कामयाबी की राह में नेपाली क्रिकेट की छलांग

आज नेपाल क्रिकेटमय हुआ है । नेपाल की युवा पीढÞी तो क्रिकेट की दिवानी हो चुकी है । क्रिकेट का जादू उनके सर चढÞ कर बोल रहा है । ताज्जुब और खुशी की बात तो ये है कि नेपाल की गूंगी-बहरी-अंधी सरकार भी नेपाली खिलाडिÞयों की हौसला अफजाई के लिए एक कदम आगे बढÞ गई है । jitendra mukhiya nepali cricket jitendra mukhiya nepali cricket6 jitendra-mukhiya-warmup-match nepali-cricket-team
हाल ही में बांग्लादेश में हुए क्रिकेट टी-२० विश्वकप में पहली बार हिस्सा लेने वाली नेपाली टोली ने पहले चरण के तीन खेल में दो में अपनी जीत के परचम लहराए हैं । टेस्ट खिलाडÞी बांग्लादेश से पराजित होने पर भी नेपाल ने एक दिवसीय मान्यता प्राप्त अफगानिस्तान को हरा कर और अपने जोडÞीदार हङकाङ को मात देकर कामयावी की राह में एक बडÞी छलांग मारी है, इस में तो कोई शक नहींं ।
इस तरह हङकङ द्वारा पराजित बांग्लादेश रनरेट के आधार पर नेपाल को पीछे धकियाते हुए आगे निकलने में सफल हुआ । बांग्लादेश की तरह  ही जीत और एक हार के साथ मैदाने जंग में खडÞे रहने पर भी बांग्लादेश की तुलना में रनरेट कम होने से नेपाल सुपर टेन में अपनी पहुँच दर्ज नहीं कर पाया । गर नेपाली टीम सुपर टेन में पहुँच पाती तो यह जीत और भी शानदार और गौरवपर्ूण्ा मानी जाती । फिर भी हाल की कामयाबी को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता ।
देश में खिलाडियों का शानदार स्वागत
बांगलादेश में हुए विश्व ट्वान्टी-२० क्रिकेट के पहले चरण में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल कर २१ मार्च को वापस लौटी कप्तान पारस खडका के नेतृत्व वाली नेपाली क्रिकेट टोली का शानदार स्वागत हुआ था । टोली के स्वागत में त्रिभुवन हवाई अड्डे पर युवा तथा खेलकुद मन्त्री पुरुषोतम पौडेल, खेल अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, कलाकार और पत्रकारों की अच्छी खासी भीडÞ मौजूद थी । टोली को साथ लेकर प्रशंसकों की रैली हवाई अड्डे से गौशाला, पुराना बानेश्वर, मैतीदेवी, पुतली सडक, बागबजार, जमल, दरबारमार्ग, जय नेपाल हल, पुलिस हेडक्वाटर होते हुए नक्साल तक पहुँची थी ।
यह एक ऐसी स्वतः स्फर्ूत खुशी थी, जिसे आप हम इस अन्दाज में महसूस कर सकते हैं । जैसे मां बाप अपनी सन्तान के पहले उठते कदमों पर ताली बजाते हुए झूम उठते हैं और उनकी दिली तमन्ना होती है कि मेरा बच्चा, मेरा लाल भविष्य में खूब चले, दौडÞे और कामयाबी की हर बुलन्दी को चूमें । हां.. हाँ… ठीक ऐसी ही खुशी का इजहार क्रिकेट प्रेमी नेपाली ने उस रोज किया था ।
नेपाली खिलाडÞी का ऐसा भव्य स्वागत लम्बे समय तक याद किया जाएगा । ऐसा होना भी चाहिए था । क्योंकि विश्वकप में उपस्थिति दर्ज कराने का जो नेपाली खेल जगत का सपना था, उसे हकीकत में बदल दिया, नेपाल राष्ट्रीय क्रिकेट टोली ने । यह कोई मामूली बात तो नहीं । उस पर तर्ुरा यह कि हङकङ और चिर प्रतिद्वन्द्वी अफगानिस्तान को भी इस बार नेपाल ने धूल चर्टाई । देश के गौरव, हमारे खिलाडÞी इस शानदार इस्तकवाल के हकदार थे ।
उस रोज कुछ अलग ही माहौल था, त्रिभुवन विमानस्थल के परिसर में । नेपाली राष्ट्रीय झण्डा, फूलमाला और नेपाली जर्सर्ीीहने र्समर्थकों की भीडÞ के चलते शादी के घर की तरह विमानस्थल परिसर चमक रहा था, गुलजार था । क्रिकेट टीम के आगमन के तीन घंटे पहले से ही हजारों की संख्या में प्रशंसक-र्समर्थक खास नेपाली बैण्ड बाजा -जिसे नेपाली में पञ्चे बाजा कहते हैं) के साथ नाचगान करते हुए नेपाली क्रिकेटरों के स्वागत के लिए इन्तजार कर रहे थे ।
टोली के स्वागतार्थ युवा तथा खेलकुद मन्त्री पुरुषोत्तम पौडेल, खेलकुद सचिव हरि नेपाल, राष्ट्रीय खेलकुद परिषद के सदस्य सचिव युवराज लामा, नेपाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष टंक आङबुहाङ और महासचिव अशोकनाथ प्याकुरेल के अतिरिक्त विधि क्षेत्र की हस्तियां वहां मौजूद थीं । जैसे ही टीम नेपाल आगमन कक्ष से बाहर निकली, वहाँ के माहौल में खुशी, उत्साह और विजयी उन्माद की लहरें हिलोर मारने लगी । रंग, अबीर, गुलाल, फूलो की बारिश के बीच बहुत देर तक ‘नेपाल ! …. नेपाल !’ ध्वनि से परिसर ‘गुंजित रहा । सभी खुशी से रोमांचित थे ।
खिलाडिÞयों को लेकर जो ‘मिनी टाटा’ गाडÞी जा रही थी, उसे लगभग २ सौ मोटरसाइकल सवार साथ दे रहे थे । सैकडÞो र्समर्थक तो सवारी साधन की कमी से हवाई अड्डे पर ही छूट गए । लगातार नेपाली के दिल जीतने वाले क्रिकेट टोली के कप्तान पारस खड्का ने हार्दिक स्वागत से विभोर होते हुए प्रशंसकों को कहा- इस भव्य स्वागत  से लगता है, हम सिर्फखेल कर नहीं लौटे हैं, बल्कि उपाधि हासिल कर लौट रहे हैं । नेपाल में क्रिकेट अब सिर्फखेल नहीं रह गया है । यह बहुत दूर निकल चुका है ।
नेपाली टोली को ऐसा ही भव्य स्वागत विश्वकप चयन के दौरान मिली सफलता हासिल कर लौटने पर मिला था । अब की बार वह खुशी चौगुनी बढÞी है । आनेवाले दिनों में नेपाली टोली को बहुत सारी प्रतियोगिताओं में शरीक होना है । और अनेक कामयाबी हासिल करनी है । ऐसा नेपाली टोली के प्रशिक्षक पुबुदु दसानायके का कहना है ।
पुरस्कार और प्रोत्साहन
विश्व ट्वान्टी-२० क्रिकेट में उच्च पर््रदर्शन करने पर नेपाली टोली को नेपाल सरकार की ओर से हर खिलाडÞी को ५-५ लाख नगद पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने का ऐलान २१ मार्च शुक्रबार के रोज युवा तथा खेलकुद मन्त्री पुरुषोत्तम पौडेल ने किया । इसी तरह नेपाली क्रिकेट के सर्वोच्च निकाय नेपाल क्रिकेट संघ ने भी विश्व ट्वान्टी-२० में सहभागी नेपाली टोली के खिलाडी, प्रशिक्षक, अफिसियल, फिजियो अािद को प्रतिव्यक्ति १ लाख ५० हजार नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है । क्यान के अध्यक्ष टंक आङबुहाङ ने ऐसा ऐलान किया है ।
इसी तरह फोर्ब्स में सूचीकृत नेपाली अर्बपति व्यापारी विनोद चौधरी ने कहा है- सरकार तैयार हो तो अन्तर्रर्ाा्रीयस्तर की रंगशाला निर्माण करने के लिए हम तत्पर हैं । नेपाली राष्ट्रीय क्रिकेट टोली ने बंागलादेश में हुए ट्वान्टी-२० विश्वकप में उच्च पर््रदर्शन करते हुए अपनी यात्रा सम्पन्न करने पर चौधरी ने ऐसा बताया । नेपाली टोली ने २० मार्च को समूह चरण के अपने अन्तिम खेल में सनसनीपर्ूण्ा पर््रदर्शन के साथ अफगानिस्तान को ९ रन से पराजित किया । इस जीत से खुश होकर चौधरी ने टि्वट किया- ‘साहासिक नेपाली टीम को सलाम । यदि नेपाल सरकार चाहेगी तो र्सार्वजनिक समझदारी अवधारणा अनुसार सरकार से मिल कर नई रंगशाला -स्टेडियम) बनाने की बात को गम्भीरता से लिया जा सकता है ।’
‘जमीन उपलब्ध करा कर र्सार्वजनिक निजी साझेदारी -पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरसीप) की अवधारणा के मद्देनजर सम्झौता होने पर चौधरी ग्रुप तत्काल रंगशाला निर्माण कार्य में जुट सकता है ।’ यह बात बताई है चौधरी ग्रुप के कार्पोरेट कमन्युकेसन एवं पब्लिक रिलेसन अफिसर मधुसूदन पौडेल ने ।
इसी सिलसिले में पौडल ने आगे कहा- नेपाली टीम को सुविधा सम्पन्न विश्वस्तरीय रंगशाला की जरूरत है । जहाँ विदेशी टोली भी अभ्यास और खेल के लिए आ सके । सरकार यदि पिपिपी अर्न्तर्गत वैसी रंगशाला के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध करेगी तो चौधरी ग्रुप निर्माण कार्य में जुट सकती है ।
इसी प्रकार क्रिकेट और क्रिकेटरों को ‘बकअप’ करने के लिए निजी संघ संस्था, बडÞे-बडÞे कर्पोरेट धराने सभी आगे आ रहे हैं । फलस्वरुप तकरीवन हर रोज हमारे खिलाडÞी सम्मानित और पुरस्कृत हो रहे हैं । यह सिलसिला बहुत दिनों तक जारी रहेगा ।
अब देखने वाली बात ये है कि नेपाली टीम अपनी इस कामयावी को कायम रख पाती है या नहीं । क्रिकेट खेलने के लिए जिस देश में एक भी अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर की रंगशाला न हो, ऐसी अवस्था में खिलाडÞी और कोच -प्रशिक्षक) के प्रयास से प्राप्त कामयाबी भी बहुत मायने रखती है । इस कामयाबी को नजरअन्दाज नहीं करना होगा । देशवासी और सरकार दोनों अपनी-अपनी तरफ से इमानदारी के साथ लग जाएं तो इस खुशी को हम मुकम्मल बना सकते हैं । अभी तो सफलता की सिर्फपहली किरण नजर आई है । इस कामयाबी को बरकरार रखने के लिए खिलाडÞी, नेपाल क्रिकेट संघ -कैन), नेपाल के संचार माध्यम को तो जी जान से आगे बढÞना ही होगा और इसके अलावा निजी क्षेत्र के महारथियों को भी खुले दिमाग और उदार हदय के साथ आगे आना होगा, खुद को गंदी राजनीति से ऊपर रखते हुए । तब कोई बात बनेगी ।
देखना है, जोश में सरकार ने मूलपानी में रंगशाला बनाने की बात को फिर से अपने वादे में शामिल तो किया है, मगर हकीकत में यह वादा टाँय-टाँय फिस्स तो नहीं होगा । अगर खुदा न खास्ते वैसा हुआ तो क्रिकेट और देश दोनों की बदकिस्मती मानी जाएगी । हम सिर्फइतना चाहते हैं, सरकारी घोषणा का कार्यान्वयनर् इमानदारी के साथ हो ।
क्रिकेट में मजबूत कहलाने वाले दक्षिण एसिया में पडÞोसियों के संग प्रतिस्पर्धा करने के लिए सिर्फएक रंगशाला को काफी नहीं माना जाएगा । अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर की दर्जनों रंगशाला वाले मुल्क भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश से मुकाबला करना है तो नेपाल सरकार नेपाल के हर विकास क्षेत्र में स्तरीय रंगशाला बनावे । कैन भी अपने क्लबों को सक्रिय करते हुए राष्ट्रीय लिग की आयोजन करावे । इस काम में क्रिकेट प्रेमी जनता और निजी क्षेत्र -प्राइवेट सेक्टर) भी अपना भरपूर योगदान दें । लिग को जितनी मजबूती मिलती जाएगी, उसी अनुपात में क्षमतावान और प्रतिस्पर्धी खिलाडिÞयों का जत्था तैयार होगा । भौतिक पर्ूवाधार के साथ अवसर प्रदान करने पर ही हमारे युवा क्रिकेट के सितारे बन सकते हैं । अपने बच्चांे को क्रिकेट खेलने के लिए खुद माँ-बाप हौसला देंगे । खुद को गौरवान्वित मानेंगे । क्रिकेट के पक्ष में पूरा देश लग जायगा । बहुत ही कम पूँजी की लागत में नेपाली क्रिकेट ने अभी तक सफलता पाई है । इस लगानी को बढÞाने पर हमारी क्रिकेट टीम नए-नए कारनामे अंजाम दे सकती है ।
 – प्रस्तुतिः मुकुन्द आचार्य

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