काला कीर्तिमान, इतिहास में ही सबसे बड़ा मन्त्रिमंडल : लिलानाथ गौतम

लिलानाथ गौतम
नेपाल के कानुन अनुसार शादी–विवाह में ५१ से ज्यादा लोगों को बारात ले जाना गैर कानुनी होता है । लेकिन वहीं कानून बनाने वाले हमारे नेता आवश्यकता से ज्यादा मन्त्री बनाते हैं । अभी देश में ५४ मन्त्री हैं, जो हमारे देश के लिए आवश्यक नहीं है । हां, नेपाली कांग्रेस के सभापति तथा प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा ने इतिहास में ही सबसे बड़ा (५४ सदस्यीय) मन्त्रिमण्डल बनाया है । इससे पहले भी यह रिकार्ड उन्हीं के पास था । वि.सं. २०५२ साल भाद्र २७ गते देउवा ने ही ५२ सदस्यीय मन्त्रिमण्डल बनाया था । अपना ही रिकार्ड तोड़कर २२ साल बाद देउवा ने फिर ५४ सदस्यीय मन्त्रिमण्डल गठन किया है । जिस को बहुत लोगों ने ‘काला इतिहास’ नामकरण किया है । क्योंकि इतना ज्यादा मन्त्रियों की आवश्यकता नेपाल में नहीं है । आर्थिक दृष्टिकोण से राज्य को कमजोर बनाता है, इसके अलावा दूसरी कोई उपलब्धि होने वाली नहीं है ।
नजरिया देखा जाए तो राजनीतिक पार्टी और नेताओं के स्वार्थ के लिए यहां मन्त्रालय विभाजन किया जाता है । इतना ही नहीं, अनावश्यक रूप में राज्यमन्त्री और सहायक मन्त्रियों के पद सृजित किए जाते हंै । स्मरणीय बात तो यह है कि राज्य तथा सहायक मन्त्रियों का कोई खास काम नहीं होता है । इतना होते हुए भी अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए प्रधानमन्त्री ऐसा करने के लिए बाध्य हो जाते हैं । जनस्तर में तीव्र विरोध होने के बाद भी अपने स्वार्थ के अनुसार अनावश्यक मन्त्री और राज्यमन्त्री बनाने की श्रृंखला जारी रखते हैं ।
चारों ओर से आलोचना होने के बाद भी देउवा आत्मग्लानि महसूस नहीं कर रहे हैं । न तो मन्त्रियों में हीनताबोध ही है । यहां एक बात तो साफ होती है कि मन्त्री बननेवालों का मूल उद्देश्य देश और जनता की सेवा नहीं है और ना ही देश की आवश्यकतानुसार काम करना होता है । वे तो सिर्फ सामाजिक रुआब और दिखाने के लिए मन्त्री बनते हैं । इसके आवरण में जो धन्दा होता है, वह निन्दनीय होता है । राज्यशक्ति का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ प्राप्त करना, पार्टी कार्यकर्ता को ठेक्का–पटा दिलाना, आपराधिक क्रियाकलाप में संलग्न कार्यकर्ता को संरक्षण करना, उन लोगों का मुख्य उद्देश्य बनता है । नहीं तो चारों ओर से आलोचित होने के बाद भी कोई क्यों राज्यमन्त्री बनने के लिए लालायित होते ?
नेपाल में ज्यादा से ज्यादा २०–२२ मन्त्रालय तथा उस में एक–एक मन्त्री से ज्यादा आवश्यक नहीं है । इसीलिए अभी देउवा के मन्त्रीमण्डल में संलग्न ५४ मन्त्रियों में से कम से कम ५० प्रतिशत (२७ मन्त्रियों) का कोई भी काम नहीं है । यह लोग तो सिर्फ राज्य के लिए अभिशाप हैं, ऐसा कहना गलत नहीं होगा । इसीलिए तो लोग कह रहे हैं– देउवा ने ‘काला इतिहास’ रचा है । देउवा के मन्त्रिमण्डल में अभी तीन उप–प्रधानमन्त्री, २६ मन्त्री और २४ राज्यमन्त्री हैं । इन में से मूल मन्त्रियों का काम और जिम्मेवारी हो सकती है । इसीलिए वे लोग आवश्यक भी है । लेकिन जो उप–प्रधानमन्त्री और राज्यमन्त्री का पद है, वह आवश्यक नहीं है ।
हमारे यहां तो काम न होने के कारण प्रायः मन्त्री भी सामान्य से सामान्य कार्यक्रमों का उद्घाटन करने के लिए समय निकाल लेते हैं । ऐसी अवस्था में राज्यमन्त्रियों का काम और जिम्मेदवारी क्या है ? नैतिक दृष्टिकोण से इस प्रश्न का जवाब हमारे प्रधानमन्त्री के पास नहीं है ।
इससे पहले वि.सं. २०५२ साल में भी देउवा ने २७ मन्त्री, १६ राज्यमन्त्री और ८ सहायक मन्त्री (कूल ५२) सदस्यीय मन्त्रिमण्डल बनाया था । देउवा के मन्त्रिमण्डल में अभी भी मन्त्रियों की संख्या बढ़ सकती है । क्योंकि अभी भी एक मन्त्रालय में मन्त्री नहीं हैं । वह मन्त्रालय है– शान्ति तथा पुनर्निर्माण मन्त्रालय । अगर देउवा चाहते है तो वहां भी एक मन्त्री और राज्यमन्त्री रख सकते हैं । मन्त्री रखना तो ठीक ही होगा, लेकिन राज्यमन्त्री आवश्यक नहीं है ।
इस तरह अनावश्यक मन्त्रियों की भीड़ जमा कर राज्य को आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर बनानेवाले सिर्फ देउवा ही नहीं हैं । इससे पहले भी कुछ प्रधानमन्त्रियों ने इसी तरह की घिनौनी हरकत की है । देउवा के बाद सबसे बड़ा मन्त्रिमण्डल डॉ. बाबुराम भट्टराई ने बनाया था । डॉ. भट्टराई ने वि.सं. २०६८ साल भाद्र १२ गते ४९ सदस्यीय मन्त्रिमण्डल बनाया थ । भट्टराई ने उस वक्त दो उप–प्रधानमन्त्री, २४ मन्त्री और २२ राज्यमन्त्री बनाया था । सबसे ज्यादा उप–प्रधानमन्त्री बनानेवाले प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली हैं । ओली ने २०७२ साल आश्विन २४ गते एमाले नेता भीम रावल, माओवादी संसदीय दल के उपनेता टोपबहादुुर रायमाझी, फोरम लोकतान्त्रिक के अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदार, नेकपा माले के महासचिव सीपी मैनाली, राप्रपा नेपाल के तत्कालीन अध्यक्ष कमल थापा और जनमोर्चा के अध्यक्ष चित्रबहादुर केसी को उपप्रधानमन्त्री बनाया था । लेकिन उनका मन्त्रिमण्डल सिर्फ २६ सदस्यीय था । इसीतरह एमाले नेता माधवकुमार नेपाल तीसरे स्थान में हैं, उन्होंने ४८ सदस्यीय मन्त्रिमण्डल बनाया था ।
मासिक १३ करोड़ आर्थिक भार
सरकार में अभी २४ राज्यमन्त्री हैं, जो राज्य और जनता के लिए आवश्यक नहीं है । लेकिन सरकारी कोष से उन लोगों के लिए मासिक १३ करोड़ से ज्यादा खर्च हो रहा है । एक राज्यमन्त्री के लिए एक उप–सचिव, एक शाखा अधिकृत, एक नायव सुब्बा, दो चालक और दो कार्यालय सहयोगी और उन लोगों के लिए आवश्यक तलब–सुविधा सरकार उपलब्ध कराती है । राज्यमन्त्री के स्वकीय सचिवालय के लिए मासिक न्यूनतम ३ लाख रुपया खर्च होता है । राज्यमन्त्री अपनी मन्त्रालय से एक गाड़ी प्रयोग करते हैं । लेकिन उनके लिए गृह मन्त्रालय से एक गाड़ी प्राप्त होती है । और स्वकीय सचिव के लिए भी गाड़ी की व्यवस्था है, इसतरह एक राज्यमन्त्री के लिए कम से कम तीन गाडि़यों का प्रयोग होता है ।
तीन गाडि़यों के लिए आवश्यक चालक, इन्धन, मर्मत खर्च आदि में मासिक डेढ लाख से ज्यादा ही खर्च होता है । इसीतरह राज्यमन्त्री जहां रहते हैं, उस घर का पानी, टेलिफोन और विद्युत का बिल भी सरकार को ही भरना पड़ता है । इसमें भी प्रति राज्यमन्त्री मासिक २५ हजार से ज्यादा खर्च होता है । राज्यमन्त्री को मासिक ६० हजार रुपया तलब देना पड़ता है । घर किराया के वापत ४० हजार प्राप्त करते हैं । इसतरह २४ राज्य मन्त्रियों का मासिक खर्च १३ करोड़ से ज्यादा हो जाता है ।
छोटा मन्त्रिमण्डल का इतिहास
नेपाल का इतिहास देखें तो सबसे छोटा मन्त्रिमण्डल वि.सं. २०१२ में बना है । ०१२ साल बैशाख १ गते गठित शाही सलाहकार सभा में ५ सदस्य थे । यही नेपाल का सबसे छोटा मन्त्रिमण्डल है । इसमें एक चीफ रोयल एडभाईजर, एक डिपुटी प्रिन्सिपल रोयल एडभाइजर और तीन रोयल एडभाइजर के रूप में नियुक्त थे । इस मन्त्रीपरिषद् के प्रमुख सरदार गुञ्जमान सिंह थे । इसके बाद वि.सं. २०१२ साल जेठ २ गते सुवर्ण शम्शेर जंगबहादुर राणा के नेतृत्व में गठित मन्त्रिपरिषद् में सिर्फ ६ सदस्य थे ।
राणा प्रधानमन्त्री मोहन शम्शेर जंगबहादुर राणा और टंकप्रसाद आचार्य ने भी छोटा ही मन्त्रिमण्डल बनाए हैं । राणा द्वारा वि.स.. २००७ साल फागुुन और २००८ साल जेठ में गठित मन्त्रिमण्डल में ७ सदस्य थे । इसीतरह वि.सं. २०१२ साल माघ १३ गते आचार्य द्वारा गठित मन्त्रिमण्डल में भी ७ ही सदस्य थे । प्रथम जननिर्वाचित प्रधानमन्त्री विश्वेश्वरप्रसाद कोइराला ने ८ लोगों को मन्त्री और १३ लोगों को उपमन्त्री बनाया था । उनके मन्त्रिमण्डल में कुल २१ सदस्य थे । बीपी ने ही पहली बार सुवर्ण शम्शेर जबरा को उप–प्रधानमन्त्री बनाया था ।
यह हैं– हाल के ५४ मन्त्रियों का लाव लश्कर
१. शेरबहादुर देउवा– प्रधानमन्त्री
तथा शान्ति तथा पुननिर्माण मन्त्री

उप–प्रधानमन्त्री
२. विजयकुमार गच्छदार– संघीय मामला तथा स्थानीय विकास
३. कृष्णबहादुर महरा– परराष्ट्र
४. गोपालमान श्रेष्ठ– शिक्षा

मन्त्री
५. गिरिराजमणि पोखरेल– स्वास्थ्य
६. ज्ञानेन्द्रबहादुर कार्की– अर्थ
७. फरमुल्लाह मन्सुर श्रम तथा रोजगार
८. जनार्दन शर्मा– गृह
९. दीपक बोहरा– विज्ञान तथा प्रविधि
१०. प्रभु शाह– सहरी विकास
११. सुनिलबहादुर थापा– उद्योग
१२. बिक्रम थापा– वन तथा भू–संरक्षण
१३. जितेन्द्रनारायण देव– संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्यन
१४. गोपाल दहित– भूमिसुधार तथा व्यवस्था
१५. मोहनबहादुर बस्नेत– सूचना तथा सञ्चार
१६. रामकृष्ण यादव– कृषि विकास
१७. महेन्द्र यादव– खानेपानी तथा सरसफाई
१८. अम्बिका बस्नेत– सहकारी तथा गरिबी निवारण
१९. वीरबहादुर बलायर– भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात
२०. मीनबहादुर विश्वकर्मा– वाणिज्य
२१. यज्ञबहादुर थापा– कानुन, न्याय, तथा संसदीय मामिला
२२. भीमसेनदास प्रधान– रक्षा
२३. सञ्जयकुमार गौतम– सिँचाइ
२४. राजेन्द्रकुमार के.सी.– युवा तथा खेलकुद
२५. टेकबहादुर बस्नेत– सामान्य प्रशासन
२६. शिवकुमार मण्डल– केवट आपूर्ति
२७. महेन्द्रबहादुर शाही– ऊर्जा
२८. आशा कोइराला– महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण
२९. सन्तकुमार थारु– पशुपंक्षी विकास
३०. मिथिला चौधरी– जनसंख्या तथा वातावरण

राज्यमन्त्री
३१. मोहम्मद जाकिर हुसेन– महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण
३२. रामसिंह यादव– स्वास्थ्य
३३. श्यामकुमार श्रेष्ठ– गृह
३४. शम्भुलाल श्रेष्ठ– ऊर्जा
३५. कर्णबहादुर बि.क.– आपूर्ति
३६. छमबहादुर गुरुङ– सहरी विकास
३७. गोमा कुवर– पशुपंक्षी विकास
३८. वाङदी शेर्पा– सामान्य प्रशासन
३९. सीता गुरुङ– भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात
४०. सरिता प्रसाई– कृषि विकास
४१. शेषनाथ अधिकारी– शिक्षा
४२. नरबहादुर चन्द– वाणिज्य
४३. अब्दुल रज्जाकगद्दी– खानेपानी तथा सरसफाई
४४. तप्तबहादुर विष्ट– सूचना तथा सञ्चार
४५. अमरसिंह पुन– सिँचाइ
४६. दिलमान पाख्रिन– कानुन, न्याय, तथा संसदीय मामिला
४७. उदयशम्सेर राणा– अर्थ
४८. डिल्लीबहादुर चौधरी– श्रम तथा रोजगार
४९. तेजुलाल चौधरी– युवा तथा खेलकुद
५०. चम्पादेवी खड्का– सहकारी तथा गरिबी निवारण
५१. जनकराज चौधरी– संघीय मामिला तथा स्थानीय विकास
५२. सुमित्रा थरुनी– संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड् यन
५३. यसोदाकुमारी लामा– भूमिसुधार तथा व्यवस्था
५४. रेशम लामा– उद्योग

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