कविता एक अंधेरी कला है जो आपके जीवन के साथ बाहर निकलती है: अरुन्धती सुब्रह्मण्यम

IMG_6535दिसम्बर ६, काठमाण्डू । भारतीय राजदूतावास काठमाण्डू तथा बी.पी. कोइराला भारत–नेपाल फाउण्डेशन द्धारा  शुक्रबार को  बीपी कोइराला भारत–नेपाल फाउण्डेशन की सक्रियता मे संचालित भ्वाइसेस का आठवाँ संस्करण का आयोजन किया गया । इस प्रोग्राम का आयोजन नेपाल भारत पुस्तकालय, नेपालवायू सेवा निगम के भवन मे किया गया ।
भ्वाइसेस का आठवाँ संस्करण मे प्रख्यात भारतीय कवि तथा लेखक अरुन्धती सुब्रह्मण्यम ने विशेष रुप से ‘काव्य क्यों ? ‘ शिर्षक पर अपना प्रवचन दिया । उन्होने कइ वर्षो से काव्य सम्पादन, क्यूरेटर तथा साहित्य पत्रकारिता, शास्त्रिय नाच और नाटक मे भी काम किया है ।
“एक युवा के रुप मे हम वुजुर्ग लोगों की बातचित सुनते थे लेकिन उनकी भाषा मुझे कठिन लगती थी । जब मै कविता पढ्ती थी तो उसकी ऐसी भाषा होती थी कि नाचने का मन करता था ” अरुन्धती ने अपनेजीवन मे कविता का महत्वपूर्ण प्रभाव के बारे मे अपना अनुभव प्रगट की ।
उन्होने कहा कि तेह्र वर्ष की उम्र मे टी.एस. यिलियट कौन थे वह मुझे मालुम नही था । यद्यपि, यिलियट व्दारालिखी गयी कविता मेरर लिये जीवन्त था । यही काव्य का जादू था । IMG_6527
अरुन्धती के अनुसार काव्य अन्य विधाओं से अलग है । ये सभी मौनता है वहीं कविता एक अन्धेरी कला है जो मनुष्य के जीवन से निकलती है ।
“काव्य का मेरुदण्ड मौनता है । संभवत यही भाषा का एक रुप है जो व्याकरण की सीमा मे नही बाँधा है”

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz