कॉमरेड प्रचण्ड का साईकल प्रेम !

दुनिया चांद पर पहुँच गई और आप साईकल पर उतर आए

prachanda in bycycle

इमेज साभार गूगल

बिम्मी शर्मा:नेपाल कम्यूनिष्ट पार्टी एमाओवादी के सुप्रिमो पुष्पकमलदहाल उर्फ ‘प्रचण्ड’ का साईकल के प्रति प्रेम अचानक से उमड़ आया है

वाह१भईकमरेड प्रचण्ड आपका भीजन तो मान गए हमलोग । दुनिया चांद पर पहुँच गई और आप साईकल पर उतर आए । आप इतने ही काविल और अकड़ वाले नेता हैं तो अपने देशवासियों को तेल (पेट्रोल और डीजल) का विकल्प देते न ? पर नहीं आप तो साईकल पर उतर आए । इस से तो अच्छा होता आप बैल गाड़ी, ठेला गाड़ी और घोड़ा गाड़ी चढ़ने के लिए जनता को उकसाते । कम से कम वह देश में ही बना हुआ तो होता । पर आप तो खुद का और जनता का मनोवल गिरा रहे हैं ।
। यह देश प्रेम या साइकल प्रेम जब से देश में नयां नवेला संविधान दूल्हे की तरह सज धज कर जारी हुआ है । तब से नेताओं का देश प्रेम अचानक से बढ़ गया है । इस संविधान मे कोई टानिक छिपा हुआ है क्या ? जब से आया है नेताओं का देश प्रेम का बुखार १०५ डिग्री तक पहुंच गया है । डर हैं कि कहीं हमारे नेताओं को सन्निपात न हो जाए ?
इसी डर से वह संविधान से मधेश की जनता को बेदखल करना चाहते हैं । कहीं संविधान के अन्दर छिपी हुई टानिक को मधेश, मधेशी जनता और वहां के नेताओं ने खा लिया तो कहीं इनका खुद का ही पत्ता साफ न हो जाए । इसीलिए शायद संविधान में तराई मधेश शब्द रखने मे भी इनको परहेज था । संविधान को भारत द्वारा मान्यता न देने के कारण इन नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य अधर में लटका हुआ महसूस हो रहा है । इसलिए सब नींद में बड़बडा रहे हैं ।
जब से मधेश की समस्याओं पर राज्य द्धारा अनदेखा किए जाने के कारण पड़ोसी देश भारत रुष्ट हुआ है । तब से सब अटकलबाजी लगा रहे हैं कि भारत विरोधस्वरुप नेपाल में नाकाबन्दी करेगा । इसी के प्रतिक्रिया स्वरूप एमाओवादी के सुप्रिमो प्रचण्ड ने भारत द्वारा ईन्धन की आपूर्ति रोके जाने पर इस से नेपाल मे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बड़ी बेबाकी से बयान दिया ‘भारत हमारे देश मे तेल आयात करना बंद कर देगा तो हमलोग गाड़ी छोड़ कर साईकल चढ़ेंगे ।’
वाह१भईकमरेड प्रचण्ड आपका भीजन तो मान गए हमलोग । दुनिया चांद पर पहुँच गई और आप साईकल पर उतर आए । आप इतने ही काविल और अकड़ वाले नेता हैं तो अपने देशवासियों को तेल (पेट्रोल और डीजल) का विकल्प देते न ? पर नहीं आप तो साईकल पर उतर आए । इस से तो अच्छा होता आप बैल गाड़ी, ठेला गाड़ी और घोड़ा गाड़ी चढ़ने के लिए जनता को उकसाते । कम से कम वह देश में ही बना हुआ तो होता । पर आप तो खुद का और जनता का मनोवल गिरा रहे हैं ।
आप ने साइकल चढ़ने की बात कह कर अपनी औकात और क्षमता दिखा दी । क्योंकि आप के पास कोइ भीजन नहीं है न आप कोई दूरदर्शी नेता हैं । राष्ट्रवाद और देश प्रेम के नाम पर आप अपनी उँचाईं से गिर गए हैं । कार या गाड़ी से उपर हेलिकप्टर या हवाई जहाज होता है । पर आप तो देश की जनता को सीधे सौ साल पीछे ले गए । क्या आप और आप के पार्टी का विकास का फण्डा यही है ? पूरी दुनिया सौर्य और हवा की उर्जा से या बिजली से वाहन चलाने के लिए तैयार है या चला चुकी है । पर आप तो सीधे साइकल युग में पहुंच गए । क्या साइकल नेपाल में बनता है ? कहीं आपका ईशारा उत्तर की तरफ तो नहीं ?
आखिर में आपकी पार्टी उत्तर की ही उत्पादन है । आपकी पार्टी का नाम ही चीन के कम्यूनिष्ट पार्टी के नेता माओत्से तुगं के नाम पर रखा गया है । पर आप के मुँह से माओ, चीन या साइकल का नाम लेना तनिक भी नहीं शोभा देता है । क्योंकि माओवादी के जनयुद्ध काल में आप ने भूमिगत रूप में भारत में ही आश्रय लिया था । आप के पार्टी का नेपाल के अन्य पार्टियों से सुलह कराने और राजशाही को ढालने में भी भारत का ही हाथ था । पर आप सब भूल गए और देने लगे ताना ।
आपको लगता हैं कि आप भारत को बिचका कर चीन के नजदिक आ जाएँगें और नून से सून और रुई से सूई तक लाने में वो आपकी मदद करेगा ? आपको लगता है कि भारत और चीन के बीच की सीमा विवाद के चलते चीन नेपाल के नजदीक आएगा और आपकी मदद करेगा ? आप भोले हैं कि बेवकुफ मैं समझ नहीं पा रही । अब कोई भी देश सीमा विवाद पर झगड़ा करने और मिसाइल दागने से ज्यादा अपना आर्थिक स्वार्थ देखता है । भारत और चीन दोनाें ही दुनिया के सब से बडेÞ बाजार हंै । दुनिया की चालिस फिसदी आवादी यहां पर रहती है । यह दोनाें देश अपना–अपना आर्थिक हित साधेगें न कि आप के बहकाव में आ कर अपना–अपना अर्थतन्त्र चौपट करेंगे ।
आप के जैसा ही हल्का बयान देने वाले देश नहीं हैं चीन और भारत । वह आपसी मतभेद भूल कर अपने–अपने देश को आर्थिक रूप से समृद्ध करने मे जुटे हुए हैं । आपकी तरह कंधा हिला–हिला कर देश प्रेम का भाषण देने के लिए इनके पास समय नहीं है । आप पढेÞ लिखे हो कर गंवारो जैसी बात करते हैं । नाकाबन्दी कब और किन परिस्थिति में होती है आपको मालूम होना चाहिए । भारत नेपाल के साथ व्यापार और पारवहन सन्धि कर चुका है । वह कभी नाकाबन्दी नहीं करेगा । हाँ आप आँख और कान बन्द कर के झूठ बोल और देख सकते हैं । आप ने अपवाहों पर विश्वास किया पर अपने ज्ञान और सत्य, तथ्य को जानने की कोशिश नहीं की ।
पार्टी अध्यक्ष हो कर आपको इतना भी पता न हीं है कि नाकाबन्दी किन–किन परिस्थितियों में लगाई जाती है ? भारत द्वारा संविधान संसोधन के लिए दिया गया सुझाव भी सिर्फ हल्ला ही था । पर आप और आपकी पार्टी के कार्यकता और बांकी नेता माने तब न ? आप जब नेपाल के प्रधानमन्त्री बने थे उस समय आप ने डेढ़ लाख रुपए की पलगं खरीद कर उसी में सोते थे । तो भारत नाकाबन्दी कर देगा तो आप डोरी की खटाई मे या चटाईं में सोएँगें । पहले की बात और थी क्या अब आप चटाई पर सो सकते है ? आप लाजिम्पाट मे १० करोड़ रुपए के भवन में रहते हैं, पजेरो चढ़ते हैं और मंहगे कपड़े पहनने के साथ ही विलासी वस्तुएं प्रयोग करते हंै । क्या आप फिर झोपड़ी में गुजारा कर पाएँगें ?आप खुद तो कभीच लते नहीं है और जनता को बोलते हैं कि साइकल पर चढेÞंगे ।
आप भारत को चिढ़ा कर चीन को अपना बनाना चाहते हैं । क्योंकि आपको मालूम है दुनिया में सबसे ज्यादा साईकल चीनीयाँ लोग ही चढ़ते हैं और साइकल का आविष्कार भी चीन मे ही हुआ है । आप भारत को दुत्कार कर चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहते हैं । पर चीन भी जानता हैं आप के हाथ गद्धारी और खून से लथपथ हंै । चीन आप के हाथ को कभी थामेगा नहीं । आप बाघ को शेर का डर दिखा रहे है । आपको लगता है कि आपकी बातों के भ्रमजाल में एक बार फिर यहां की बुद्धु जनता फंस जाएगी ? आप और ओली मे कभी ३६ का आंकड़ा था । पर आपलोग अभी मिले हुए हैं संविधान घोषणा और उस के बाद सत्ता का भाग बंडा कर के आपस मे बांटने के लिए ।
एक बार पहले भी आप ने राष्ट्रपति बनने की इच्छा जाहिर की थी । वह तो पूरी नहीं हुई । आप अधर में ही लटके रह गए । आपातकालीन प्रधान सेनापति रुक्मागंत कटवाल को हटा कर अपना आदमी प्रधान सेनापति मे भर्ती करना चाहते थे । उस समय भारत ने ही आप के इरादों पर पानी फेर दिया था । तब आप खुद ही प्रधानमन्त्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए थे । कहीं आप उस समय का बदला अब साइकल प्रेम दिखा कर भारत से निकाल तो नहीं रहे ? नहीं तो आपकब से इस देश और जनता के हितों के रक्षक हो गए ?
आपका साइकल प्रेम झूठा है । आपका नेतृत्व और साख गिर चुका है । उसी को भुनाने और वापस लाने के लिए आप ने साईकल प्रेम का मन्त्र छेड़ा है । कीर्तिपुर से आप ही हारे थे ना ? वो तो भला हो सिरहा की जनता का जिसने आपको जिता कर थोड़ा सा ही सही आपका मान रख दिया । नहीं तो आज आप इस तरह नहीं गुर्राते । किन्तु आपने उस जनता का ही मान नहीं रखा । आखिर मे खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचेगी ही । क्योंकि आपकी पार्टी के चिन्ह हंसिया और हथौड़े पर जंग लग चुका है कामरेड । जाइए पहले उसको फिर से धारदार कीजिए उसके बाद साइकल चढि़एगा । बिल्ली से ही आप डर गए यदि सच में बाघ आ कर सामने खड़ा हो जाएगा तो आप क्या करेंगे कमरेड ? आपका साइकल प्रेम आपको ही मुबारक हो । हम २१ वीं शताब्दी के नागरिक हंै साइकल कभी नहीं चढ़ेंगे ।

 

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