ककटेल मंत्री मंडल ! आप भी मजा लीजिये : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , २० अक्टूबर |

दशहरा है ही शराब का त्योहार । इसीलिए देश का नया नवेला मंत्री मंडल भी ककटेल हो गया है । सभी तरह के शराब का मिश्रण कर के बनाया गया एक नयां और नायाब स्वाद का शराब जैसा ही है यह ककटेल मंत्री मंडल । इस मंत्री मंडल में क्या नहीं है ? पांच, पांच उप–प्रधानमन्त्री बनाना कोई हंसी खेल नहीं है । यह कोई एक ‘किडनी वाला’ ही कर सकता है । अपने ही तरह का दूसरा किडनी का मरीज जो डायलोसिस में है । उसे एक किडनी वाले प्रधानमंत्री ने राज्यमंत्री बना डाला और एक आंख वाले गद्धार (गच्छेदार) को भी उप–प्रधानमंत्री पद से सुशोभित कर दिया ।

oli challenges-before-oli-802-x-460प्रधानमन्त्री के.पी. ओली उप–प्रधानमंत्री का पद अपनी जेश से बख्शीश की तरह बांट रहे है । जिसने जितने ज्यादा बंदुक उठाया और जन संहार किया वही मन्त्री और सभामुख पद के योग्य है । वर्तमान के नये नवेले गृह मन्त्री शक्ति बस्नेत माओवादी जनयुद्ध के पूर्व लड़ाकु है । देश में वैसे ही गृह युद्ध जैसा माहौल है । उस मे गृह मंत्री भी लड़ाई का अनुभवी ? अब तो देश का बेड़ा गर्क होने से कोई नहीं रोक सकता । सो संविधान सभा मे कुर्सी ले कर उठा पटक करता है वह सिंचाई मंत्री बन जाता है । शायद कुर्सी उठा कर फेकने का अनुभव खेत में पम्प सेट और हल को उठाने में काम आएगा ?

कुछ सालों से देश में ब्युटीपार्लर, फाईनान्स कंपनी, बैंक, सहकारी संस्था, एफएम और अनलाइन मीडिया का व्यवसाय कुकुरमुत्ते की तरह खूब फलफूल रहा है । अब उस में उप–प्रधानमंत्री का पद भी कुकुरमुत्ते की तरह पांच–पांच जगह उग गया है । इसीलिए यह मंत्री मण्डल का विस्तार नहीं कत्तिका धान का फसल है । जो नेकपा एमाले, एकिकृत माओवाद, राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी सहित इस सरकार में शामिल अन्य दल काट रहे हैं ।

जो बच्ची १२ साल की छोटी उम्र में राजनीति करती है और जनयुद्ध मे शामिल हो कर बंदुक उठाती है वह सभासद जैसे गरिमामय पद के लिए योग्य मानी जाती हैं । और पञ्चायती व्यवस्था के कीचड़ में खिला हुआ ‘कमल’ जो ०६३ साल के जन आन्दोलन में अपने डंठल से आन्दोलनकारियों पर वार कर दमन करता है । वही कमल कीचड़ से सने हुए अपने अतीत के साथ लोकतंत्र में देश के विदेश मंत्रालय में अचानक खिल जाता है । और किसी को आश्चर्य नहीं होता । और यही निर्लज्जता के साथ दिल्ली में तेल की भीख मागंने जाता है ।

जब यह कमल विदेश मंत्री नहीं बना था राप्रपा के अध्यक्ष के नाते भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ट्विटर में तथाकथित नाकाबन्दी का विरोध करते हुए मोदी को कोसते हुए अपने मन की भड़ास निकाल रहा था । उस समय बड़ा राष्ट्रवादी और देश प्रेमी बन कर मोदी को कोसने वाला यह कमल की राष्ट्रवादिता कहां चली गई जब यह दिल्ली गया । उस समय यह कमल क्यों भूल गया कि उसके डंठल ०६३ साल के आन्दोलन के खून से भिगा हुआ है ? हिन्दू धर्म और गाय की रट लगाते लगाते यह कमल लोकतन्त्र की वैतर्णी पार कर के सिंह दरवार के स्वर्ग में पहुंच गया है ।

इस मंत्री मंडल मे सभी एक से एक अपराधी भरे हुए हैं । इस मंत्री मंडल को देख कर लगता हैं मुंबई के माफिया का अड्डा और जिस के मुखिया या डान है श्री के.पी. ओली । नेपाल के मंत्री मंडल को माफिया में रुपान्तरित होते देख दुबई मे छूप कर बैठा हुआ माफिया सरगना दाउद इब्राहिम थुक निगलते हुए मन ह मन सोचता होगा कि ‘काश मै भी नेपाल में पैदा हुआ होता तो अपने सारे अपराध को धो कर मुझे मंत्री बनने का मौका तो मिलता ?’

यह मंत्री मंडल मे जो जो हो रहा है दशहरे का रावण लीला से कम नहीं है । दशहरे के पांच दिन मे पांच उप–प्रधानमंत्री बनाए जा चुके हैं । हो सकता है दशहरे के दशवे दिन तक रावण के दस सिर जैसा ही दस उप–प्रधानमंत्री बनाए जाएं ? इस देश में और यहां की राजनीति में कुछ भी असंभव नही हैं जब इस मंत्री मंडल मे प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों कि शैक्षिक योग्यता अंडर मेट्रिक है । उस देश का शैक्षिक और राजनीतिक भविष्य कैसा होगा सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है ?

अब जब रोगी, अशिक्षित और अयोग्य हीं देश और सरकार चलाने लगे तो यहां पर स्कूल, कालेज और अस्पताल की आवश्यकता क्या है ? वैसे भी तराई में दो महीने से ज्यादा समय से सारे स्कूल और कालेज बन्द है । अब सभी स्कूल, कालेजों को हमेशा के बन्द करवाने चाहिए । अब कोई भी मां बाप बच्चे के पैदा होने पर उसको स्कूल में दाखिला करवाने के लिए माथापच्ची नहीं करेंगे । अब सीधे बच्चे को स्कूल भेजने की उम्र मे अपने मन माफिक किसी राजनीतिक पार्टी में भर्ती करवा कर निश्चित हो जाएगें । न स्कुल फी, ड्रेस, और किताब की चिन्ता । कुछ सालों बाद बच्चा किसी राजनीतिक पार्टी से बन, संवर कर मंत्री और प्रधानमंत्री बनेगा । मां, बाप की चिंता सब खतम ।

अब सिंह दरवार के अंदर एक अस्पताल और कुछ चिकित्सों की व्यवस्था करनी चाहिए । इस मंत्री मंडल में एक से एक रोगी भरे पडे हैं । कब संसद में बहस करते हुए ही बेहोश हो जाए या ऊपर टपक जाएं ? इसी लिए पहले से ही डाक्टरों की टीम को इस रोगी मंडल के सदस्यों की उपचार के तैयार रहना चाहिए । सभीवर्ग और पार्टी के अपराधी और काले कलुषित नेता इस मंत्री मंडल मे शामिल हो कर इसका स्वाद बढ़ा रहे हैं और देश की इज्जत को घटा रहे हैं ।

सभी इस मिश्रण में घालमेल हैं किसी का मौलिक स्वाद पता नहीं चल रहा हैं ? है न बिल्कूल ककटेल राजनीतिक पार्टीयों के नेता कम अभिनेता और अपराधी ज्यादा सम्मिलित विशुद्ध ककटेल मंत्री मंडल ? जब देखने वालें को ही इतना मजा आ रहा है तो इस ककटेल मंत्री मंडल मे शामिल हो कर इस ककटेल का घूंट भरने वालों को और कितना मजा आ रहा होगा ? (व्यग्ंय)

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