काठमांडू की स्वच्छता, सुन्दरता कब तक

रमेश झा:एशियाली क्षेत्रीय सहयोग संगठन -र्सार्क) का १८वां शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय मुद्दों पर नेतृत्व स्तरीय संयुक्त -साझा) अवधारणा निर्माण करने के सर्न्दर्भ में काठमांडू महानगरपालिका की छटा, स्वच्छता, सुन्दरता को पुनर्जीवित कर विश्व के सामने पर््रदर्शन करने का एक उपयुक्त अवसर नेपाल को प्राप्त हुआ । काठमांडू महानगरपालिका कई वषोर्ं से धूल-धूआं और कूडेÞ-कचरों से प्रदूषित था, लेकिन र्सार्क के अवसर पर प्रदूषणरहित शहर के रूप में दिखाई देने लगा । र्सार्क सम्मेलन में अतिथि के रुप में आने वाले दक्षिण एशिया के शर्ीष्ास्थ नेताओं को पर्यटकीय नगर के रूप में विश्व प्रसिद्ध काठमाडू की प्रतिष्ठा कायम करने के लिए तथा इसकी मनोहरता को चारचाँद लगाने के लिए कई महीनों से युद्धस्तर पर काम किया जा रहा था । सडÞकें, गलियां, फुटपाथ, रेलिङ सब के सब नये सिरे से रात रात भर काम करके बनाए गए । मार्ग के दोनों तरफ नये पौधे दिखाई देने लगे । चौक-चौराहे पर अधिकाधिक संख्या में फूलों से भरे गमले रखे गए । इतना ही नहीं, कईर्-कई दिनों तक पानी की फुहारों से उन्हें चमकाने का काम भी किया गया । जिससे लोगों को ताजापन तथा स्वच्छता का अनुभव हो । र्सार्क अतिथियों का आवागमन होने वाले रास्ते के किनारों पर स्थित व्यक्तिगत भवनों को भी Preparations for Saarc 2014 Preparations for Saarc 2014 Preparations for Saarc 2014 hathmanduरंग-रोगन करवाया गया । गलियों की सफाई की गई । सम्पदास्थल, तालाबों तथा पार्को की मरम्मत की गई । तालावों में रंग-विरंगी फुहारो की व्यवस्था की गई । र्सार्वजनिक स्थलों पर अहर्निश चमचमाती विजली की व्यवस्था स्थापित करके काठमांडू को दूल्हन की तरह सजाया गया । सौर्न्दर्ययुक्त काठमांडू को देखकर र्सवसाधारण जनता कह रही थी कि काश ऐसा सम्मेलन हरेक वर्षहोता तो हमारी राजधानी प्रदूषणरहित हो जाती । र्सवसाधरण जनता को क्या पता कि ऐसा करने के लिए र्सवसाधारण जनता पर ऋण का बोझ कितना पडÞेगा । इस तरह चमचमाती काठमांडू महानगरी पुनः अपनी पुरानी नियति के साथ व्रि्रूपता की ओर लौटने लगी है । चमचमाती नगरी को व्रि्रूपता की ओर लौटाने में महानगर, नेपाल सरकार की प्रशासनिक असक्षमता के साथ-साथ र्सवसाधारण जनता की दर्रि्र मानसिकता दोषी हैं ।
राष्ट्रीय सभागृह के परिसर में आरक्षित गमले अभिभावक विहीन हो गए हैं । र्सार्क का समुद्घाटन तथा समापन समारोह आयोजन स्थल, प्रेक्षालय में स्थापित कर्ुर्सियों में से कुछ कर्ुर्सियां टूटी पडÞी हैं और मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं । पानी के फुहारे विलीन हो चुके हैं । रास्ते पर धूल की परतें दिखाई देने लगी हंै । विस्थापित दुकाने पुनः फुटपाथों को अतिक्रमित करने लगी हैं । र्सार्क सम्मेलन के क्रम में कूडेÞ-कचरे का प्रशंसनीय व्यवस्थापन फिर रास्तों के किनारे जमा होने लगे हैं । १८वें र्सार्क सम्मेलन आयोजित होने के क्रम में किए गए प्रशंसनीय कार्यों को देखर जनता हषिर्त थी । पर नेपाली जनता में व्याप्त अशिक्षा, कुसंस्कार तथा मरकट स्वभाव के कारण र्सार्क सम्मेलन की समाप्ति पश्चात् पैदल यात्रीगण मनमाने तरीके से रास्ता पार करन,े फूलों से भरे गमले के ऊपर से रास्ता पार करने से गमलों में से फूलों को तोडÞने से रास्तो के किनारे में लगाए गए पेडÞ पौधो को गाय, साँढ के खा जाने से कृत्रिम सौर्न्दर्य प्राकृतिक सौर्न्दर्य के रूप में स्थापित नहीं हो सका । इसको बचाने की जिम्मेदारी प्रायः हर नागरिक की है । अतः स्थापित कृत्रिम तथा प्राकृतिक सौर्न्दर्य को वानरी स्वभाव से अशोभनीय क्रियाकलाप से नाश करना हमारी दर्रि्र मानसिकता है । विवेक अथवा सम्वेदना का लेश मात्र न होने से हम पुन राजधानी को ‘पुनर्मुसिको भव’ जैसी कहावत को चरितार्थ करते हुए  पुरानी नियति की ओर ही लौटना बहुत दुःख की बात है ।
करोडÞों- करोडÞ लगानी के माध्यम से सुसज्जित कान्तिपुरी नगरी प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, व्यापारिक तथा पर्यटकीय स्थल के रूप में विश्वप्रसिद्ध हैं । इसी आधार पर विश्व भर से पर्यटक लोग आते हैं । पर इस नगरी की असुविधा, अव्यवस्था तथा अशक्त वातावरणजन्य नकारात्मक अनुभूतियाँ मन में संजोकर ले जाने से हमारे पर्यटन व्यवसाय पर कितना दुष्प्रभाव पडÞता आ रहा है, वह जग जाहिर है । अतः पर्यटकीय दृष्टिको आत्मसात् करते हुए वर्तमान सर्न्दर्भ में सुन्दर राजधानी नगरी की सुन्दरता इसकी हरियाली, यहाँ की यातायातजन्य सुविधा सम्पन्नता के प्रति महानगरपालिका, नेपाल सरकार तथा हरेक नेपालीजनता को संयुक्त जिम्मेवारी बोध होना जरूरी है । काठमांडू उपत्यका में नैर्सर्गिक सौर्न्दर्य सरकार द्वारा निर्मित शहरी सौर्न्दर्य को बनाए रखना तथा नेपाल सरकार से सम्बन्धित सभी विभागों के साथ के जनपक्षीय स्थानीय सक्रियता उतनी ही अपेक्षित है । यदि कोई अज्ञानी व्यक्ति र्सार्वजनिक सम्पत्तियों एवं स्थलों को हानि पहुँचाते विरूप बनाते दिखता है तो उसे उसी समय सम्झाने बुझाने का काम करना हरेक नागरिक का प्रथम कर्तव्य बनता है । अतः १८वें र्सार्क सम्मेलन को लक्ष्य करके काठमांडू शहर को विविध रूप में युद्धस्तरीय तरीके से सजाने का काम किया गया है । इसे कायम रखने से पर्यटन व्यवसाय में वृद्धि आ सकती है । पर हमारी संकुचित मानसिकता को देखते हुए कहा जा सकता है कि राजधानी में किया गया विकास, सडÞकवृद्धि, बिजली, रंगरोगन कितने दिन यथावत रहेंगे – क्या इस प्रकार हमारे देश में दर्ीघकालीन विकास हो सकता है – क्या नेपाल दूसरे को दिखाने के लिए विकास करता है – प्रश्न उठना स्वभाविक है । शहर को स्वच्छ, सुन्दर बनाना अपने आप में अच्छी बात है । इससे अच्छी एवं बडÞी बात सृजित वस्तुओं को प्रभावकारी तरीके से संभालना है । तर्सथ र्सार्वजनिक सम्पत्ति संरक्षण, फुटपाथ वृक्ष संरक्षण का  कडर्Þाई के साथ करना अपरिहार्य है । इस अपरिहार्यता को स्वीकार करते हुए व्यवस्थित सुरक्षा सरकार प्रदान करते हुए काठमांडू की सुन्दरता को नियमितता बनाए रखें ।

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