काँग्रेस में मधेश समस्या पर उठी आवाज, हिन्दी पर परहेज क्यों ?

काठमांडू, 19 अक्टूबर ।

नेपाली कांग्रेश के बरिस्ट  नेता रामचन्द्र पौडेल ने कल्ह मधेश के बुद्धिजीवियों की एक बैठक बुलाई थी । बैठक का मुख्य उद्देश्य था मधेश की समस्या से अवगत होना और उसे पार्टी में समाधान के लिये रखना ।

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श्री पौडेल के सामने बुद्धिजीवीयों ने खुलकर मधेश की मांगें रखी । उनके सामने सीमांकन का मसला समाधान करने को कहा गया । लॉगो ने कहा कि तराई में प्रदेश की बंटवारा पक्षपातपूर्ण किया गया है । सुर्खेत में एक आदमी मरता है तो एक प्रदेश बन जाता है वही मधेश में लोगों को भुंग दिया गया लेकिन उनकी मांगें नहीं सुनी गई ।

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भाषा समस्या के बारे में पौडेल को याद दिलाई गई की भाषा के कारण ही बंगलादेश अलग हुआ था । हम हिंदी बोलते हैं तो उसमें आपत्ति क्यों ? हमारी मातृभाषा अलग अलग है लेकिन जब हम आपस में मिलतें है तो सम्पर्क भाषा के रूप में हिंदी का प्रयोग करते हैं । हिन्दी को सम्पर्क भाषा के रूप में मान्यता क्यों नही मिलेगी ।

बुद्धिजीवियों ने समानुपातिक प्रतिनिधि की भी बात उठायी । नागरिकता के बारे में स्पस्ट कहा गया कि महिलाओं के साथ भेदभाव क्यों ? लोगों ने प्रश्न किया कि अबतक भारत,चीन,अमेरिका और इंग्लैण्ड में कितने मधेशी राजदूत नियुक्त किये गयें ? क्या मधेशी इसकेलिये योग्य नही है । यही आँकड़ा बताती है कि मधेश के साथ पूर्णत: भेद भाव है । लोगों ने स्पस्ट कह दिया कि अगर यह भेद भाव नही हटा तो यह संबिधान कभी नही लागु होगा । बुद्धिजीवियों में डा. अनिल झा, सीके लाल, उमाशंकर शाह, दिलीप झा लगायत 40 से भी ज्यादा लोगों की उपस्थिति थी ।

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