कू की साजिश में शामिल नेता

माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड के द्वारा राष्ट्रपति के विवादास्पद बयानों को लेकर दिए एक बयान ने राष्ट्रपति के रातों की नींद उडा दी थी। हमेशा राजनीतिक दलों को चुनाव कराने की नसीहत देने वाले राष्ट्रपति के बयानो का जवाब देते हुए जैसे ही प्रचण्डÞ ने राष्ट्रपति के भी चुनाव की बात कही वैसे ही उनके पैरों तले जमीन खिसकना स्वाभाविक था। दरअसल राष्ट्रपति को अभी तक यह गलतफहमी थी कि संविधान सभा का चुनाव सिर्फसभासदों के लिए होना है और उनकी कर्ुर्सर्ीीगले ४-५ वषर्ाें के लिए फिर से सुरक्षित हो गई है। लेकिन वो शायद यह भूल गए कि जिस संविधान सभा के द्वारा उनका चयन किया गया था उसी संविधान सभा के गठन होने के बाद जब सरकार का अस्तित्व नहीं रहेगा तो वहीं से चुनकर आए राष्ट्रपति के अस्तित्व पर भी सवाल उठना लाजमी है। ऐसे में राष्ट्रपति के चुनाव की बात की शुरूआत इस बात का संकेत था कि यदि संविधान सभा का चुनाव हुआ तो पहले राष्ट्रपति का ही चुनाव होगा। और जिस तरीके से माओवादी-मधेशी गठबन्धन मजबूती के साथ आगे बढÞ रहा है ऐसे में रामवरण यादव का दुबारा राष्ट्रपति चुना जाना नामुमकिन ही है।
इसी के बाद राष्ट्रपति की सक्रियता अचानक बढ गई। प्रचण्ड के उस दिन के बयान के बाद रोज शाम को अंधेरे होने के बाद एक-एक नेताओं का शीतल निवास में जाना, घण्टों बातचीत करना, आम होने लगा। सबसे पहले राष्ट्रपति ने पर्ूव प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल को बुलाया था। संयोग से उसी दिन माओवादी अध्यक्ष ने भी माधव नेपाल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद माधव नेपाल माओवादी के प्रति नरम दिखाई दिए और सहमति जुटाने को लेकर अपनी तरफ से विशेष पहल करने का आश्वासन भी दिया। लेकिन उसी दिन देर शाम को जब राष्ट्रपति के यहां से बुलावा आया तो वहां से लौट कर बाहर निकले माधव कुमार नेपाल की बोली में साफ अन्तर दिख रहा था। वर्तमान सरकार के खिलाफ उनका बयान और राष्ट्रपति के द्वारा कदम उठाए जाने के पक्ष में बयान देकर माधव नेपाल ने शीतल निवास के भीतर हर्इ बातचीत का भाव बता दिया था।
इसके अगले ही दिन पहले नेपाली कांग्रेस के सभापति सुशील कोइराला और बाद में एमाले के अध्यक्ष झलनाथ खनाल को भी शीतल निवास में मिलने का आमंत्रण मिला। दोनों ही नेता ने वहां से निकल कर भट्टर्राई सरकार के तत्काल बहिर्गमन की बात कही। वैसे यह बात कोई नई नहीं थी। लेकिन उनके चेहरे पर एक तरह की चिन्ता भी साफ दिखाइ दे रही थी। इन दोनों नेताओं को भी इस बात का डÞर था कि यदि एक बार सत्ता राष्ट्रपति के हाथों में चली गई तो देश में निरंकुशता हावी हो सकती है। और इसके लिए कहीं ना कहीं उनको भी दोषी ठहराया जा सकता है। वैसे कहने के लिए तो नेपाली कांग्रेस और उससे भी अधिक एमाले के अध्यक्ष झलनाथ खनाल राष्ट्रपति के द्वारा कोई कदम उठाने के पक्ष में खुल कर आवाज उठाते हैं।
इसके ठीक एक दिन बाद अचानक उप-प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री विजय कुमार गच्छेदार को भी राष्ट्रपति भवन में आने को कहा जाता है। रात के अंधेरे में शीतल निवास में करीब एक घण्टे तक रहे मधेशी मोर्चा के नेता विजय कुमार गच्छेदार से सरकार परिवर्तन पर बात हर्ुइ। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार परिवर्तन का समय आ गया है और माओवादी सरकार को हटाने में मधेशी मोर्चा की अहम भूमिका हो सकती है। इसलिए मोर्चा को इसमें सहयोग देना चाहिए। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद गच्छेदार ने भी इस बात को कबूल किया कि राष्ट्रपति से सरकार परिवर्तन पर ही बातचीत हर्ुइ है और राष्ट्रपति ने सत्ता परिवर्तन पर गम्भीरता से विचार करने का आग्रह किया।
कांग्रेसी पृष्ठभूमि के रहे विजय कुमार गच्छेदार ने भी राष्ट्रपति को आश्वासन दिया कि यदि सभी दल सहमत होते हैं और उन्हें बाहर का सहयोग मिलता है तो मधेशी मोर्चा को सरकार से बाहर करने की वो भी कोशिश करेंगे। अब इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि राष्ट्रपति के साथ हुए इस मुलाकात के बाद मधेशी मोर्चा के अन्य नेताओं को इस बात की जानकारी दी गई या नहीं। क्योंकि यह खबर तैयार करने तक मोर्चा की बैठक दो बार विभिन्न कारणों से स्थगित कर दी गई और आर्श्चर्य की बात यह है कि इस मुलाकात के बाद तीन बार प्रमुख दलों की बैठक हो चुकी है। जिस में मोर्चा की तरफ से सिर्फविजय कुमार गच्छेदार और तर्राई मधेश लोकतांत्रिक पार्टर्ीीे अध्यक्ष महन्थ ठाकुर की ही उपस्थिति रही। गच्छेदार की ही तरह ठाकुर की भी कांग्रेसी पृष्ठभूमि होने के कारण इस बात की आशंका जताई जा रही है कि कहीं राष्ट्रपति के इस कदम में इन दोनों नेताओं का शह भी तो नहीं मिला है।

कैसे हर्इ कू की साजिश नाकाम

“कू” की साजिश रचते राष्ट्रपति

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कैसे हर्इ कू की तैयारी –

संविधान सभा विघटित होने के बाद से राजनीतिक दलों के द्वारा सहमति नहीं जुटा पाने के बाद से राष्ट्रपति कुछ अधिक ही सक्रिय हो गए हैं। उनके विवादास्पद बयान से खफा एकीकृत माओवादी के अध्यक्ष प्रचण्डÞ ने जैसे ही कहा कि चुनाव संविधान सभा से लेकर राष्ट्रपति तक का किया जाएगा वैसे ही राष्ट्रपति को भी अपनी कर्ुर्सर्ीीतरे में नजर आने लगी। तुरन्त ही उन्होंने कांग्रेस-एमाले के नेताओं को बुलाकर इस बारे में अपनी चिन्ता से अवगत कराया था। उधर प्रधानमंत्री ने भी राष्ट्रपति से साफ-साफ कह दिया था कि यदि उन्होंने अपने बयान पर लगाम नहीं लगाया तो अंजाम बुरा हो सकता है।
इन सबके बीच राष्ट्रपति के द्वारा वर्तमान सरकार को बर्खास्त करने का दबाब भी विपक्षी दलों के द्वारा लगातार दिया जा रहा था। कांग्रेस-एमाले के सभी बडÞे नेता राष्ट्रपति से मिल कर और अपने र्सार्वजनिक बयानों में भी भट्टर्राई सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते नजर आ रहे थे। माओवादी और मधेशी मोर्चा सरकार के विरोधी अन्य पार्टियां भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर इस बात के लिए दबाव बना रही थीं।
शायद राष्ट्रपति भी यही चाहते थे। इसलिए वे सरकार के धुर विरोधी रहे और निर्वाचन आयोग में मान्यता भी नहीं मिले दल मोहन वैद्य के नेकपा-माओवादी और शरद सिंह भण्डÞारी के राष्ट्रीय मधेश समाजवादी पार्टर्ीीे नेताओं को भी काफी तरजीह दे रहे थे। इतना ही नहीं जिन दलों का बहुत ज्यादा अस्तित्व नहीं है और जो वर्तमान माओवादी-मधेशी मोर्चा के गठबन्धन के खिलाफ थे, उन नेताओं को भी बार-बार शीतल निवास में बुलाकर राष्ट्रपति उनसे सलाह करते रहे। ऐसे ही नेताओं में नेपाल मजदूर किसान पार्टर्ीीे अध्यक्ष नारायणमान बिजुक्छे भी थे, जो राष्ट्रपति से मिलने के बाद खुल कर राष्ट्रपति शासन की बात करते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने तो दावा तक किया कि दिवाली छठ के बाद दलों के बीच सहमति नहीं हर्ुइ तो देश में राष्ट्रपति शासन लगना अनिवार्य है।
राष्ट्रपति डÞाँ यादव ने इस बारे में अपने निकट कानूनी सलाहकारों और संविधान विशेषज्ञों को भी बुलाकर राय जाननी चाही। और अन्तरिम संविधान की किस धारा और किस नियम के तहत वो भट्टर्राई सरकार को हटा सकते हैं और किस नियम के तहत वो सत्ता का बागडÞोर अपने हाथों में ले सकते हैं – राष्ट्रपति ने इसकी भी तैयारी कर रखी थी यदि उनके इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई तो उसके बाद कौन सा कदम उठाना है – देश में इसका विरोध हुआ तो उसका सामना कैसे करना है – पूरी कानूनी दांव पेंच के बाद ही कू की तैयारी में जुटे राष्ट्रपति की इस योजना को नेपाली सेना के प्रधान सेनापति और भारतीय राजदूत ने नाकाम कर दिया।
राष्ट्रपति यादव शायद काफी दिनों से इसी बात की जुगाडÞÞ बैठा रहे थे और उन्होंने इसकी प्लाँट काफी पहले से ही तैयार करनी शुरू कर दी थी।

 

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