कुरीति जन्य महिला विरुद्ध के हिंसा उन्मूलन में सरोकारी की भूमिका विषयक गोष्ठी संपन्न

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विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’, काठमांडू, ८ दिसिम्बर | महिला विरुद्ध हिंसा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस तथा लैंगिक हिंसा विरुद्ध के १६ दिवसीय अभियान के अवसर पर अगहन २१ गते कुरीति जन्य महिला विरुद्ध के हिंसा उन्मूलन में सरोकारी की भूमिका विषयक एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
गोष्ठी में हिन्दी केन्द्रीय विभाग के अध्यापक विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’ ने ‘महिला हिंसा की दुरावस्था’ और सोच नेपाल के अधिकारी दामोदर पुड़ासैनी ने ‘कुरीती जन्य हिंसा’ विषयक आलेख प्रस्तुत किया था । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य सुदीप पाठक ने कहा कि हिंसा रोकने के लिए हम सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए । और हिंसा रोकने के लिए इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए, तभी हिंसा रुक सकती है । कहा कि नारी ईश्वर का वरदान है, नारी में अधिक शक्ति है, उसकी महत्ता को किसी भी समाज में नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि उसका समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान है ।
सांसद छाया शर्मा पन्त ने महिला हिंसा सम्बन्धित जानकारी प्राथमिक कक्षाओं के पाठ्क्रम में रखने पर हिंसा में कमी आने की जानकारी दी । नया शक्ति पार्टी के प्रवक्ता खिमलाल देवकोटा ने कहा, ‘नारी का उत्पीड़न करनेवाली सामाजिक परम्पराओं, मान्यताओं एवं सांस्कृतिक मानदंडों को बहिष्कार करने के बाद ही नारी के सफल व सुखमय जीवन का सपना साकार हो सकेगा ।’
हिमालिनी हिन्दी मासिक की सम्पादक डॉ श्वेता दीप्ति ने कहा कि समाज ने पुरुष और महिलाओं के लिए अलग–अलग मानक तय किए हैं । जब कोई पुरुष या महिला उस मानक को तोड़ते हैं, तो सहसा अजीब–सा महसूस होता है । महिलाएं यदि समाज के तय मानक से इतर विचार या व्यवहार करती हैं, तो पुरुषसतात्मक समाज हिंसा को हथियार बनाता है । उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं ही महिलाओं की हिंसा व उत्पीड़न की शिकार होती हैं । सांसद डॉ. डिम्पल झा ने कहा कि हिंसा दिन–प्रति–दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार मौन बैठी हुई है ।
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मौके पर विजयकान्त लाल कर्ण ने कहा कि महिलाओं के साथ यौन आधारित भेदभाव से तो हम सभी परिचित हैं, जबकि उनके साथ मानसिक और आर्थिक आधार पर जो भेदभाव होता है, उसके बारे में संवेदनशीलता बहुत कम ही देखने को मिलती है । हिंसा को रोकने के लिए सामाजिक आन्दोलन की आवश्यकता है ।
महिला तथा बालबालिका सेल की इन्सपेक्टर कोपिला चुड़ाल ने रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र न होना, पीडि़त महिलाओं को जानकारी की कमी तथा पीडि़त स्वयं थाने में उपस्थित न होने की वजह से संबंधित निकायों में कम रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी दी ।
सोच नेपाल की अध्यक्ष शान्ति गुरुङ ने कहा कि कुरीति जन्य हिंसा व उत्पीड़न की शिकार महिलाएं खुलकर सामने नहीं आती । इसका लाभ असामाजिक तत्व उठाते हैं । इसके लिए यह जरुरी है कि कुरीति जन्य हिंसा को उन्मूलन के लिए आज से ही संकल्प करें । राष्ट्रीय जनचेतना तथा विकास समाज की अध्यक्ष रेखा यादव ने कहा, ‘देश में शिक्षा व जागरुकता बढ़ने के साथ ही महिलाओं का स्थिति पहले से बेहतर हुई है । उनकी सुरक्षा व सम्मान से जुड़े कई नये कानूनों को हाल के कुछ वर्षों में लागू किया गया है । इसके बावजूद लोग जाने–अनजाने में कुछ ऐसे हाव–भाव, व्यवहार व्यक्त कर ही देते हैं, जो महिलाओं के प्रति भेदभाव को दर्शाते हैं ।
मौके पर मा. श्रवण कुमार अग्रवाल, मा. डि.वी., नेपाली, मा. राधा तिमल्सिना, संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की केन्द्रीय सदस्य सुशीला श्रेष्ठ, सीमा सिंह एवं महेन्द्र प्रधान, सद्भावना पार्टी के केन्द्रीय सदस्य योगेन्द्र राय यादव एवं राधा कायस्थ, मधेशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष मोहन सिंह लगायत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं संचार कर्मियों की उपस्थिति थी ।
कार्यक्रम राष्ट्रीय जनचेतना तथा विकास समाज द्वारा बानेश्वर स्थित मसला कटेज में आयोजन किया गया था । कार्यक्रम की अध्यक्षता रेखा यादव ने की तथा संचालन विनोदकुमार विश्वकर्मा ने किया ।
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