कल का मधेश और हम मधेशी ? एक चिन्तन : ई. श्याम सुन्दर

 
ई. श्याम सुन्दर, राजबिराज |  मधेश के पास कुल भुमि २३ हजार वर्ग कि.मी. है जहाँ तकरीबन १.५ करोड़ मधेशी आज के दिन पल रहा है । उन डेढ़ करोड़ मधेशियों की सन्ततियाँ ईसी मधेश की मिट्टी पर कल आनेवाला है । तथ्यांक को देंखे तो आज ही हमारे ४२% दलित कहलानेवाले मधेशियों के पास १ धूर जमीन नहीं है । ४५% मधेशी मुसलमान भी भुमिहीन जीवन बिताने पर मजबुर हो रहे हैं । कल आनेवाले हमारे बच्चों के लिए मधेश में भुमि हर दिन कम पड़ता जा रहा है ।
कारण केवल दो है : १. मधेशियों की जनसंख्या बृद्धि होना, २. पहाड़ और हिमाल से नेपालियों को ला कर मधेश की भुमि पर बसाते जाना । दोनों कारण में से पहला स्वभाविक और प्राकृतिक है । किन्तु दुसरा नियतबस और अप्राकृतिक है । एक तरफ मधेशियों के पास दुसरे जगह जा कर जीवन गुजारने का कोई विकल्प और गुञ्जाईस नहीं है । किन्तु दुसरे तरफ नेपालियों को पहाड़ और हिमाल छोड़ कर मधेश में ही भुमि हड़प कर जीवन बिताने का कोई जरूरत नहीं रहने पर भी हो वही रहा है, जो नेपाली नियती रहा है । शासकों द्वारा मधेशी उपर लिया गया नीति और नियती ईसलिए अत्यन्त घातक है । नेपालियों के लिए, चुकि राज्य संयन्त्र पर हर नियन्त्रण नेपालियों का है, उस आधार पर हर सेवा एवं सुविधा पहाड़ और हिमाल पहूँचाने के बजाय शासक नेपालियों को जानबूझ कर मधेश में आप्रवासन करा रहा है । मधेश में रहे न्यून भुमि भी हमसे छीनकर हमारे आनेवाले सन्ततियों को तक्कलीफ में डाल रहा है । विस्थापन के लिए हम मधेशियों को मजबुर कर रहा है । यह अञ्जाने में नहीं, जानबूझ कर किया जा रहा है ।
शासक भलिभाँती जान रहा है कि पहाड़ और हीमाल में १ लाख २४ हजार १ सौ वर्ग कि.मी. भुमि मौजूद है, जो आनेवाले कई नेपाली पिढ़ियों के लिए काफी है । संविधान, कानून, नीति, नियम, श्रोत-साधन, शासन हर चीज पर पूर्ण नियन्त्रण भी उन्हीं नेपालियों के पास है । वे चाहे तो हर सुविधा पहाड़ हीमाल में पहूँचा सकते हैं और मधेश में हो रहे नेपाली आप्रवासन को रोक सकते हैं । परंतु शासक ऐसा हर्गिज नहीं करनेवाला है, क्यूँकि उनका नियती मधेशी अस्तित्व को आनेवाला कल में मिटा देने का है । जिन्हें आज हम मधेश कहकर मधेशी भावना पर राजनैतिक रोटी सेक रहें हैं, वह कल पूर्ण रूपसे नेपाल में परिणत होने जा रहा है । हमारी मधेशी भाषा, संस्कृति, वेश और सभ्यता नेपालियों से एसिमिलेट होने जा रहा है । हम ईसे मानें या नहीं मानें किन्तु यह शास्वत है, नेपाली दीर्घकाल की नीति है और हमारे अस्तित्व विनास होने का वास्तविकता है; अगर हम समय रहते नहीं सम्भलें तो ! हमारे भविष्य अंधकारमय है । अगर मधेशी अस्तित्व रक्षा के लिए हम कड़ी संघर्ष नहीं कर सके तो हमारे भुमि मधेश से नेपाल होने ही वाला है । जो मधेशी नेपाली नहीं बन पाएंगे अर्थात नेपाली गुलामी को स्वीकार कर खुद को नेपाली रंग में नहीं बदल लेते, उनका खैर नहीं होनेवाला है । मधेशी अस्तित्व पर काला बादल मड़रा रहा है । कल का मधेश और मधेशी अस्तित्व का तस्वीर नजर गड़ा के देखें तो साफ नजर आ रहा है । ईश्वर सभी मधेशियों का रक्षा करे !

 

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