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कहीं पहाड़ और तराई की सीमा पर दीवार लगाने की नौबत न आए : कौसर शाह

कौसर शाह नेपाली कांग्रेस की सांसद्

कौसर शाह, काठमांडू, २ फरवरी | २०५४ साल से मुल्क में स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं हो सका है । स्थानीय निकाय जनप्रतिनिधि विहीन होने की वजह से जनता को बहुत समस्याएं झेलनी पड़ती हैं । जबकि लोकतन्त्र में ऐसा नहीं होना चाहिए । अगर यही हालात बरकरार रहे, तो लोकतन्त्र का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है । इसलिए देश में चुनाव होना अनिवार्य है, और शीघ्रातिशीघ्र होना चाहिए । लेकिन इसके लिए जरुरी है कि पहले मधेशियों की जायज मांगों को पूरी करे ।
सरकार द्वारा पंजीकृत संशोधन विधेयक में मधेशी मोर्चा की असंतुष्टि रही है । मोर्चा का कहना है कि पहले परिमार्जन सहित संविधान पारित हो, उसके बाद चुनाव करवाया जाए । वास्तव में देखा जाए तो मोर्चे की मांगों को पैकेज में सहमति से पूरी की जा सकती है । लेकिन उनकी मांगों को दरकिनार कर चुनाव करवाने की बात की जा रही है । उनकी मांगों को राष्ट्रघाती की संज्ञा दी गई है । लेकिन आक्षेप लगाने वाले को समझना चाहिए कि उनकी मांगें राष्ट्रघाती न होकर हिमाल, पहाड़ व तराई के वंचित, शोषित, बहिष्कृत एवं आम नागरिकों के हित में हैं ।
संविधान जारी करते वक्त एवं जारी के पश्चात् यह सुनने को मिला कि यह संविधान विश्व का उत्कृष्ट संविधान है । हां, अगर यह संविधान विश्व का उत्कृष्ट संविधान होता, तो मुल्क के इतनी बड़ी तादाद के नागरिकों में मौजूदा संविधान के प्रति असंतुष्टि क्यों होती ?  इसलिए पंजीकृत संशोधन विधेयक को परिमार्जन सहित पारित किया जाए । ऐसा करने से ही मौजूदा संविधान ‘जन के लिए, जनता द्वारा एवं जन का संविधान’ होगा । इसके साथ–साथ सरकार एवं नागरिकों के मध्य उनके पारस्परिक संबंध स्थापित करने का कार्य करे, यह संविधान ।
अगर पंजीकृत संशोधन विधेयक परिमार्जन सहित पारित नहीं होता है तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ दिन पूर्व अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मोक्सिको और अमेरिका की सीमा पर दीवार लगाने के लिए जो निर्णय सहित हस्ताक्षर किए, ठीक उसी प्रकार नेपाल में भी पहाड़ और तराई की सीमा पर दीवार लगाने की नौबत न आए ।
(कौसर शाह नेपाली कांग्रेस की सांसद् हैं ।)

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