कविता लेखन प्रशिक्षण, सम्मान तथा बहुभाषिक कवि गोष्ठी सम्पन्न

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ माघ ८ गते ।
बाके जिला के नेपालगन्ज में दो दिवसीय आख्यान तथा कविता लेखन प्रशिक्षण, श्रष्टा सम्मान तथा बहुभाषिक कवि गोष्ठी माघ ३ गते को सम्पन्न हुआ है ।
प्रगतिशील लेखक सङ्घ नेपाल केन्द्रीय समिति और बँके जिला शाखा के संयुक्त आयोजन में दो दिवसीय आख्यान तथा कविता लेखन प्रशिक्षण, श्रष्टा सम्मान तथा बहुभाषिक कवि गोष्ठी को उद्घाटन करते हुयें प्रलेस के केन्द्रीय अध्यक्ष डा. अमर गिरी ने कहा राष्ट्रीयता, स्वाधिनता, जनजीविका और सामाजिक रुपान्तरण करने के लियें आन्दोलन में प्रगतिशील साहित्यिक क्षेत्र में क्रियाशील रही है। मुलुक की राष्ट्रीयता गम्भीर संकट में गुजर रही है वर्तमान अवस्था में राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की पक्ष में आवाज उठाने की दायित्व साहित्यकर्मियों में अब आ गया है।4
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सदस्य समेत रहे प्रलेस के केन्द्रीय अध्यक्ष डा. अमर गिरी ने कहा इतिहास में सब ज्यादा तो राष्ट्रीयता के उपर आक्रमण हो रहा है उल्लेख करते हुयें नेपाल की हरेक राजनीतिक परिवर्तनों में अहम् भूमिका भी निभाते आई है नेपाली साहित्यकर्मियों के काध में अभी सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीयता के लियें ऐतिहासिक जिम्मेवारी बढी कुछ लोगों साहित्य और समाज को विकृत करने की प्रयास समेत कर रहें है ऐसी विकृतिया के विरुद्ध में साहित्यकर्मियों को एकजुट होना जरुरी है  ।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में प्रलेस क केन्द्रीय उपाध्यक्ष हिरामणि दुःखी, कोषाध्यक्ष विष्णु भण्डारी, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के पूर्व सदस्य सचिव तथा साहित्यकार सनत रेग्मी, नेपाल राष्ट्र बैंक के क्षेत्रीय प्रबन्धक भिष्म उप्रेती, प्राज्ञ सदस्य हरि प्रसाद तिमिल्सिना, प्रलेस बाके शाखा अध्यक्ष इन्द्र बहादुर बस्नेत लगायत लोगों ने अपनी अपनी बिचार ब्यक्त किये थे ।
प्रलेस बाके शाखा ने उद्घाटन समारोह में साहित्यकर्मियों को सम्मान और प्रलेस केन्द्रीय सदस्य हरि प्रसाद तिमिल्सिना को अभिनन्दन किया गया था इसी प्रलेस के केन्द्रीय उपाध्यक्ष हिरामणि दुःखी, केन्द्रीय कोषाध्यक्ष विष्णु भण्डारी, केन्द्रीय सचिवालय सदस्य पुन्य गौतम, प्रशिक्षक डा. धन प्रसाद सुवेदी, पुरुषोत्तम सुवेदी को भी सम्मान किया गया था ।
समारोह में सम्मान पाये अन्य श्रष्टाओं में साहित्यकार तथा नेपाल राष्ट्र बैंक के क्षेत्रीय प्रबन्धक भिष्म उप्रेती, वरिष्ठ पत्रकार पूर्ण लाल चुके, साहित्यकार दिवाकर शर्मा, गणेश जिसी, ओम प्रकाश शर्मा तिमिल्सिना, पङ्कज कुमार श्रेष्ठ, इन्द्र बहादुर भण्डारी इन्द्रेणी लगायत लोग रहे थे । 1 A
दूसरे दिन में आख्यान और कविता लेखन प्रशिक्षण दिया गया था प्रशिक्षण में मध्यपश्चिम क्षेत्र के बाके, बर्दिया, दैलेख, सुर्खेत, दाङ, जाजरकोट, सल्यान, लगायत जिला के नयें और पुराने पुस्ता के १ सौ २० साहित्यकारों कीे सहभागिता रही थी ।
प्रलेस के केन्द्रीय सदस्य हरि प्रसाद तिमिल्सिना ने दी जानकारी अनुसार कथा, कविता, निबन्ध, उपन्यास की इतिहासों से आधुनिक अभ्यास की सैद्धान्तिक पक्ष की बारे में साहित्यकार डा. धन प्रसाद सुवेदी ने , हिरामणि दुःखी और विष्णु भण्डारी ने प्रशिक्षण दिया था ।
दूसरे दिन कविता लेखन सम्बन्धि प्रशिक्षण तथा बहुभाषिक कवि गोष्ठी की आयोजन किया गया था प्रा. डा. ताराकान्त पाण्डेय ने कविता लेखन की प्रशिक्षण देते हुयें विधा, सिद्धान्त और सिर्जना, वर्ण, व्यन्जन, ध्वनि तथा कविता की अन्रवस्तु की विषय पर विस्तृत व्याख्या किया था ।
अन्तिम सत्र में आयोजित बहुभाषिक कवि गोष्ठी में करीब तीन दर्जन नेपाली, अवधी, उर्दू, थारु लगायत विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों ने अपनी अपनी कविता, गीत, गजलें पढकर सुनायें थे ।
इसी तरह गोष्ठी में प्रा. डा. गोपाल प्रसाद शर्मा अधिकारी, अवधी सा“स्कतिक बिकास परिषद् अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौवे, प्रलेस के केन्द्रीय सदस्य एवम् प्राज्ञ सदस्य हरि प्रसाद तिमिल्सिना, श्रीमती लता शर्मा, मीना सुवेदी, गुल्जारे अदब के सचिव तथा उर्दू साहित्यकार मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरेसी, मोहम्मद यूसफ आरफी, असफाक संघर्ष, साहित्यकार तथा प्रलेस बा“के शाखा अध्यक्ष के इन्द्र बस्नेत, साहित्यकार भूपेन्द्र प्रकाश शर्मा, पुरुषोत्तम सुवेदी, भीष्म उप्रती, दिवाकर शर्मा, सुनीता यादव, अवधी सा“स्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष बिष्णु लाल कुमाल, थारु समुदाय के ओर से बनकटवा गाबिस पेडारी के छेदा प्रसाद चौधरी लगायत लोगों ने रचना वाचन कियें थे ।66
इसी तरह समापन समारोह में प्रलेस ंके केन्द्रीय अध्यक्ष डा. अमर गिरी, केन्द्रीय सदस्य हरि प्रसाद तिमिल्सेना, सहभागियों के ओर से श्रीमती लता शर्मा अपनी बिचार व्यक्त किया ।
प्रलेस बा“के जिला के अध्यक्ष इन्द्र बहादुर बस्नेत के अध्यक्षता में सम्पन्न कार्यक्रम की सञ्चालन साहित्यकार श्रीधर गौतम ने किया था ।

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