कहीं अलग न हो जाए, मधेश

नेपालगन्ज में प्रशासन ने सिविल पुलिस के सहयोग से कइ बार आन्दोलन में घुसपैठ कर आन्दोलन को बदनाम करने की कोशिश की ।

विनय दीक्षित:मधेशी जनता ने आत्मसम्मान और स्वाभिमान के लिए बार बार आवाज को बुलन्द किया । सरकार ने कई बार सम्झौता किया लेकिन बहाना फिर वही । सम्झौता कार्यान्वयन करने के लिए भी मधेश को बार बार आन्दोलित होना पड़ा । ३ महीने से मधेशी मोर्चा मधेश में आन्दोलित है । सरकार के एजेन्ट के रूप में रहे सरकारी मीडिया और पुलिस तथा पहाड़ी समुदाय अब एक तरफ है । मधेशी जनता के समाने विकल्प के रूप में भारतीय होने का आरोप पुलिस की गोलियाँ और मीडिया का अपमान है । जिसे ८० दिन से मोर्चा झेलता आया है ।
जिले में जारी आन्दोलन में दर्जन से अधिक मधेशी मोर्चा के नेता तथा कार्यकर्ता घायल हुए । मोर्चा नेता अजय कुमार श्रीवास्तव, ललित रौनियार की स्थिति गम्भीर थी । श्रीवास्तव अभी तक बिना छडी के सहारे चल नहीं सकते । लेकिन जुनून वही है ।
मधेश में रहने के बाद भी नेपाली होने के लिए मधेशी को जगह जगह परीक्षा देनी पड़ती है । नेपालगन्ज में मधेशी मोर्चा बजार बन्द के बाद करीब एक महीने से नाका पर तैनात है । नेपालगन्ज नाका से तेल, खाद्यान्न जैसे आत्यावश्यक वस्तु नेपाल आयात न होने के कारण एक तरफ संकट गहराता जा रहा है तो दूसरी ओर देश अब कहीं स्वतन्त्रता की ओर तो नहीं ? यह आंशका भी उत्पन्न होने लगी है । बार–बार भारतीय होने का आरोप कहीं सच में भारतीय न बना दे मधेशियों को यह सवाल अब मधेश चिन्तन का विषय बनता जा रहा है । मोर्चा नेता ललित रौनियार ने कहा अगर स्वायत्त मधेश नहीं मिला तो देश ही अलग कर दिया जाएगा । यहाँ पुलिस नियन्त्रण में लेकर गोली चलाती है, नेपाल में विदेशी की तरह व्यवहार किया जा रहा है कहीं यह सच में विदेशी न बना दे बस यही चिन्ता है रौनियार ने कहा मधेशी को अपमानित जितना किया जाएगा आन्दोलन उतना ही सशक्त होगा ।
नेपालगन्ज में प्रशासन ने सिविल पुलिस के सहयोग से कइ बार आन्दोलन में घुसपैठ कर आन्दोलन को बदनाम करने की कोशिश की । मोर्चा के जिला संयोजक विजय गुप्ता को तो नेपाल भारत सीमा से पुलिस के गुण्डों ने पकड कर अभद्रता की सहसंयोजक राम कुमार दीक्षित ने कहा, इस शैली का जवाब पुलिस को भी दिया जाएगा ।
नेपालगन्ज में सशक्त आन्दोलन को बार–बार बदनाम किया गया मोर्चा के नेता राजेन्द्र विश्वकर्मा ने बताया कि यहाँ पुलिस ने ही आन्दोलन में घुसपैठ कर रखा है । मोर्चा के नेताओं पर घर पर भी निगरानी की जाती है उन्होंने कहा लोकतान्त्रिक पद्धति की सरकार ने खिल्ली उड़ा दिया । मधेशी मोर्चा ने नेपालगन्ज स्थित जमुनाहा नाका से लेकर जिले के ग्रामीण छोटे नाका पर भी आवागमन ठप्प कर दिया । कल तक जो लोग खुद को मधेशी कहने से कतराते थे वह अब मधेशीमय हो गए । मधेसियों की यह एकता कुछ कर गुजरने के लिए रास्ते के इन्तजार में है । madhesh sarkar 3
मधेशी मोर्चा के नेता पशुपति दयाल मिश्र ने बताया कि बाँके में मधेशियाें को सिर्फ पुलिस से ही नहीं बल्कि पहाड़ी समुदाय से भिड़ना पड़ रहा है । आन्दोलन में पहाड़ी युवाओं का प्रयोग कर पुलिस मोर्चा के नेताओं पर आक्रमण करवा रही है । इस बीच मोर्चा नेता राजेन्द्र महतो ने जिले का दौरा कर मधेशी को खुलकर सामने आने का अपील किया । नेपालगन्ज नाका में डटे हुए मोर्चा के नेताओं ने नेपाल आनेवाली सामाग्रियों को पूर्णरूप से रोक दिया है ।
मोर्चा के आन्दोलन में बार–बार हुए अपमान जनक व्यवहार से आजिज मोर्चा के नेता और कार्यकर्ता को सिर्फ नाका पर आन्दोलन करने का निर्देशन दिया गया लेकिन, नाका पर भी पुलिस का व्यवहार नहीं बदला और आन्दोलनकारियों ने नो मैन्स लैण्ड पर धर्ना प्रदर्शन शुरु किया ।
सोमवार बीरगन्ज में भारतीय नागरिक की हत्या के बाद नेपालगन्ज में भी आन्दोलन गर्म हो उठा । नाका पर बवाल के साथ मोर्चा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमन्त्री केपी ओली का पुतला जलाया । गाँव गाँव में अब स्थिति यह है कि मधेशी और पहाड़ी समुदाय दो कित्तों में दिख रहा है । लोगों का व्यवहार और विचार काफी बदला हुआ दिखा । मधेशी युवा शौरभ सिंह ने बताया कि अब स्वायत्त मधेश प्रदेश नहीं हुआ तो अधिकार माँगने की जरुरत नहीं स्वतन्त्र मधेश की माँग उठेगी । मधेशी और पहाड़ी जनता का आपसी सद्भाव कई बार बिगड़ते बिगड़ते बचा है ।
स्थानीय प्रशासन ने समय रहते ही कर्फ्यु नहीं लगाया होता तो काफी मानवीय क्षति होती हिमालिनी से बातचीत में नेता बृजेश त्रिपाठी ने कहा यहाँ अब सरकार घुटना टेकेगी या तो अलग देश की मांग उठेगी । पहाड़ी समुदाय के कुछ युवा तथा पुलिस की वर्वरतापूर्ण व्यवहार आन्दोलन को अलग रंग दे रही है । शान्तिपूर्ण आन्दोलन कर रहे विभिन्न नेताओं को बार–बार गिरफ्तार किया गया । योजना बनाकर पुलिस ने मोर्चा के नेताओं को घर–घर से गिरफ्तार और दमन किया । लेकिन नेताओं के जोश में तनिक भी कमी नहीं आयी । गाँव में जिस तरह से मधेश आन्दोलन की जागरुकता फैली है जोखिम बस इसी बात का है कीं मधेश अलग देश न बन जाए ।

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