Wed. Sep 19th, 2018

कांग्रेस की मूल्यांकन में यह हैं सरकार की ७ गलतियां

काठमांडू, २० अगस्त । प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने केपीशर्मा ओली नेतृत्व में निर्मित सरकार का मूल्यांकन किया है । ६ महीना अवधि को मूल्यांकन करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि सरकार ‘जष्ट पास’ हो गया है, जनता की अपेक्षा प्रति सरकार उदासिन होती जा रही है । आइतबार पार्टी कार्यालय में एक पत्रकार सम्मेलन करते हुए कांग्रेस ने सरकार प्रति अपनी दृष्टिकोण सार्वजनिक करते हुए सरकार की ७ गलतियों को दिखाया है ।
पत्रकार सम्मेलन में बोतले हुए पार्टी प्रवक्ता विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि सरकार प्रभावहीन होता जा रहा है और दो तिहाई बहुमत की ओज सरकार में नहीं है । उनका यह भी मानना है कि सरकार समृद्धि की बात कर रही है, लेकिन काम कुछ भी नहीं । प्रवक्ता शर्मा के अनुसार प्रधानमन्त्री सिर्फ नाम में ही शक्तिशाली हैं, काम में नहीं । उन्होंने आगे कहा– ‘कांग्रेस, सरकार की विकल्प नहीं खोज रही है, इस्तिफा भी नहीं मांग रही है, लेकिन सरकार की ओर से प्रशंसातुल्य काम कुछ भी नहीं हो रहा है ।’
यह हैं कांग्रेस की नजर में सरकार की ७ कमजोरियां–
१. राष्ट्रीयता में असफलः कांग्रेस को मानना है कि वर्तमान सरकार राष्ट्रीयता के सवाल में असफल हो गई है । प्रवक्ता शर्मा ने कहा कि उग्रराष्ट्रवाद की नारे देकर चुनाव में जीत हासिल किया, लेकिन सत्ता में आते हुए राष्ट्रीयता संबंधी मुद्दा में सरकार कमजोर साबित हो गया ।
२. लोकतान्त्रिक संस्कार का अभावः सरकार लोकतान्त्रिक पद्धती स्थापित करने में भी असफल हो गया है । प्रवक्त शर्मा को मानना है कि सरकार में लोकतान्त्रिक चरित्र नहीं है ।
३. संघीयता प्रति आशंकाः संघीयता कार्यान्वयन में सरकार उदासिन है । संघीयता को कमजोर बनाने में और संघीयता विरोधी जनमत बनाने में सरकार लगा है । शर्मा ने कहा कि संघीयता के सवाल में सरकार की नियत में आशंका उत्पन्न हो रही है ।
४. सुशासन में असपफलः सुशासन कायम करने में भी सरकार असफल है । उपकुलपति को विमानस्थल से गिरफ्तार करने से लेकर सोने की तस्करी काण्ड में सरकार पूर्ण अराजक और असफल दिखाई दिया है । प्रवक्ता शर्मा ने कहा– ‘सोना की तस्करी काण्ड में बढ़ी मछली गिरफ्तार होने की बात हुई थी, लेकिन आज वह बढी मछली की पता नहीं है, कहाँ चली गई बढी मछली ?’
५. मूल्यवृद्धि नियन्त्रण में असफलः सरकार मूल्यवृद्धि नियन्त्रण में पूर्ण असफल साबित हो गई है और नियन्त्रण के लिए सरकार ने प्रयास भी नहीं किया । प्रवक्ता शर्मा को मानना है कि प्रधानमन्त्री स्वयम् मूल्यवृद्धि नियन्त्रण में गम्भीर नहीं हैं ।
६. ‘समृद्धि’ सिर्फ नारें में सिमितः समृद्धि सिर्फ नारे में सिमट कर रह गया है । दो तिहाई बहुमतवाला सरकार के पास जो ताकत है, वह प्रयोग में नहीं आ रहा है । प्रवक्ता शर्मा ने कहा– ‘सरकार ने कहा है कि ६ महिना के अवधि में नारायणगढ–मुग्लिन सडक बिस्तार हुआ है, पशु में कृतिम गर्भाधान की व्यवस्था की गई है ।’ शर्मा को मानना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत में नहीं भी होती थी तो भी सडक निर्माण हो जाता था । यह कोई भी उल्लेख करने की लायक उपलब्धी नहीं है ।’
७. न्यायपालिका में हस्तक्षेपः सरकार ने स्वतन्त्र न्यायापालिका कें ऊपर हस्तक्षेप किया है । कांग्रेसको मानना है कि प्रधानन्यायाधीश में सिफारिश दीपकराज जोशी को अस्वीकार कर प्रधानमन्त्री स्वयम् विरोधाभाष चरित्र में उतर आए हैं ।

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