, २०१५ साल में राजा महेन्द्र के हाथों दशहरे के अवसर पर ‘टीका’ प्रसाद ग्रहण करना, बाद में नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में अध्ययन करना, ३६ वर्षों तक त्रिविवि अन्तरगत राजनीति शास्त्र का अध्यापन और बाद में देश की बदतर हालत देख कर डेमोक्रेसी से ही वितृष्णा पैदा होना, कुछ-कुछ माओवादी के नजदीक आना वगैरह-वगैरह बातों की चर्चा हर्ुइ ।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आज के प्राज्ञिक क्षेत्र में सिर्फऔर सिर्फचाकडÞी बजाने की बुरी आदत बांकी रह गई है । देश का निर्माण कैसे होगा, तरक्की के रास्ते कैसे खुलेंगे- इस ओर बुद्धिजीवियों का और नेतृत्व वर्ग का बिल्कुल ही ध्यान नहीं जा रहा है । सिर्फभारत को गाली देकर लोग अपने को राष्ट्रवादी होने का दावा ठोक देते हैं । नेपाल और भारत के बीच समझदारी की बहुत जरूरी है । सीमा विवाद को भी स्थानीय स्तर के नेता गण आपस में मिल जुल कर सुलझा सकते हैं । वार्तालाप में अनेक स्रोताओं के जवाफ प्रो. बराल ने दिए ।
यह कार्यक्रम भारतीय राजदूतावस के प्रथम सचिव अभय कुमार की सक्रियता में सम्पन हुआ था ।

loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz