कुछ घटनाएं और व्यक्तित्व

एमाओवादी और एमाले में विभाजन
विघटित संविधानसभा में सबसे बडÞी पार्टर्ीीे रुप में रही एकीकृत नेकपा माओवादी इसी साल विभाजन की शिकार बनी। जिसका पहला कारण रहा- नेताओं के बीच सत्ता के बार्गेनिङ में मतभेद होना। लेकिन पार्टर्ीीवभाजन करनेवाले मोहन वैद्य पक्ष ने प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टर्राई तथा पार्टर्ीीध्यक्ष प्रचण्ड में सैद्धान्तिक विचलन आने का दावा किया है। उसीतरह पार्टर्ीीेतृत्व भ्रष्टाचार में लिप्त होना, राष्ट्रियता कमजोर बनाना भी पार्टर्ीीवभाजन होने के कारण है, ऐसा वैद्य पक्ष का कहना है। ऐसे ही कुछ आरोप लगाते हुए वैद्य पक्ष ने गत आषाढ ३ में करिब ९० पर्ूवसभासद को लेकर पार्टर्ीीो विभाजन किया है। पार्टर्ीीवभाजन के बाद बाबुराम भट्टर्राई को सत्ता से हटाने के लिए वैद्य पक्ष नेपाली कांग्रेस के साथ कार्यगत एकता करने के लिए भी राजी हो गया। सिद्धान्त और विचार में दो धु्रव में दिखनेवाले वैद्य माओवादी और कांग्रेस बीच के इस मिलन पर बहुतो नें व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की है।
इसी तरह संविधानसभा विघटन के मुख्य दोषी नेकपा एमाले को मानकर उसी पार्टर्ीीें उपाध्यक्ष रहे अशोक र्राई ने भी मार्ग ७ गते औपचारिक रुप में एमाले को विभाजन किया है। विशेषतः जनजाति नेताओं को समेटकर उन्होंने अलग ही ‘संघीय समाजवादी पार्टर्ीीनामक नया दल गठन तो किया, लेकिन उसमें कुछ जनजाति ही असन्तुष्ट होकर सम्मिलित नहीं हुए। अशोक र्राई के नेतृत्व में सम्मिलित नहीं होनेवालों ने पौष १५ गते ‘सामाजिक लोकतान्त्रिक’ नामक नई पार्टर्ीीा गठन किया है ।
कांग्रेस के भीतर त्रिपक्षीय द्वन्द्व
जब डा. बाबुराम भट्टर्राई को हटाकर नयी सरकार बनाने की बात चलती थी, तब नेपाली कांग्रेस के भीतर भूचाल पैदा होता था। भावी प्रधानमन्त्री किस को बनाया जाए -, इस विषय को लेकर कांग्रेस के भीतर पहले पार्टर्ीीपसभापति रामचन्द्र पौडेल और वरिष्ठ शेरबहादुर देउवा के बीच द्वन्द्व होता था, लेकिन बाद में उस द्वन्द्व में पार्टर्ीीभापति सुशील कोइराला भी सामिल हुए। यद्यपि मार्ग ८ गते राष्ट्रपति ने जब औपचारिक रुप में सरकार गठन के लिए आहृवान किया, तब कांग्रेस ने सभापति कोइराला को औपचारिक रुप में प्रधानमन्त्री का उम्मीदवार घोषित किया। लेकिन कुछ विश्लेषक तो कांग्रेस के इस निर्ण्र्ााको इस तरह मानते है- जब देउवा और पौडेल दोनों ने कांग्रेस नेतृत्व में सरकार गठन सम्भव नहीं होने का महसूस किया तो उन्होंने सभापति कोइराला को बेवकूफ बनाने के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसी तरह पार्टर्ीीे पदाधिकारी नियुक्ति और भातृ संगठन विस्तार को लोकर तो सभापति कोइराला और देउवा के बीच लम्बे समय तक विवाद खिंचता चला गया।
कुछ नेता चले जेल
किसी कालखण्ड में पार्टर्ीीे भीतर मजबूत राजनीतिक स्तम्भ कहलानेवाले कुछ नेता इस साल भ्रष्टाचारी साबित होकर जेल के हवा खा रहे हैं। मन्त्री पद में रहकर गैरकानूनी आर्थिक लाभ प्राप्त करने के आरोप में जेल जानेवालो में सभी की पृष्ठभूमि नेपाली कांग्रेस सम्वद्ध है। कुछ नेता तो आपराधिक काण्ड में संलग्न होने के कारण भी जेल गए है। इस तरह जेल जानेवालों में मधेशी जनअधिकार फोरम गणतान्त्रिक के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी गुप्ता, कांग्रेस नेता खुमबहादुर खड्का और गोविन्दराज जोशी तथा सद्भावना के श्यामसुन्दर गुप्ता आदि हैं।
मन्त्री पद में रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जानेवाले सिर्फजेपी गुप्ता हैं। अन्य सभी पर्ूवमन्त्री थे। संभवत पद में रहते जेल जानेवाले पहले मन्त्री हैं- जेपी गुप्ता। मधेशी जनअधिकार फोरम गणतान्त्रिक के अध्यक्ष और सूचना तथा सञ्चार मन्त्री गुप्ता को फागुन ९ गते सर्वोच्च अदालत ने भ्रष्टाचारी करार दिया था। मन्त्री पद में रहते समय उन्होंने आर्थिक दुरुपयोग किया, ऐसा आरोप है। लेकिन गुप्ता इसे अस्वीकार करते हैं। सर्वोच्च अदालत के फैसला को उन्हों मधेश, नेपाली राजनीति और अपने विरुद्ध षड्यन्त्र होने का दावा किया है। यद्यपि सर्वोच्च के फैसला का सम्मान करते हुए उन्होंने अदालत में ही आत्मर्समर्पण किया था।
इसीतरह नेपाली कांग्रेस के नेता खुमबहादुर खड्का और गोविन्दराज जोशी भी भ्रष्टाचारी घोषित हुए है। ये दोनों नेता एक समय में नेपाली कांग्रेस के भीतर शक्तिशाली माने जाते थे। सर्वोच्च अदालत ने खड्का को श्रावण २९ गते भ्रष्टाचारी घोषित करते हुए जेल सजाय सुनाया था। और जोशी को विशेष अदालत ने श्रावण १० गते भ्रष्टाचारी ठहराया था। इसीतरह अपहरण और फिरौती जैसे आपराधिक गतिविधि में संलग्न रहने के आरोप में नेपाल सद्भावना पार्टर्ीीानन्दीदेवी के अध्यक्ष एवं पर्ूवमन्त्री श्यामसुन्दर गुप्ता को भी विशेष अदालत ने जेल सजाय सुनाया है। गुप्ता पर व्यापारी पवन संर्घाई को अपहरण करने का ओरोप है। इसीतरह पर्ूवमन्त्री रवीन्द्रनाथ शर्मा भी इसी साल भ्रष्टाचारी घोषित हुए हैं। उन को आश्विन १७ गते विशेष अदालत ने भ्रष्टाचारी ठहरा था। लेकिन शर्मा इस दुनियाँ में नहीं है। अदालत ने उनको मृत्यु के बाद भ्रष्टाचारी ठहरा है।
सरिता गिरी
श्रम मन्त्री रहे सद्भावना पार्टर्ीीनन्दीदेवी की नेतृ सरिता गिरी को प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टर्राई ने चैत्र १० गते बर्खास्त किया। प्रधानमन्त्री ने मन्त्री गिरी के ऊपर आर्थिक अनियमितता में वैदेशिक रोजगार के महानिर्देशक पर्ूण्ाचन्द्र भट्टर्राई को तबदला करने का आरोप लगाया था। इस विषय में पहले स्पष्टीकरण भी लिया गया था। उसके बाद प्रधानमन्त्री ने स्पष्टीकरण सन्तोषजनक नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन को बर्खास्त किया था। लेकिन इधर गिरी ने बताया था कि वैदेशिक रोजगार में जानेवाले के पक्ष में काम करने के कारण मुझे बर्खास्त किया गया है। साथ में गिरी ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रधानमन्त्री खुद आर्थिक अनियमितता में संलग्न है।
नन्दन दत्त
सरिता गिरी को बर्खास्त किए जाने के तीसरे दिन दूसरे मधेशी मन्त्री को भी प्रधानमन्त्री का शिकार बनना पडÞा। कृषि मन्त्री रहे नन्दनकुमार दत्त को उन की ही पार्टर्ीीधेशी जनअधिकार फोरम गणतान्त्रिक के कुछ नेताओं ने हटाने के लिए सिफारिस करने पर दत्त को चैत्र १३ गते बर्खास्त किया गया था। उस समय प्रधानमन्त्री ने तो दत्त के ऊपर खाद खरिदकाण्ड में अनिमियता होने का आरोप भी लगाया था। विशेषतः सञ्चार मन्त्री रहे राजकिशोर यादव के साथ दत्त का मनमुटाव रहा था, उसी के चलते उन्हें मन्त्री पद से हाथ धोना पडÞा। पद से बर्खास्त होने के बाद फोरम गणतान्त्रिक के बहुमत नेता अपने पक्ष में रहने का दावा करते हुए दत्त ने सञ्चारमन्त्री राजकिशोर यादव को पद से हटाने कि लिए प्रधानमन्त्री को दबाव दिया और सडÞक संर्घष्ा की चेतावनी दी। लेकिन प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टर्राई ने अनसुना कर दिया।
दत्त अभी राजकिशोर नेतृत्व में रहे फोरम गणतन्त्रक में नहीं है। यद्यपि दत्त दावी करते हैं कि फोरम गणतान्त्रिक का आधिकारिक नेता तथा कार्यवाहक अध्यक्ष मैं ही हूँ। दत्त पक्ष कुछ नेताओं ने असाढÞ १७ गते सूचना तथा सञ्चार मन्त्री एवं पार्टर्ीीार्यबाहक अध्यक्ष राजकिशोर यादव को पार्टर्ीीे बर्खास्त करने की घोषणा भी की। लेकिन इधर मन्त्री यादव ने वीरगन्ज में पार्टर्ीीहाधिवेशन करके फोरम गणतान्त्रिक के अध्यक्ष में अपने को निर्वाचित कर लिया है।
शक्ति में राजकिशोर !
वैसे तो जेपी गुप्ता जेल जाने से पहले राजकिशोर यादव को कम ही लोग नेता के रुप में पहचानते थे। जब मधेशी जनअधिकार फोरम के तत्कालीन अध्यक्ष तथा सूचना तथा सञ्चार मन्त्री गुप्ता को जेल की सजा हर्ुइ, तब राजकिशोर रातों रात चर्चा में आए। इसके चलते वे सिर्फमन्त्री ही नहीं हुए, पार्टर्ीीहाधिवेशन करवा कर अपने को अध्यक्ष पद में निर्वाचित करने में भी सफल रहे। वीरगंज में हुए पार्टर्ीीहाधिवेशन उद्घाटन के क्रम में मन्त्री यादव ने मधेश और मधेशी के विरुद्ध बोलनेवालों को गोली से उडÞा देंगे कहकर उत्तेजक भाषण भी दिया था।
जेपी जेल से बाहर आने से पहले ही किया गया इस महाधिवेशन को विश्लेषण करते हुए कुछ लोगों ने कहा है- यह महाधिवेशन यादव की पार्टर्ीीध्यक्ष बनने की महत्वाकांक्षा के सिवाय और कुछ नहीं है। साथ में कुछ मधेशी पत्रकार भी कहते हैै कि सञ्चार मन्त्री होकर भी तर्राई के सञ्चार क्षेत्र में विकास के लिए उन्होंने कुछ भी योगदान नहीं दिया है, वह तो सिर्फमाओवादी के पीछे भागते रहते हैं।
उपेन्द्र का बृहत मधेशी मोर्चा
संयुक्त मधेशी मोर्चा से अलग रहनेवाले मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव भी इस साल मधेश की राजनीति में चर्चा में रहे। बाबुराम भट्टर्राई नेतृत्व के सरकार में सहभागी होने का प्रयास तो किया लेकिन मनचाहा मन्त्रालय न मिलने के कारण उन्होंने सरकारको दिया गया र्समर्थन भी वापस ले लिया। यादव सरकार में सामेल नहीं होने का दूसरा कारण भी था- उनके दुश्मन मानेजानेवाले मधेशी मोर्चा में आवद्ध कुछ नेता सरकार में सहभागी थे। पौष २४ गते सरकार को दिया गया र्समर्थन वापस लेने के बाद उन्होंने कहा- ‘सरकार इतिहास में भ्रष्ट, नालायक और असफल सिद्ध हर्ुइ है। उसके बाद उन्होंने अलग ही वृहत्त मधेशी मोर्चा का गठन किया। उस सयम उन्होंने कहा- मधेशी मोर्चा मधेश के मुद्दे से विल्कुल अलग हो गए है। उसके बाद यादव ने सरकार और मोर्चा के विरुद्ध सडÞक आन्दोलन की भी घोषणा की। बैशाख २४ से जेठ ६ गते तक के लिए घोषित सडÞक आन्दोलन ने मधेशी मोर्चा और सरकार पर कुछ भी असर नहीं पडÞा। साथ में उन्होंने विभिन्न छोटे-मोटे जनजाति दल के साथ मिलकर अलग ही मोर्चा बनाने का प्रयास भी किया और मधेशी दलों के बीच एकीकरण करने का हौवा भी खडÞा किया।
भण्डारी की नयी पार्टर्ीीएक र्सार्वजनिक कार्यक्रम में तर्राई के २२ जिला अलग होकर नया राज्य भी बन सकता है’, कहकर विवादास्पद अभिव्यक्ति देनेवाले मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक के नेता तथा तत्कालीन रक्षा मन्त्री शरदसिंह भण्डारी भी इस साल सर्ुर्खियों में रहनेवालों में से एक हैं। अपने अभिव्यक्ति के कारण ही मन्त्री पद से हाथ धोने के लिए बाध्य भण्डारी का सम्वन्ध पार्टर्ीीध्यक्ष विजयकुमार गच्छदार के साथ भी अच्छा नहीं रहा। जब भण्डारी को राष्ट्रिय अखण्डता के विरुद्ध अभियोग लगाकर मन्त्री पद से बर्खास्त किया गया, गृहमन्त्री तथा उपप्रधानमन्त्री रहे पार्टर्ीीध्यक्ष गच्छदार ने खुलकर उन का साथ नहीं दिया। जिस के कारण भण्डारी ने आषाढ १३ गते कुछ सभासदों को लेकर ‘मधेश समाजवादी’ नामक नयी पार्टर्ीीा गठन किया।
निर्रथक चर्चा
तर्राई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टर्ीीे अध्यक्ष महन्थ ठाकुर साल भर तो चर्चा में नहीं आए। लेकिन जब-जब सहमतीय सरकार गठन की बहस तीव्र होती थी, तब तब उनका नाम भी आ जाता था। पिछली बार राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने मार्ग ८ गते जब सहमतीय सरकार गठन के लिए लिखित आग्रह किया, अध्यक्ष ठाकुर कुछ ज्यादा ही चर्चा में आए। लेकिन अभी तक उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है और बनने की सम्भावना भी नहीं दिखती।
प्रचण्ड और नया घर
नेपाली नेताओं में से सबसे ज्यादा शक्तिशाली रहनेवाले एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड इस साल व्यक्तिगत रुप में विभिन्न घटनाओं में चर्चित तो रहे ही, इसके अलावा उनका निवास भी चर्चा में रहा। जब वे नया बजारस्थित खुसिबु टाउन प्लानिङ से लाजिम्पाटस्थित सुविधासम्पन्न नये मकान में माघ ४ गते आए थे, तब उनके आलोचक दलों के अलावा अपनी ही पार्टर्ीीार्यकर्ताओं ने भी उनपर अंगुली उर्ठाई थी। यहाँ तक कि कार्यकर्ता के आगे प्रचण्ड को उक्त मकान छोडÞने की घोषणा भी करनी पडÞी। लेकिन मासिक १ लाख ३० हजार किराए के उक्त मकान को अभी तक उन्होंने खाली नहीं किया है।
इसी तरह अपनी कथनी और करनी में कभी तालमेल न बैठानेवाले नेता के रुप में भी वे चर्चित रहे। कभी जातीय पहचान सहित का संविधान बनाने के मामले में तो कभी जातीय पहचान के विरोध में वे वकालत करते दिखाइ दिए। इसी तरह कभी संविधानसभा पुनर्स्थापना करने की बात करते हैं तो कभी नये निर्वाचन में जाने की। एक बार नये निर्वाचन में जाने के लिए औपचारिक फैसला कर चुके प्रचण्ड फिर पिछली बार संविधानसभा पुनर्स्थापना की रट लगा रहे हैं।
इसीतरह पार्टर्ीीे अन्दर आर्थिक पारदर्शिता के सवाल पर वे अपनी ही पार्टर्ीीे कार्यकर्ता तथा पर्ूव लडाकुओं ने उन को नाकोदम कर रखा है। सत्ता सञ्चालन और नेताओं की सम्पत्ति के सवाल को लेकर श्रावण २ गते से राजधानी में शुरु हर्ुइ एमाओवादी के सातवें विस्तारित बैठक में कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष प्रचण्ड और प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम के ऊपर कर्ुर्सर्ीीmेंकी। कार्यकर्ताओं के द्वारा नेतृत्व के विरुद्ध कडÞी आलोचना किए जाने पर माओवादी ने उसी रणमैदान से पार्टर्ीीहाधिवेशन कराने की घोषणा की। महाधिवेशन आगामी माघ २० गते से हेटौडÞा में होने जा रहा है।
नेताओं के ऊपर आक्रमण
इसी साल एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड और नेपाली कांग्रेस के सभापति सुशील कोइराला के ऊपर अपने ही कार्यकर्ताओं के द्वारा आक्रमण हुआ। विघटित संविधानसभा में सबसे बडेÞ दल के रुप में रहे एमाओवादी अध्यक्ष तथा पर्ूवप्रधानमन्त्री प्रचण्ड के ऊपर गत मार्ग १ गते बागलुङ के पार्टर्ीीार्यकर्ता पदम कुँवर ने आक्रमण किया था। उसी तरह संसद में दूसरे बडेÞ दल के रुप में रहे नेपाली कांग्रेस के सभापति सुशील कोइराला के ऊपर भी पार्टर्ीीार्यकर्ता प्रवेश बस्नेत ने आश्विन १३ गते आक्रमण किया था।
चर्चा में आने का यह भी तरीका
संघीयता विरोधी नेता के रुप में परिचित चित्रबहादुर केसी भी इस साल में चर्चे में रहे। संघीयता विरुद्ध नारा लगाना उनकी आदत तो थी ही, इसके अलवा संघीयता के विरुद्ध में रहने के कारण अपनी जान खतरमें है, यह कहते हुए वे मीडिया में छाये रहे। विशेषतः अपने को तर्राई में सशस्त्र संर्घष्ारत भूमिगत संगठन ज्वाला सिंह के कमाण्डर बतानेवाले एक व्यक्ति द्वारा ७७७७ टेलिफोन नम्बर के तहत अपने को मारने की धम्की देने की बात सुनाते रहे।
इसी तरह राप्रपा नेपाल के अध्यक्ष कमल थापा ने भी संघीयता और धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध में तथा राजतन्त्र के पक्ष में बोलकर सर्ुर्खीया बटोरीं। वही थापा पिछली बार मार्ग २ से ११ गते तक  नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए धार्मिक रथयात्रा करके चर्चा में रहे।
नहीं रहे ये नेता
इसी वर्षनेपाली राजनीति के आदर्श व्यक्ति कहलानेवाले कुछ नेताओं को भी राष्ट्र ने गंवा दिया। जिस में नवजनवादी मोर्चा के अध्यक्ष रामराजाप्रसाद सिंह और नेपाली कांग्रेस के भीमबहादुर तामाङ हैं।
प्रथम गणतन्त्रवादी नेता के रुप में परिचित नवजनवादी मोर्चा के अध्यक्ष रामराजाप्रसाद सिंह ७७ वर्षकी उम्र में भाद्र २७ गते दिवंगत हुए। नेपाल में गणतन्त्र का सवाल उठानेवाले और २०४२ साल में हुए बमकाण्ड में संलग्न सिंह को पञ्चायती सरकार ने मृत्युदण्ड की सजाय भी सुनाई थी। उसके बाद भारत में निर्वासित जीवन बितानेवाले सिंह को वि.सं २०४६ साल के जनआन्दोलन पश्चात् आममाफी दी गई। उसके बाद ०५१ साल में नेपाल आकर सिंह फिर राजनीति में सक्रिय रहे। उन को एकीकृत नेकपा माओवादी ने प्रथम राष्ट्रपति के रुप में उम्मीदवार भी बनाया था। लेकिन वे वर्तमान राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव से सिंह पराजित हुए थे।
इसी तरह राजनीति को सम्पत्ति और शक्ति के साधन के रुप में समझनेवाले आज के वर्तमान राजनीतिज्ञों को आदर्श की शिक्षा देनेवाले व्यक्तित्व भीमबहादुर तामाङ भी मार्ग १६ गते दिवंगत हो गए। नेपाली कांग्रेस में रहकर लम्बे समय तक स्वच्छ राजनीति करनेवाले तामाङ, नेपाली कांग्रेस के भीतर ही नहीं, बाहरी जगत मंे भी अनुकरणीय व्यक्तित्व के रुप में चर्चित थे।
प्रकाश बने नवयुवराज
एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड के पुत्र प्रकाश दाहाल को इस साल बहुत सञ्चार माध्यमों ने पर्ूवयुवाराज पारस शाह की तरह नवयुवराज के रुप में चित्रित किया है। प्रकाश द्वारा सरस्वती क्याम्पस के स्ववियु सभापति विना मगर के साथ तीसरी वीवी के रुप में शादी करने पर व्यंग्य करते हुए उन को इस रुप में प्रचारित किया। आषाढÞ २० गते विना को भगाकर प्रकाश भारत ले गया था, हांलाकि वह भी विवाहित थी। इस घटना के कारण एमाओवादी के अध्यक्ष प्रचण्ड और उनके परिवार भी गहरे मानसिक तनाव में रहे। सगरमाथा आरोहण के क्रम में घनिष्ठ सम्बन्ध होने के बाद प्रकाश और विना परिणय सूत्र में बंध गए। यद्यपि दोनों शादीसुदा थे। अभी एमाओवादी पार्टर्ीीे उन दोनों को पद से निलम्बित कर दिया है। बताया जा रहा है कि वे दोनों अभी भी भारतीय शहर दिल्ली में ही हैं। यही प्रकाश जब सगरमाथा आरोहण की तैयारी कर रहा था, तो इसके लिए उसने अपने पिता और पार्टर्ीीी शक्ति दुरुपयोग करके सरकार की तरफ से दो करोडÞ रुपैया भी प्राप्त कर लिया था, पर बहुत आलोचित होने के बाद उसने प्राप्त रकम वापस कर दिया था।
परशुराम की पदोन्नति
नेकपा एमाले के भातृ संगठन युवा संघ के मोरङ अध्यक्ष परशुराम बस्नेत भी इस वर्षचर्चे में रहे। उन्होंने जेष्ठ २२ गते विराटनगर के पत्रकार खिलानाथ ढकाल के ऊपर जानलेवा हमला किया था। उसी आरोप में उन्हें प्रहरी ने बहुत ढूढा लेकिन वे पकडÞ में नहीं आए। विराटनगर क्षेत्र में गुण्डागर्दी के नायक कहलानेवाले उनको नेकपा एमाले के नेता केपी ओली और युवासंघ के अध्यक्ष महेश बस्नेत ने संरक्षण दे रखने की बात बताई जा रही है। अध्यक्ष बस्नेत ने तो कहा भी था कि परशुराम बस्नेत मेरे ही पास है। ताकत है तो पुलिस प्रशासन उसे पकडÞकर दिखा दे। ऐसे बस्नेत को गत श्रावण १३ गते एमाले ने संघ के केन्द्रिय सदस्य के रुप में पदोन्नति की।
न्यायाधीश की हत्या
इतिहास में पहली बार र्सवाेच्च अदालत के कार्यरत स्थायी न्यायाधीश की हत्या इसी साल हर्ुइ। न्यायाधीश रणबहादुर बम को जेष्ठ १८ गते शंखमूलस्थित यूएन पार्क के आगे गोली मार कर हत्या की गई थी। बम के शरीर में कूल ६ गोलियां लगी थी। गम्भीर फौजदारी मुद्दा के अभियोगी को धरौटी में छोडÞने के अरोप में न्यायाधीश बम डेढÞ वर्षसे निलम्बित थे।
इस घटना के तीन महिने पहले फागुन १५ गते भी देश के प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र सिंहदरबार के आगे रहे नेपाल आयल निगम कम्पाउण्ड में बम विस्फोट हुआ था। उस घटना में तीन र्सार्वसाधारण की मौत हर्ुइ थी। इन दो घटनाओं ने सिर्फसरकार की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती ही नहीं दी, अपितु हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है, इस ओर भी संकेत किया।
जनकपुर में विस्फोट
इसी साल तर्राई के महत्वपर्ूण्ा धार्मिक क्षेत्र मानेजाने वाले जनकपुरधाम में बम विस्फोट हुआ, जहाँ आधा दर्जन व्यक्तियों ने अपने प्राण गंवाए। मिथिला राज्य संर्घष्ा समिति के आहृवान में मिथिला प्रदेश की मांग करते हुए कुछ लोग धर्ना और पर््रदर्शन में बैठे थे, वहीं पर बैशाख १८ गते बम विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट जनकपुर के इतिहास में ही सबसे बडÞा होने का दावा किया गया था। कुछ ने तो इस घटना में पुलिस प्रशासन की मिलिभगत होने का दावा भी किया है।
रक्षक ही भक्षक
सुरक्षा विभाग के उच्च तह से सम्बन्ध रखनेवाले भी आपराधिक कायोर्ं में संलग्न होते दिखाइ दिए। सशस्त्र प्रहरी बल के डिआइजी रहे रञ्जन कोइराला ने अपनी ही श्रीमती गीता ढकाल को पौष २७ गते को निर्ममतापर्ूवक हत्या की। हत्या अभियोग में माघ ८ गते पकडेÞजाने के बाद उन्होंने अपना अपाराध स्वीकार किया। अभियोग स्वीकार करते हुए वे जेल जीवन बिता रहे हैं। चीन में सुरक्षा सम्बन्धी तालीम ले रहे डीआइजी कोइराला ने नेपाल आकर श्रीमती ढकाल की हत्या किया था ।
पुष्पा बनी “सीएनएन हीरो”
सामाजिक सेवारत २९ वषर्ीया सुश्री पुष्पा बस्नेत भी इस बार चर्चे में रहीं। अमेरिका स्थित सीएनएन सञ्चार संस्था द्वारा सामाजिक क्षेत्रों में काम करनेवालों को हर साल दिए जानेवाला यह अवार्ड -सीएनएन हीरो २०१२) नेपाली नागरिक पुष्पा को दिया गया। जेल जीवन यापन कर रहे कैदियों के बच्चों को परवरिस और शिक्षा देनेवाली ममत मयी और साहसी युवती है, पुष्पा। दूसरे शब्दों में कहें तो उन बच्चों के लिए पुष्पा ही माँ है।

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