कांग्रेस और एमाले मे कौन–कौन है रेग्मी के पक्ष और विपक्ष में ?

काठमांडू, १६ फागुन । चुनावी सरकार के नेतृत्व प्रधानन्यायाधीश खिलराज रेग्मी को देने के लिए नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले के शीर्ष नेताओं ने औपचारिक रुप में हि निर्णय ले लिया है । एकीकृत नेकपा माओवादी के तो सभी नेता इस में राजी है । लेकिन नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले और मधेशी मोर्चा ने निर्विवाद रुप में इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया है । जिसके कारण भावी प्रधानमन्त्री रेग्मी ही बनेगें, इसका कोई ग्यारेन्टी अभी तक हो नहीं हो पाया है । कांग्रेस और एमाले के भीतर तो इस विषय को लेकर तीव्र मतभेद भी है । समस्या समाधान के हेतु दोनों पार्टी के पदाधिकारी गण की बैठक भी जारी है । आइए, आप भी देखए कि कौन–कौन नेता रेग्मी के पक्ष में है और कौन नहीं ।
नेकपा एमाले के अध्यक्ष झलनाथ खनाल, वरिष्ठ नेता केपी ओली, उपाध्यक्ष द्वय वामदेव गौतम, विद्या भण्डारी और सचिव विष्णु पौडेल प्रधानन्यायाधीश रेग्मी को प्रधानमन्त्री बनाने के लिए तैयार है । वे लोग इसके लॉविङ में भी जूट रहे है । लेकिन वरिष्ठ नेता तथा पूर्वप्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल, पार्टी महासचिव ईश्वर पोखरेल, सचिव शंकर पोखरेल और युवराज ज्ञवाली, अनुशासन आयोग के अध्यक्ष अमृतकुमार बोहरा, प्रचार विभाग प्रमुख प्रदीप ज्ञवाली, नेता घनश्याम भूसाल सहिद आदी नेता इसके विरोध में हैं । वे लोग जैसे भी रेग्मी को प्रधानमन्त्री बनाना नहीं चाहते है ।
इसीतरह नेपाली कांग्रेस के भीतर भी ऐसी ही अवस्था है । सभापति सुशील कोइराला, बरिष्ठ नेता शेरबहादुर देउवा, उपसभापति रामचन्द्र पौडेल और महामन्त्री द्वय कृष्णप्रसाद सिटौला और प्रकाशमान सिंह, डा. रामशरण महत, मिनेन्द्र रिजाल, विमलेन्द्र निधी, डा. प्रकाशशरण महत, महेन्द्र यादव, रमेश रिजाल, मोहमद अफ्ताप आलाम, आनन्द ढुंगाना, अर्जुन जोशी लगायत नेता रेग्मी के पक्ष में है । लेकिन केन्द्रीय सदस्य सुजाता कोइराला, शेखर कोइराला, प्रदीप गिरी, नरहरी आचार्य, अर्जुननरसिंह केसी, बलबहादुर केसी, गगन थापा, दिलेन्द्र बडु, दिपक गिरी, चन्द्र भण्डारी, शंकर भण्डारी, एनपी साउद, ज्ञानेन्द्र बहादुर कार्की, पूर्ण बहादुर खड्का, सुरेन्द्र पाण्डे, पुष्पा भूसाल, सुजाता परियार लगायत इसके विरोध में इकठ्ठे हो रहे है ।
प्रतिपक्षी दलों के बीच दिख रहे इस तरह के विवादों के कारण भावी प्रधानमन्त्री में रेग्मी के विकल्प और कोई आ सकता है । इस के साथ–साथ मधेशी मोर्चा में भी इस में एकमत नहीं है । नेकपा–माओवादी लगायत विघटित संविधानसभा में प्रतिनिधित्व करनेवाले ११ छोटे दल रेग्मी के विरोध में है । ऐसी ही अवस्था में कानुन व्यवसायी के छाता संगठन नेपाल बार एसोसिएसन रेग्मी के विरुद्ध में आन्दोलन में उतर आए है । दूसरी तरह रेग्मी के ही विरोध में सर्वोच्च अदालत में पेश मुद्दा विचाराधिन है । जिसके फैशला आगमी फागुन २४ गते होने जा रहा है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: