किसकी गलती- किसको सजा

संविधान बनाने का अधिकार लेकर संविधान सभा पहुँचे सभासद व राजनीतिक दल सत्ता के ही खींचातानी में अधिक व्यस्त रहे । नए संविधान में रखे जाना वाला कई विषय अभी भी विवादों के घेरे में जिसे सुलझाने के लिए कई समितियाँ और उपसमितियाँ बनी लेकिन राजनीतिक दलों का ध्यान सत्ता परिवर्तन में अधिक लगा रहता है । सभासदों का भी ध्यान संविधान बनाने पर उतना नहीं रहता, जितना विदेश घूमने, पाँच सितारा होटलों में आयोजित कार्यक्रमों में जाने आईएनजीओ के पैसे पर लैपटाप लेकर गाडी पर चढकर घूमने व हर महीने दो महीने विदेश भ्रमण करने में ही उनका समय व्यतीत होता है । संविधान सभा के लिए तय किए गए समय दो वर्षमें संविधान नहीं बनने पर फिर से १ वर्षके लिए संविधान सभा का कार्यकाल बढाया गया था । लेकिन यह दर्ुभाग्य है कि इस बढे हुए समय में २ महीना सरकार परिवर्तन करने में, ७ महीना नई सरकार गठन में और बाँकी के तीन महीना सरकार को पर्ूण्ाता देने में ही व्यतीत हो गया ।

इस दौरान संविधान सभा की बैठक सिर्फ९१ मिनट ही चल पाई । संविधान बनाने के अपने एजेण्डे को भूलकर सभासद सत्ता के र्इद गिर्द ही घूमते नजर आए । दलों के बडे नेता बैठकों में सक्रिय दिखे तो बाँकी सभासद संविधान सभा में बेरोजगार ही दिखे । इस विषय पर हमने अधिकांश दलों के सभासद को पूछा कि समय पर संविधान नहीं बनने के लिए क्यों नहीं आप को सजा दी जाए और क्यों फिर से संविधान सभा की समय सीमा को बर्ढाई जाई जबकि जनता यह अच्छी तरह से जानती है कि इस बढेÞ हुए समयावधि में संविधान निर्माण का काम पूरा नहीं हो सकता है ।

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