और नहीं कुछ कर सकते तो कम से कम बहिष्कार करें।

मुकेश झाdscn3186
अहंकारका आलम देखो
खून भरें है प्यालों में
खून सने ये हाथ हैं इनके
सत्ताके गलियारों में
तरह तरह का बाना पहने
ऐश करें दरबारों में
इंद्रासन का सुख भोगें ये
राक्षसों के बानो में लहू पीते हैं
चूस चूस कर मानव के कंकालों से
आज की बात नही रही है
परम्परा है सालों से
रावण मरा राम के हाथो
कृष्ण कंस के काल हुए
इनका काल बने ना कोई
ये उन्मत्त निःशंक बने
न कोई कानून न मर्यादा
न ही लोक का लाज करे
वयभिचारी अत्याचारी का उपमा
इन पर कम लगे
विनती इतनी जनमानस से
इनका अब इलाज करें
और नहीं कुछ कर सकते
तो कम से कम बहिष्कार करें।
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