कार्यालयों में महिलाओं की भूमिका

मीना कर्ण्र्:जके आधुनिक युग में महिलाओं का दायित्व भी निश्चित रूप से बढÞ गया है । लद गए वे दिन जब महिलाएं घरों की चाहार-दिवारी में खुद को कैद कर रखती थीं । जिन्दगी के हर क्षेत्र में आज पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाते हुए नारी आगे बढÞ रही है । आज प्रत्येक कार्यालय में आप महिला कर्मचारी को देखते होंगे । हालांकि उनकी संख्या पुरुषों की अपेक्षा कुछ कम होगी । लेकिन वित्तीय संस्थाओं में महिला कर्मचारी की उपस्थिति उल्लेखनीय होते जा रही है । यह खुशी की बात है । women in office
विभिन्न कार्यालयों में काम करना स्वयं एक चुनौती है, खास कर महिलाओं के लिए । आज जिस रूप में महिला घर से बाहर निकल सकती है, काम कर सकती है, विदेशों में जा सकती है और अपनी खूबी दिखा सकती है, ऐसी अवस्था में महिला को भी समय के अनुसार खूद को बदलना ही होगा । सभी कार्यालयों में काम करने का वातावरण सुखद, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा, इसकी कोई ग्यारेन्टी नहीं । पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को कुछ ज्यादा ही सावधानी अपनानी पडÞती है ।
कार्यालयों के लिए योग्य और कुशल कर्मचारी मेरुदण्ड का काम करते हैं । मानव संसाधन को भी एक सम्पत्ति के रूप में माना जाता है । जिसके बिना कोई भी संस्था ठीक से नहीं चल सकती । इसलिए कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं को भी योग्य और कार्यकुशल होना जरूरी है । सिर्फशैक्षिक प्रमाणपत्र होने से कछु नहीं होता । बल्कि काम करने की क्षमता और कार्यकुशलता होना भी बहुत जरूरी है ।
वैसे तो महिलाओं में कुछ विशेष गुण होते हैं, जिसकी वजह से वे अपना काम बखूबी अन्जाम दे सकती हैं और अपनी जिम्मेदारियों को कुशलता पर्ूवक निर्वाह कर सकती हैं । महिलाओं में खास कर सहिष्णुता, लगनशीलता, इमान्दारिता और कार्यकुशलता पाई जाती है । जिससे वे अपना काम सहज ढंग से कर सकती हैं । धर्ैयता और सहनशीलता का परिचय देकर लोगों को प्रभावित कर सकती हंै । अपनी मीठी वाणी का प्रयोग कर क्रूर और अडियल किसिम के लोगों को भी प्रभावित कर सकती हैं । नम्रता और सहिष्णुता का परिचय देकर अपने काम में सफल हो सकती हैं ।
महिलाएं खासकर कोमल हृदय की होती हैं और्रर् इश्वर के प्रति आस्थावान भी । वे पाप, पुण्य का बहुत ख्याल रखती हैं । कोमल मन की होने की वजह से दूसरे के दुख में द्रवित हो जल्द पिघल जाती हैं । और दूसरों को सहयोग करने के लिए तत्पर रहती हैं । लगनशील, मृदुभाषी और इमान्दारीपर्ूवक अपना काम पूरा रकने की क्षमता रखनेवाली महिलाएं हर कार्यालय में अपना पर्ूण्ा योगदान दे सकती हैं । महिलाओं में पाई जाने वाली इन विशेषताओं को पहचान कर इनकी कद्र करते हुए इससे फायदा उठना भी जरूरी है । अगर महिलाओं को जिम्मेवारीपर्ूण्ा काम सौंपा जाए तो वे किठन से कठिन परिस्थितियों से जूझकर भी अपना काम पूरा कर सकती हैं । समस्याओं को सुलझाना वे बखूबी जानती हैं । और सहज तरीके से किसी भी समस्याओं को सुलझा सकती हैं । इसीलिए कार्यालयों में कार्यरत महिलाओं को भी सही तरीके से परिचालन कर संस्थाएं खुद को लाभान्वित कर सकती हैं ।
पहले की तुलना में आज महिलाओं को कार्यालयों में अधिक संख्या में कार्यरत देखा जा सकता है । फिर भी ऊंचे ओहदों में उनकी संख्या कुछ कम ही नजर आती है । निर्ण्र्ाात्मक भूमिका लेने वाले पदों में प्रायः महिलाओं की पहुँच नहीं देखी जाती । पर महिलाओं को सही तरीके से उपयोग कर काम में लगाएं तो भ्रष्टाचार तो कम होगा ही संस्थाओं में काम भी बडÞे सुचारू ढंग से हो सकते हैं ।
महिलाओं को एक विशेष समस्या के साथ जूझना पडÞता है । जिसका निराकरण होना भी जरूरी है । महिलाओं को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पडÞती है । एक तरफ वह घरेलू समस्याओं से घिरी रहती है तो दूसरी तरफ अफिस की जिम्मेवारी भी उसका सिर्रदर्द बन जाती है । इन दोहरी जिम्मेवारियों में बंट कर वह अपने काम में अपनी खूबी नहीं दिखा पाती । घरेलू कामों को अधिक महत्व देते हुए वह अफिस की जिम्मेवारियों से विमुुख हो जाती है । घरेलू कामों को प्राथमिकता देते हुए अफिस के कामों में कम समय देना, अफिस में बडÞी जिम्मेवारियाँ लेने के लिए अग्रसर न होना वा डÞरना, ये सब महिलाओं के कमजोर पक्ष हैं । पर इन सब के लिए हम सिर्फमहिलाओं को ही दोष नहीं दे सकते हैं । इन सभी समस्याओं की जडÞ है- हमारा पितृसत्तात्मक परिवारिक संगठन । जिसकी वजह से घर की सारी जिम्मेदारियां औरतों के ऊपर ही होती हैं । पुरुष सदस्य घर के कामों में हाथ नहीं बटाते, जिससे महिलाओं को घर के कामकाज में अधिक समय देना पडÞता है । और वह कार्यालय की जिम्मेवारियों से विमुख हो जाती है । इस तरह ऊपरी तह में पहुँच पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दी जाती है ।
इन सब समस्याओं का समाधान करने लिए महिलाओं को स्वयं ही आगे आना होगा । अपने समय को व्यवस्थित कर अपने घर परिवार में सामंजस्य लाते हुए घर और अफिस के कामों में उचित सन्तुलन लाना होगा । अपने घर के सभी सदस्यों को काम में सहयोगी बनाकर कार्यालय की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देकर बखूबी निभाने का इमान्दार प्रयास करना होगा । इस तरह निर्ण्ाायक स्तर पे पहुचने के दरवाजे स्वयं ही खोलना होगा ।
नारी शक्ति एक ऐसी शक्ति है, जो अवसर आने पर कठिन से कठिन काम कर सकती है, बस एक प्रतिवद्धता की जरूरत है । इसीलिए महिलाएं और पुरुष दोनों में समान रूप से काम का बंटवारा हो और महिलाओं को आगे आने का समुचित अवसर मिले तो हर असम्भव, सम्भव हो सकता है ।
समय बदल रहा है और आज की महिलाएं घर में ही सिमट कर नहीं रह सकती हैं । इसीलिए महिलाओं को घरेलू कमों को सुबह शाम और छुट्टयिों में पूरा करते हुए कार्यालय में ज्यादा से ज्यादा समय दे कर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर अपनी क्षमता को प्रमाणित करना होगा । अपना व्यक्तिगत काम को आफिस समय में पूरा करने की आदत को छोडÞ कर संस्था के विकास में योगदान देना उचित रहेगा । क्योंकि उन्ही सब कमजोरियों की वजह से आज महिलाएं कार्यालय में उपेक्षित रहती हैं और उन्हें कोई भी अच्छा अवसर नहीं मिल पाता है । इन अवसरों को पाने के लिए महिलाओं को अपना समय व्यवस्थित कर अपनी क्षमता को प्रमाणित करना जरूरी है, जिससे उन्हें भी बराबर का मौका मिले । अपने अन्दर की खूबियों को पहचान कर उसे बाहर निकालने के लिए मेहनत करते हुए कार्यकुशलता का परिचय देना जरूरी है । जिससे माथे पे लगा ये दाग कि ‘महिलाएं कुछ नहीं कर सकती है’ को मिटाया जा सके । इसके लिए उन्हें दृढÞ निश्चय करना होगा और अपनी क्षमता पर््रदर्शन कर संस्था के विकास में समुचित योगदान देना होगा । महिलाओं में पाई जाने वाली जिम्मेवारी को बखूबी निभाने की क्षमता का समुचित प्रयोग कर हर असम्भव को सम्भव बनाना होगा । इस बदलते समय में अपने आप को ढÞालते हुए हरेक क्षेत्र में अपने आप को सफल बनाना होगा । संस्थाओं को भी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को परिचालित करते उन्हें समुचित अवसर प्रदान करें । समझदारी और महिलाओं की होसियारी दोनों मिल जाएं तो संस्था की उन्नति में चार चाँद लगने से कोई रोक नहीं सकता । इसीलिए महिला कर्मचारी और संस्थाएं दोनों को मिल कर आगे बढÞना जरूरी है

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