कहानी एक गीत की, मन मे है विश्वास… : रघुवीर शर्मा

रघुवीर शर्मा, काठमांडू | हममें से सभी ने कभी न कभी ‘हम होंगे कामयाब’ गीत को जरूर सुना होगा । जिसने हिंदी में इस गीत को नहीं सुना होगा, उसने इसका अंग्रेजी रूप “We Shall Overcome” जरूर सुना होगा । भारत में इस गीत को १९७० और १९८० के दशक में स्कूलों में एक लोकप्रिय गीत के रूप में अपनाया गया और अभी भी अनेक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के साथ बच्चे इस गीत को गाते हैं ।
दरअसल ‘हम होंगे कामयाब’ हिंदी गीत अंग्रेजी के मूल गीत “We Shall Overcome” का हिंदी अनुवाद है और हिंदी में इस गीत का अनुवाद किया है हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार गिरिजा कुमार माथुर ने ।
इस गीत का इतिहास बहुत पुराना है । थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ अंग्रेजी में इसकी जड़ें १७९२के आस–पास तलाशी जा सकती हैं जब पहली बार लंदन की एक पत्रिका में इससे मिलता–जुलता एक गीत छपा । हालांकि कुछ लोग इसे लोक गीतों की श्रेणी में डाल देते हैं जिनका कोई एक रचयिता नहीं होता । यह गीत भी कुछ–कुछ वैसा ही है, लोकगीतों की तरह लोकप्रिय लेकिन फिर भी इसका इतिहास तलाशा जा सकता है ।
ईस्वी सन १९०० में फिलाडेल्फिया के एक प्रसिद्ध धर्म प्रचारक चार्ल्स एल्बर्ट टिंडले का एक गीत प्रकाशित हुआ “I Will Overcome Some Day” लेकिन इस गीत का आधुनिक रूप साउथ कैरोलिना में तंबाकू मजदूरों की एक हड़ताल में तब सामने आया जब वे हड़ताल के दौरान प्रत्येक दिन शाम को इस गीत को गाने लगे । इन्हीं हड़तालियों में २ ऐसे लोग थे जिनसे जिल्फिया हार्टन ने यह गीत सीखा और बाद में जिल्फिया हार्टन से इसे पीट सीगर ने सीखा जिसे इस गीत को आधुनिक
रूप देने का श्रेय जाता है । १९४७ में ‘पीपुल्स सांग्स बुलेटिन’ में यह गीत“We Will Overcome” शीर्षक से छपा ।
१९५९ में यह गीत नागरिक अधिकारों के आंदोलन के साथ जुड़ गया । यह जल्द ही अनौपचारिक तौर पर उस आंदोलन का गीत बन गया ।
१९६० में सीगर और जोन बेज जैसे अन्य प्रसिद्ध लोक गायकों ने रैलियों, तीज त्योहारों और संगीत सभाओं में इस गीत को गाकर इसे लोकप्रियता की बुलंदियों तक पहुंचा दिया । और उसके बाद तो यह गीत दुनिया भर में अन्याय और शोषण के प्रति विरोध के लिए प्रयोग में आने लगा ।
पीट सीगर ने इस गीत के मूल बोल “We Will Overcome” को बदलकर “We Shall Overcome” कर दिया और १९५२ में पहली बार इस गीत की रिकार्डिंग इसी बोल के साथ हुई । १९५७ में सीगर ने इसे हाईलैंडर के श्रोताओं के लिए गाया और उस सभा में इसके श्रोताओं में प्रख्यात अश्वेत नेता डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर भी थे जिन्हें यह गीत बहुत पसंद आया था । डॉ. मार्टिन लूथर किंग द्वारा १९६३ में ‘मार्च ऑन वाशिंगटन’ में दिए गए मशहूर भाषण “I Have a Dream” के वक्त भी इस गीत की प्रस्तुति कलाकार जोन बेज ने दी थी । डॉ. मार्टिन लूथर किंग ने ३१ मार्च १९६८ के अपने अंतिम भाषण में भी “We Shall Overcome” के कुछ शब्द दुहराए थे । बाद में डॉ. मार्टिन लूथर किंग की शव–यात्रा में शामिल पचास हजार से अधिक लोगों ने इस गीत को गाया ।
लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस ने इसे ‘२०वीं शताब्दी का सबसे सशक्त गीत’ बताया ।
एशिया के संदर्भ में भारत में हिंदी में इस गीत का लोकप्रिय अनुवाद प्रस्तुत करने वाले कवि गिरिजा कुमार माथुर की चर्चा तो पहले ही की जा चुकी है । भारत में बांग्लाभाषी क्षेत्रों में और बांग्लादेश में इस गीत के दो स्वरूप प्रचलित हैं । बंगाली लोक गायक हेमंग विश्वास ने इस गीत का अनुवाद किया जिसकी पुनः रिकार्डिंग भूपेन हजारिका ने की । इसका एक दूसरा बंगाली अनुवाद शिवदास बंदोपाध्याय ने किया जिसकी रिकार्डिंग १९७१ के बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुई और यह सबसे ज्यादा बिकने वाले बंगाली गीतों में गिना गया । यह बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान का पसंदीदा गीत था और उन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद अनेक जन सभाओं में नियमित रूप से इसे गाया ।
मलयालम में इसका अनुवाद एन ।पी । चन्द्रशेखरन ने किया जो कि स्वयं एक एक्टिविस्ट थे । २०१० में बालीवुड की फिल्म “My Name is Khan”में इस गीत को अंग्रेजी और उर्दू दोनों में गाया गया ।
कापीराइट का विवाद
इस अति लोकप्रिय गीत के कापीराइट को लेकर भी कम विवाद नहीं है । इस गीत की धुन १८वीं शताब्दी के एक भजन पर आधारित है । १९४० के दशक में श्रम आंदोलनों से जुड़ गए इस गीत को गाइ कैरेवान और पीट सीगर सहित संगीतकारों के एक दल ने १९५० के दशक में इसके वर्तमान रूप में परिवर्तित किया और इसी परिवर्तित रूप का कापीराइट रजिस्ट्रेशन पहली बार १९६० में हुआ । एक अनुमान के अनुसार यह गीत आज भी ७०,००० डालर प्रति वर्ष पैदा करता है ।
दरअसल विवाद की शुरुआत कुछ यूं हुई कि We Shall Overcome Foundation (WSOF) इस गीत और इसके इतिहास पर केंद्रित एक डाक्युमेंट्री पर काम कर रहा था लेकिन इस गीत का कापीराइट अपने पास रखने वाली संस्था The Richmond Organisation (TRO) ने उसे इस गीत का प्रयोग करने से मना कर दिया । अप्रैल २०१६ मेंWe Shall Overcome Foundation (WSOF) ने The Richmond Organisation (TRO) ने इसपर मुकदमा दायर करते हुए इस गीत के कापीराइट की स्थिति को स्पष्ट करना चाहा है और यह मामला अभी भी विचाराधीन है ।
अंत में इस गीत के बोल मूल अंग्रेजी के साथ–साथ हिंदी में दिए जा रहे हैं–

We shall overcome, we shall overcome
We shall overcome some day
Oh, deep in my heart, I do believe
We shall overcome some day

We’ll walk hand in hand
We’ll walk hand in hand some day
Oh, deep in my heart, I do believe
We’ll walk hand in hand some day

We shall live in peace, we shall live in peace
We shall live in peace some day
Oh, deep in my heart, I do believe
WE shall live in peace some day

We are not afraid
We are not afraid some day
Oh, deep in my heart, I do believe
We are not afraid some day

we shall overcome
We shall overcome some day
Oh, deep in my heart, I do believe
We shall overcome some day

होंगे कामयाब
होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

होगी शान्ति चारों ओर
होगी शान्ति चारों ओर
होगी शान्ति चारों ओर
एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब एक दिन
नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का
आज के दिन
मन में है विश्वास पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन
हम चलेंगे साथ–साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ साथ एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब
एक दिन !
–रघुवीर शर्मा
अताशे–हिंदी, सूचना एवं संस्कृति)
भारतीय राजदूतावास, काठमांडू

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