कैलाली का कालासच

विनय दीक्षित,कैलाली÷ टिकापुर घटना से अधिकाँश लोग परिचित हैं ।

हर घटना के पीछे दो पहलू होते हैं एक वो जो हमें सामने दिखता है, दूसरा वह जो पर्दे के पीछे होता है । सच तो यह है कि राजनीति से प्रेरित कोई भी घटना अप्रत्याशित नहीं होती वह पूर्वनियोजित होती है । इस घटना को अगर आम जनता की ओर से देखा जाय तो नहीं लगता कि यह सोची समझी नीति थी किन्तु अगर सत्ता और राजनीत की ओर से देखा जाय तो लगता है कि कुछ तो है जो दिख नहीं रहा और वह निष्पक्ष जाँच करवाने पर ही पता चलेगा । सामाजिक सञ्जाल पर जिस हिसाब से आन्दोलन की खबर और तस्बीर शेयर की गई उससे अधिकाँश लोगों को लगा कि थारुओं ने अपनी मांग को लेकर पुलिस पर आक्रमण किया और पुलिसकर्मियों की हत्या हुई ।

 

आन्दोलन में सहभागी मनिषा चौधरी ने हिमालिनी से बातचीत में बताया कि पुलिस आन्दोलनकारियों से बदसलूकी कर रही थी । आन्दोलन में सहभागी युवतियों से छेड़छाड़ का प्रयास कर रही थी । इस बात को देखते ही आन्दोलनकारी आक्रमण पर उतर आए । मनिषा ने बताया पुसिकर्मियों के पास हथियार कम था, ज्यादा लोगों के पास लाठी ही थी और अश्रु गैस से ही आन्दोलन को दबाने की कोशिश की जा रही थी । देखते ही देखते आन्दोलनकारी और पुलिस के बीच खून की होली शुरु हो गई
सरकार भी वास्तविकता को परे रखकर घटना को दबाने के लिए राष्ट्रपति की बिना जानकारी सैनिक परिचालन का निर्देशन दिया और घटना के दूसरे दिन सैनिक दलबल टिकापुर पहुँच गए । प्रशासन ने आन्दोलन को दबाने के लिए पहले निषेधाज्ञा लगाया, थारुओं पर लाठी चार्ज किया, । लाठी चार्ज और अश्रु गैस के बावजूद १५ दिन से शान्तिपूर्ण आन्दोलन कर रहे थारु समुदाय ने अपने आन्दोलनको जारी रखा था । भाद्र ७ को मनुवा गाबिस, टिकापुर, कैलाली लगायत क्षेत्र के लोग भारी मात्रा में टिकापुर में पहुँचे । हरेक दिन की तरह घटना के दिन भी शान्तिपूर्ण रूप से जुलूस और नाराबाजी का कार्यक्रम था ।
आन्दोलन में सहभागी मनुवा निवासी सरोज चौधरी ने हिमालिनी को बताया कि स्थिति शान्तिपूर्ण रखने के लिए नेता कार्यकर्ता बार–बार आग्रह कर रहे थे । लेकिन पुलिस की अभद्रता को पिछले दिनों भी जनता झेल चुकी थी, लिहाजा बदले की आग अधिकाँश के मन में धधक रही थी ।
घरेलु हथियार सहित का प्रदर्शन भी शान्तिपूर्ण ही होता लेकिन पुलिस ने कुछ महिलाओं के साथ बदसलूकी की जिससे पूरा आन्दोलन उग्र हो गया । पुलिस ने लगातार अश्रु गैस, लाठी और रबर की गोलियाँ बरसाई । प्रतिवाद में उतरे आन्दोलनकारियों के हाथ में जो था उसी से उन्होंने आक्रमण कर दिया । चौधरी ने बताया कि पुलिस अभद्रतापूर्वक महिलाओं और पुरुषों को गाली देने लगे, आत्म सम्मान में ठेस पहुँचने वाली पुलिस की गालियों से जनता पहले भी आजिज थी लेकिन घटना के दिन पुलिस की संख्या भी ज्यादा होने के कारण पुलिस और भी उग्र रूप से प्रस्तुत हो रही थी ।

आन्दोलन में महिलाएँ युवा युवतियाँ भी भरपूर सहभागी

थे । वारदात स्थल पर मौजूद पत्रकार भावुक योगी ने बताया कि आन्दोलनकारी विभिन्न घरेलु हथियार सहित प्रदर्शन पर उतरे थे पुलिस अनावश्यक लाठीचार्ज अश्रु गैस नहीं छोड़ती तो घटना नहीं होती । आन्दोलन में सहभागी मनिषा चौधरी ने हिमालिनी से बातचीत में बताया कि पुलिस आन्दोलनकारियों से बदसलूकी कर रही थी । आन्दोलन में सहभागी युवतियों से छेड़छाड़ का प्रयास कर रही थी । इस बात को देखते ही आन्दोलनकारी आक्रमण पर उतर आए । मनिषा ने बताया पुसिकर्मियों के पास हथियार कम था, ज्यादा लोगों के पास लाठी ही थी और अश्रु गैस से ही आन्दोलन को दबाने की कोशिश की जा रही थी । देखते ही देखते आन्दोलनकारी और पुलिस के बीच खून की होली शुरु हो गई ।
घटना में और भी पुलिस मौजूद थे, मनिषा ने बताया कि आन्दोलनकारी चाहते तो किसी को बाकी नहीं छोड़ते लेकिन उन्होंने सिर्फ उनपर आक्रमण किया जो लोग प्रदर्शनकारियों से अभद्र व्यवहार कर रहे थे ।
कैलाली घटना के घायल प्रहरी हवलदार मकेन्द्र अधिकारी ने बताया कि टीकापुर घटना में एसएसपी लक्ष्मण न्यौपाने को जब आन्दोलनकारियों ने गम्भीर कर दिया तब उन्होंने गोली मारने का आदेश दिया । लेकिन आन्दोलनकारियों का कहना कि पुलिस ने पहले गोली चलायी और लोग आक्रमण पर उतर गए । अधिकारी ने बताया कि पुलिस के पास हथियार के नाम पर सिर्फ अश्रु गैस और प्लाष्टिक की गोली के अलावा कुछ नहीं था । नेपालगन्ज मेडिकल कालेज में उपचारार्थ अधिकारी ने बताया, आक्रमण नियोजित नहीं था लेकिन लोग क्यों इतना आक्रोशित हो गए यह बात हमारीे समझ में नहीं आई ।
धनगढी में तैनात पुलिसकर्मियों को १० दिन पहले टिकापुर भेजा गया था । भाद्र ७ गते दोपहर में जब आन्दोलन गम्भीर हुआ तब सभी पुलिसकर्मियों को टिकापुर रवाना किया गया । पास पड़ोस गाँव से आन्दोलनकारी टिकापुर में एकत्र हुए । सुबह ११ बजे से ही आन्दोलन जारी हो गया । नगर में विभिन्न घरेलु हथियार जैसे भाला, बल्लम, कुल्हाड़ी प्रदर्शन की पूर्व सूचना पुलिस को थी ।
आन्दोलन शान्तिपूर्ण करने की बात भी प्रशासन से तय थी और ११ बजे से १२ः५० तक आन्दोलन शान्तिपूर्ण भी रहा । आन्दोलन में प्रत्यक्ष सहभागी टिकापुर निवासी सुरेश चौधरी ने बताया हम लोग बीच में थे, हजारो लोग सड़क पर उतरे थे । नाराबाजी के साथ जोरशोर से प्रदर्शन चल रहा था । अचानक आगे से पीछे की ओर भगदड़ मची और हल्ला होने लगा पुलिस ने किसी महिला से छेडछाड की है । वह महिला कौन थी हल्ला कैसे हुआ यह समझने का समय नहीं मिला ।
छेड़छाड़ की खबर सुनते ही भीड उग्र हो गई । चौधरी ने कहा, पीछे के लोग आगे की ओर दौडेÞ और सभी के दिल में पुलिस और पहाड़ी लड़कों के विरुद्ध नफरत की आग सी फैल गई । वहाँ किसी ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि घटना सही थी या गलत, सबको अपनी आन बान और शान की परवाह होने लगी ।
भगदड़ मचते ही पुलिस ने सोचा लोगों को अब कब्जे में लिया जा सकता है लेकिन आन्दोलनकारी काफी ज्यादा थे । भगदड़ मचने के साथ उसमें अन्य समुदाय के लोग भी घुस गए । घटनास्थल पर काफी गहमा गहमी का माहोल बन गया । पुलिस आन्दोलनकारियों को (कमैया बस्ने जात) गुलामी करने वाली जाति कहकर गाली दे रही थी । एक छेड़छाड़ का मामला और दूसरा गाली गलौज और इससे पहले तोड़फोड़ आदि को लेकर मामला और भी बिगड़ गया, लोग हत्या हिंसा पर उतर आए ।
पुलिस ने गोलियाँ चलाई और आन्दोलनकारियों ने लाठी डण्डे तथा घरेलु हथियार चलाए । सुनने में आया आन्दोलनकारियों की तरफ तीन लोगों की जान गई हलाँकि प्रशासन ने आन्दोलनकारियों के हताहत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है और न इसकी पुष्टि हुई । पुलिस के तरफ एसएसपी लक्ष्मण न्यौपाने, पुलिस निरीक्षक बलराम विष्ट, केशव बोहोरा सशस्त्र प्रहरी हवलदार ललित साउद, राम विहारी थारु, प्रहरी हवलदार श्याम खड्का ललित चन्द, तथा २ वर्षीय बालक टेक बहादुर साउद की वारदात स्थल पर ही मौत हो गई । प्रहरी हवलदार जनक नेगी का काठमाण्डौ में उपचार के दौरान मौत हुई । घटना में कुल १४ पुलिसकर्मी घायल हुए । घायलों में प्रहरी नायव निरीक्षक रविन्द्र धनुषे, सशस्त्र प्रहरी सहायक हवलदार सम्शेरसिंह टमाटा और सशस्त्र प्रहरी हवलदार रबिन्द विक की स्थिति नाजुक बताई गई है । सभी का उपचार शिक्षण अस्पताल कोहलपुर में जारी है ।
भाद्र १०, सोमबार टीकापुर घटना में घायल नेपाल प्रहरी हवलदार जनक नेगी का उपचार के क्रम में काठमाडौं में निधन हो गया । इस प्रकार टिकापुर घटना में मरनेवालों की संख्या ८ पुलिस १ बालक सहित ९ पहुँच गई है ।
चितवन से कञ्चनपुर तक का भूभाग थरुहट अवध प्रदेश में मिलाने की माँग को लेकर आन्दोलन में आए थारु और मधेशी समुदाय का मिश्रित आन्दोलन विभिन्न स्थानो पर जारी था । बाँके में कोहलपुर, नेपालगन्ज, राप्तीपार क्षेत्र आन्दोलन से प्रभावित हुए । स्थानीय प्रशासन ने कोहलपुर और नेपालगन्ज क्षेत्र में पहले निषेधाज्ञा और फिर कर्फ्यु का आदेश जारी कर दिया ।
नेपालगन्ज में मधेशी नेता विजय गुप्ता, बद्रदुजा खाँ, ईस्तियाक राई तथा अजय श्रीवास्तव सहित कई सर्वसाधारण पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाई । घायलों का इलाज अभी भी जारी है । जिसमें अजय श्रीवास्तव की स्थिति ज्यादा खराब होने के कारण उन्हे लखनउ रिफर किया गया ।

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