कितनों का टूटा भ्रम ?

विनय दीक्षित:तर्राई की सांप्रदायिक घटना के चलते एकाएक चौथी शक्ति के रूप में उदीयमान हुए करीब २ दर्जन मधेशवादी र ाजनैतिक दलों ने संविधान सभा चुनाव २०७० में लज्जाजनक हार हासिल की है। मधेशी मोर्चा के रूप में सरकार में सहभागी हुए मधेशवादी नेताओं ने लगातार पार्टर्ीीी फूट और सत्ता मोह जारी रख्खा, मन्त्री बनने के खेल में हर नेता ने एक नई पार्टर्ीीठन की और जनता की परवाह नहीं की। फलस्वरूप मधेशवादी बरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी जमानत गंवा दी। क्यों नहीं दिया जनता ने मधेशवादी दलको वोट – क्यो नाराज थी जनता – माओवादी जैसी बडÞी पार्टर्ीीो क्यों धोखा मिला – यह सवाल आज भी सम्बन्धित पार्टर्ीीे नेताओं के जेहन में किसी बुरे साये की तर ह बसी हर्ुइ हैं।madheshi-janta_hindi-magazine

पिछले चुनाव में बाँके क्षेत्र नं.३ के प्रतिस् पर्धी काँग्रेसी नेता सुशील कोइराला को भार ी मतान्तर से पराजित करने वाले तत्कालीन मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल के नेता तथा पर्ूव मन्त्री र्सवदेव ओझा की जो हार हर्ुइ, उससे सिर्फओझा ही नहीं कई मधेशी नेता को गहरा सदमा पहुँचा है। चुनाव में जीतना और हारना एक अलग बात है, लेकिन जहाँ ५० हजार मतदाता हों, वहाँ एक पर्ूव मन्त्री जैसे नेताको सिर्फ७७ वोट मिले, यह निहायत शर्मनाक बात है।

संविधान सभा के चुनाव में किसी पार्टर्ीीे दाबेदारी न मिलने पर पर्ूवमन्त्री ओझा स् वतन्त्र ही चुनाव में कूद पडÞे और मात्र ७७ वोट मिलने पर उनके जनर्समर्थन का भी पोल खुल गया। चुनाव से पहले जनता को ही नहीं किसी को भी यकीन नहीं था कि ओझा इतनीर् शर्मनाक हार झेलेंगे।

स्थानीय मतदाताओं ने बताया कि मधेशी नेता ने लगातार मधेश को धोखा दिया है। एक मधेश एक प्रदेश, मधेशी अधिकार और सम्मान के नामपर ब्रहृमलूट मचाई है जिसके कारण नाराज जनता ने करारा जबाब दिया है। मन्त्री बनने के लिए लगातार फूट, आर्थिक हिसाब से अकूत सम्पत्ति बटोरने के चक्कर में मधेशी नेताओं ने मधेश की माँग को भुला दिया। तो जनता ने सोचा कि पुराने लोग ही ठीक थे।

बाँके जिला में अलग-अलग क्षेत्र के मतदाताओं से हिमालिनी ने जानने की कोशिश की है कि उन्होने मधेशी नेता या पार्टर्ीीे वोट क्यों नहीं दिया – नेपालगन्ज निवासी सुमेर गुप्ता ने कहा एक जमाना था, जब जय मधेश कहते हुए आँख बन्दकर जनता ने सिर्फमसाल पर वोट दिया था। नई पार्टर्ीीी नए लोग थे, और उनमें कुछ कर गुजरने का जोश दिख र हा था, लेकिन लगातार जनता की माँग से खेलवाडÞ किया गया।

एक मधेश प्रदेश को भी विभाजन की ओर ले गए। जिससे मैंने उन्हें वोट नहीं दिया। दूसरे मतदाता अनिल साहू ने कहा- मधेशी नेता से कहीं अन्य नेताओंका चरि त्र उत्तम देखा गया, जितने मधेशी नेता थे, चुनाव से पहले वोट मागते समय एक दूसरे को गाली देते थे, लेकिन किसी ने पहाडÞी नेताका विरोध नहीं किया। सब आपस में लड् ते हुए दिखाई दिए। मतदाता रोहित शर्मा ने कहा सरकार में जाने के लिए मधेशियो नें मोर्चा बनाया था लेकिन चुनाव में आने के लिए कोई मोर्चा या गुटबन्दी नहीं की और मधेशी जनताको बेवकूफ समझा। जिसका जवाब जनता ने दिया है अब मधेश में इनके लिए कोइ जगह नहीं है। क्षेत्र नं.२ के मतदाता राम निवास यादव ने कहा- रूपये बाँटने से कोई वोट नहीं देता। आप कर्ीर् इमानदारी और जनर्समर्थन पर वोट मिलता ह।

कर्इ  नते ा बिहारी शलै ी म ंे चनु ाव म ंे उतर े आरै लाखा ंे रूपय े पानी की तरह बहाय,े नतीजा यह हुआ कि जमानत तक नहीं बची। मतदाता जावेद सिद्दीकी ने कहा- जो एकबार जीतता है उसे दोबारा चुनाव नहीं लडÞना चहिए। या तो लडने लायक कुछ काम करना पडÞा, यहाँ दोनों गलतियाँ हर्ुइ हैं। जिस कारण मैने किसी मधेशी नेता को मत नहीं दिया। बाँके जिला के ४ क्षेत्रों में से क्षेत्र नं. १ में नेकपा एमाले के देवराज भार, क्षेत्र नं.२ से नेकपा एमाले के दिनेश चन्द्र यादव, क्षेत्र नं.३ से नेपाली काँग्रेस के सुशील कोइराला और क्षेत्र नं.४ से नेकपा एमाले के दलबहादुर सुनार ने जीत हासिल की है।

क्षेत्र नं. ४ में पहले चुनाव में माओवादी की पूर्ण्ााकुमारी सुवेदी ने जीत हासिल की थी, इसबार उनका भी पत्ता साफ नजर आया। इस बार के चुनाव में जनता ने जो मतपरि णाम दिए हंै, उससे बहुतों का भ्रम टूटता हुआ नजर आ रहा है। डाक्टरी पेशाको लात मार कर चुनावी रंग जमान े पहचँु े डाक्टर जितन्े द ्र महासठे की भी जमानत जफत् हा े गर्इ। अपन े पशे े म ंे जान- मान े हाने े का क्या मतलब – जब उन्ह ंे सिर्फ  ३८० मत मिले। डा. महासेठ ने सद्भावना पार्टर्ी  स े क्षत्रे न.ं ३ म ंे उम्मदे वारी दी आरै महीना ंे तक पच्र ार-पस्र ार म ंे लाखा ंे गवं ा दिए। मधेश के मसीहा के रूप में उभरी पार्टर्ीीेधशी जनअधिकार फोरम नेपाल और उससे फुटी कई पार्टियों के नेता भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। अच्छी पकडÞ बताने वाले फोर म लोकतान्त्रिक से क्षेत्र नं.३ के उम्मीदवार हीरालाल लोनिया ने मात्र ७३६ वोट हासिल किया। वहीं क्षेत्र नं.२ से मिसवाहुल हक अन्सारी को ६८९ वोट मिले

। क्षेत्र नं.३ से फोरम नेपाल के कौशल बर्मा ने १०४७ वोट प्राप्त किया और क्षेत्र नं.२ से मोहम्मद इस्तियाक र्राई को ७८४४ वोट मिला। मधेश तर्राई फोरम के सफीउल्ला बागवान को मात्र ९ वोट मिले। बाँके जिला से स्वतन्त्र सहित चनु ाव म ंे सहभागी १०२ उम्मीदवारा ंे म ंे स े ४ न े जीत हासिल की आरै १० लागे प्रि तस्पधार्  म ंे र ह।े बाकँ ी ८८ लागे ा ंे का बरु ा हाल था।

यहा ँ तक कि उनकी जमानत भी नहीं बची। कई उम्मीदवार एसे े भी दिख े जा े अपन े गावँ म ंे वार्ड सदस्य जीतने की क्षमता भी नहीं रखते। यह पहलीबार हुआ है कि ४ में से ३ क्षेत्र में एमाले ने जीत हासिल की है।

२२ वर्षों से चुनाव में भाग ले रहे एमाले नेता दिनेश यादव ने पहली बार जीत हासिल की है। विजय घोषणा के बाद भी हप्तों तक यादव ने गाँव-गाँव जाकर मतदाता को धन्यवाद दिया और उनकी मंाग इमानदारी के साथ उठाने का आश्वासन भी दिया। क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक – राजनीतिक विश्लेषक तथा अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा ने हिमालिनी से बातचीत में मतपरिणाम पर जो बताया वह मधेशी नेताओं के लिए एक सबक है।

उन्हों ने कहा- जनता को कभी एक मधेश एक प्रदेश, तो कभी संघीयता के नाम पर मधेशवादी नेता ने बेवकूफ बनाया, जिसकी सजा जनता ने उन्हे दी है। विश्लेषक शर्मा ने कहा- कहना उतना ही चाहिए जितना किया जा सके। अगर कुछ नहीं कर सकते हैं तो मधेशी नेताओं को सरकार छोडÞ कर जनता के समक्ष आ जाना चहिए था।

दूसरी गलती थी र्सलाही जिला के एक ही निर्वाचन क्षेत्र से तर्राई मधेश सद्भावना पार्टर्ीीे राष्ट्रिय अध्यक्ष महेन्द्र राय यादव और सद् भावना पार्टर्ीीे राष्ट्रिय अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने चुनाव लडÞा। जबकि अन्य बडी पार्टियो में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिला। उन्होने समायोजन के आधार पर चुनावी रणनीति बनाई जबकि मधेशी नेताओं ने हवा में योजना बनाई। इस प्रकार मधेशी नेता ने तमाम गलतियाँ की हंै जिसके कारण उनकी हार हर्ुइ, अब जरूरत है उन्हंे एकीकरण करने की। यदि यह सम्भव नहीं हुआ तो अगामी चुनाव में भी कुछ कहा नहीं जा सकता।

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