कामक्रिड़ा के प्रचारक के रुप मे निर्मित लक्ष्मीनारायण मन्दिर को पर्यटक का अभाव

विजेता चौधरी, धनुषा खजुरी, बैशाख २५ |
जनकपुर से २४ किलोमिटर दूर खजुरी चन्हा गाउँ में अवस्थित कामकला युक्त लक्ष्मीनारायण मन्दिर प्रचार व पर्यटक के अभाव में जिर्ण एवम् विरान पडी है ।

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मन्दिर के बाहर तालाब व तालाब के चारोतरफ विभिन्न देवीदेवता के अढाइ दर्जन मन्दिरों का यह गाउँ शान्ति और आस्था का सजीव चित्रकला प्रतित होता है ।
लक्ष्मीनारायण मन्दिर का बनाबट अति साधारण होते हुए भी मन्दिर के गर्भगृह के चारोंतरफ टुंडाल मे काष्ठकला मे निर्मित २० असाधारण कामयुक्त देवीदेवता के लघु प्रतिमा अलंकृत है । क्रिडाÞयुक्त नर–नारी के रुप मे लक्ष्मीनारायण की मूर्ति यहा प्रतिस्थापित की गर्ह है ।
मंदिर के अध्यक्ष इष्टध्वज कार्की बताते है– मंदिर के टुंडाल मे छोटे आकार मे निर्मित उक्त क्रिडाÞयुक्त विष्णु की शाश्वत सहभागिनी के रुप मे लक्ष्मी का बीस रुप २० विभिनन आसन की प्रतीक है जिस से सृष्टि की रचना होती है ।
कार्की के मुताविक प्रायः जनमानस मे कामक्रिया सम्वन्धी अल्पज्ञान एवम् रसहिनता को मध्यनजर कर मंनिर निर्माण कर्ता ने वासना मे सौन्दर्यवोधक गुण की अनुभूति उत्पन्न करबाने के ध्यय से कामकला के प्रचारक के रुप मे उक्त मन्दिर की निर्माण की गइ होगी ।

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सन् १९११ ई. मे उक्त गाउँ के तात्कालीन जमिन्दार नरबहादुर कार्की ने लक्ष्मीनारायण मन्दिर का निर्माण करबाया था । उक्त मन्दिर के निर्माण से तात्कालिन समय मे भी नेपाल के तराइ क्षेत्र उस मे भी ग्रामीण इलाके मे वास्तुकला की जडे मजबुत होने की अवस्था दर्शाति है ।
अध्यक्ष कार्की बताते है– अत्यन्त कलात्मक ढंग से काष्ठकलामे कुंदिगई उक्त कामचित्रीत मूर्ति निर्माण हेतु काठमाण्डू से मूर्तिकार मगंवाइ गई थी । टुंडाल के उपरी तखथे मे दुर्गा, भैरव, कुमार, गणेश लगायत के देवीदेवता का प्रतीमा अंकित है ।
ग्रामीण पर्यटकीय दृष्टिकोण से उक्त मन्दिर की गरिमा अपरिमय होते हुए भी संरक्षण के अभाव मे मन्दिर की अस्तित्व संकट मे है । भौगोलिक दृष्टिकोण से अति विकट ग्रामीण क्षेत्र मे अवस्थित सो मन्दिर प्रचारप्रशार के अभाव मे भी ओझेल मे पडी हुइ है । इस के अतिरिक्त यातायात की असुविधा तथा सड़क की दूरावस्था की वजह से पर्यटन तान्ने भे असफर रही है ।
खजुरी गाउँ तक पहुँचने के लिए एक मात्र साधन नेपाल रेल्वे बंद पडी हुइ है वही बसें भी बहुत कम जाति है । नीजि सवारी साधन एक मात्र विकल्प है वहा तक पहुँचने के लिये । स्थानीय वासीन्दा रत्न कार्की का कहना है, यातायात समस्या के कारण भी इस गाउँ मे पर्यटन आवागमन मुश्किल है । स्थानीय व्यक्तियों द्वरा उक्त स्थान को ग्रामीण पर्यटकीय क्षेत्र क्षेत्र के रुप मे विकास करने की माग बार बार हो रही है परन्तु मन्दिर संरक्षण मे जुटे व्यक्तियों द्वारा इस तरफ ध्यान न देने का आरोप लगाते है, कार्की ।

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स्थानीय किष्ण रिजाल बताते हंै– संभोग के विभिन्न आसन सम्वन्धि चेतना संचार हों इसी उददेश्य के साथ निर्मित मन्दिर मे अंकित कामेश्वर मूर्ति के दर्शन मात्र से निसन्तान को संतान प्राप्त होने की लोकोक्ति अभी भी कायम है । अध्यक्ष कार्की बताते है, मन्दिर दर्शन हेतु कभीकवार भारतीय पर्यटक आते है ।
संस्कृति विदें का कहना है धार्मिक पर्यटकीय दृष्टिकोण से भी उक्त स्थान के विकास हेतु पर्यटन तथा संस्कृति मन्त्रालय को ध्यान देने की आवश्यकता है । ग्राम पर्यटन के विकास से उक्त स्थान की आर्थीक विकास सुदृढ होने की बात संस्कृतिविद् डा. रेवतीरमण लाल बताते हैं ।

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