किराए ने ले ही ली रेल मंत्री की कुर्सी

नई दिल्ली/कोलकाता. दिनेश त्रिवेदी ने रविवार रात रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 14 मार्च को रेल बजट पेश किया था। इसमें विभिन्न श्रेणियों में दो से 15 पैसे प्रति किलोमीटर तक किराया बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा गया था। यही बढ़ोतरी-खासकर सामान्य श्रेणी में दो पैसे की- उनकी कुर्सी ले बैठी।
उनकी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी इसके विरोध में हैं।  त्रिवेदी शायद देश के पहले रेल मंत्री हैं जो बजट पेश करने के बाद उस पर चर्चा का जवाब दिए बिना ही कुर्सी गंवा बैठे। उनकी जगह अब तृणमूल नेता और केंद्र में जहाजरानी राज्य मंत्री मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाए जाने की संभावना है। मुकुल के नाम का प्रस्ताव खुद ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से किया है। मीडिया से बातचीत में त्रिवेदी ने खुद इस्तीफे की पुष्टि की।
त्रिवेदी ने कहा, ‘मैं ममता जी का आदर करता हूं। मैंने उनसे फोन पर बात की। उन्होंने मुझे निर्देश दिया कि पार्टी नहीं चाहती कि मैं रेल मंत्री पद पर बना रहूं। इस वजह से मैंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। मैंने वही किया जो रेलवे के लिए जरूरी था। मुझे उसका कोई रंज नहीं है।’ इससे पहले रविवार सुबह तक वे कह रहे थे, ‘रेलवे किसी पार्टी की जागीर नहीं है। मैं मंत्रालय से चिपका नहीं रहना चाहता। लेकिन मैं जिम्मेदारियों से भाग भी नहीं सकता।

ममता लिखित में कहेंगी तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मैंने रेल बजट पेश किया है। उसे आगे बढ़ाना मेरा संवैधानिक कर्तव्य है।’ पार्टी की संसदीय दल की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली जाने से पहले ममता ने भी कोलकाता में कहा, ‘त्रिवेदी ने मुझसे बात की।

मैंने उन्हें पार्टी की इच्छा बताई। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह पार्टी के फैसले से बंधे हैं। अपना इस्तीफा भेज देंगे।’ उन्होंने कहा कि त्रिवेदी पार्टी में बने रहेंगे। ममता दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से एनसीटीसी के मुद्दे पर मुलाकात करने वाली हैं। वह चाहती हैं कि आगे बढ़ने से पहले मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई जाए।
आगे क्या—
– रेलमंत्री के इस्तीफे के बाद अब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी रेल बजट पर बहस का जवाब दे सकते हैं।
– तृणमूल चीफ ममता बनर्जी रविवार रात दिल्ली पहुंचीं। उनके साथ जहाजरानी राज्यमंत्री मुकुल रॉय भी आए। सरकार मुकुल को रेल मंत्री बना सकती हैं।
– रेलवे के 14 लाख कर्मचारियों की पांचों यूनियनों ने यात्री किराया बढ़ाने के फैसले का समर्थन किया है। फैसले को वापस लेने पर वह आंदोलन कर सकती हैं।
– सरकार यदि यात्री किराए में बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लेती तो ममता यूपीए से बाहर हो सकती है। ऐसे में कांग्रेस को सपा को सरकार में शामिल करने के लिए कदम बढ़ाने होंगे।
साहसिक फैसले का खामियाजा भुगता —
पूर्ववर्ती रेल मंत्रियों ममता बनर्जी और लालू प्रसाद यादव के आठ साल से रेल यात्री किराया न बढ़ाने के फैसले की परंपरा को दिनेश त्रिवेदी तोड़ा।
61 वर्षीय त्रिवेदी तृणमूल कांग्रेस के गठन से ही ममता के खास। उनकी वफादारी की वजह से कैबिनेट मंत्री पद हासिल किया। पिछले कुछ समय से उनके बीच मतभेद थे।
ममता ने पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री से पदोन्नत कर उन्हें अपनी जगह रेलमंत्री बनवाया।
ममता के हटने के बाद से रेल मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने पास ही रखा था।
त्रिवेदी राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ वर्षो से लड़ रहे हैं। उन्होंने कई जनहित याचिकाएं दायर की। वोहरा कमेटी की वजह से ही सूचना का अधिकार कानून बन सका। यह समिति त्रिवेदी की कोर्ट में दायर याचिका की वजह से ही गठित की गई थी।
अन्ना हजारे के पिछले साल पांच अप्रैल से जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया तो त्रिवेदी ने उन्हें पत्र भेजकर पद छोड़ने की इच्छा जताई थी।
वह अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल से भी जुड़े रहे। सामाजिक कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूती देने के लिए तैयार हैं।

राज्यसभा में दो बार चुने गए त्रिवेदी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में माकपा के हेवीवेट तारित टोपदार को बैरकपुर से हराया। 1990 में वे पहली बार राज्यसभा गए थे।
मूल रूप से कांग्रेसी त्रिवेदी वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल में शामिल हो गए थे।
त्रिवेदी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बी.कॉम, टेक्सास यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। पायलट का लाइसेंस भी हासिल किया।
वे भारत एवं विदेश में छात्रों के जुड़े मामले को सक्रियता से उठाते रहे। टेक्सास में भी वे अंतरराष्ट्रीय छात्रों की एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे।

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