कोई भी क्षेत्रीय पार्टी मधेश मुद्दा को संबोधन नहीं कर सकती : अभिषेक प्रताप साह

संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के पूर्र्व उप–महासचिव तथा सांसद हैं– अभिषेक प्रताप साह । वे कपिलवस्तु–२ से प्रत्यक्ष निर्वाचित सांसद हैं । मधेश मुद्दा को लेकर राजनीति करनेवाले साह ने मंगलबार एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर अपनी पुरानी पार्टी संघीय समाजवादी फोरम नेपाल छोड़ दिया है । उन्होंने स्वीकार भी किया है कि साह नेपाली कांग्रेस प्रवेश कर रहे हैं । साह को माने तो फोरम नेपाल में उन का सही राजनीतिक मूल्यांकन नहीं होने के कारण उन्होंने उक्त पार्टी परित्याग किया है । नेता साह को यह भी मानना है कि ‘मधेशवाद के नाम में राजनीति करनेवाले दल तथा नेता ‘मधेश’ शब्द को आर्थिक उपार्जन का माध्यम बना रहे हैं । खैर ! साह का फोरम नेपाल परित्याग, भावि रणनीति और सम–सायमयिक राजनीतिक विषयों को लेकर हिमालिनी डटकम के लिए लिलानाथ गौतम ने नेता साह के साथ संक्षिप्त बातचीत किया है । प्रस्तुत है बातचीत का सम्पादित अंश–

० क्या आप कांग्रेस प्रवेश करे रहे हैं ?
– हां, कल मैं औपचारिक रुप में नेपाली कांग्रेस में प्रवेश करुंगा ।
० कांग्रेस ही क्यों ?
– मेरा परिवारिक पृष्ठभूमि नेपाली कांग्रेस से जुड़ा हुआ है । मेरा दादा नेपाली कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे । अभी जो राजनीतिक माहौल और परिवेश है, उसी के कारण मैं नेपाली कांग्रेस प्रवेश कर रहा हूं । देश राजनीतिक ध्रुवीकरण में जा रहा है । ऐसी अवस्था में प्रजातान्त्रिक शक्ति को इकठ्ठा होना आवश्यक है ।
० मधेश मुद्दा से जोड़ कर आप को पहचाना जाता है । मधेश मुद्दा को ही लेकर लम्बे समय से आप राजनीति में क्रियाशील हैं । आज क्या हो गया है कि आप उस मुद्दा को छोड़ कर नेपाली कांग्रेस प्रवेश कर रहे हैं ?
– नेपाली कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसने सबसे पहले मधेश मुद्दा को आगे लाया था । नेपाली कांग्रेस की आधारभूमि तराई–मधेश ही है । तराई–मधेश से नेपाली कांग्रेस अलग नहीं हो सकता । आप को पता है कि नहीं, संविधान संशोधन संबंधी प्रथम प्रस्ताव नेपाली कांग्रेस ने ही संसद में पंजीकृत किया था । दूसरी बात, कोई भी क्षेत्रीय पार्टी मधेश मुद्दा और समस्या का समाधान नहीं करता । इसके लिए तो प्रजातान्त्रिक शक्ति और राष्ट्रीय पार्टी ही आवश्यक है ।
० मधेश मुद्दा के नाम मे आज तक जो भी मांग सामने आया है, क्या अब वह मांग नेपाली कांग्रेस पूरा कर सकती है ?
– हां, मेरा यह विश्वास है कि नेपाली कांग्रेस ही मधेश–मुद्दा संबोधन कर सकती है । अन्य किसी पार्टी के पास वह हैसियत और ताकत नहीं है, जो मधेश समस्या का समाधान कर सके ।


० मधेश मुद्दा के प्रति केन्द्रीत होकर राजनीति करनेवाले दल तथा नेता आज दिन प्रति दिन कमजोर दिखाई दे रहे हैं । राजपा तथा फोरम नेपाल से प्रभावशाली नेता अन्य पार्टी में जा रहे हैं ! इसमें आप का दृष्टिकोण ?
– मधेश मुद्दा हों अथवा वहां रहनेवाली जनता की मांग, लोकतान्त्रिक है । लोकतान्त्रिक मांग को सम्बोधन करने के लिए लोकतान्त्रिक पार्टी और सरकार आवश्यक होती है । आज के सन्दर्भ में नेपाली कांग्रेस ही एक मात्र लोकतान्त्रिक शक्ति है । एमाले–माओवादी तो अवसरवादी है । अपनी स्वार्थ के लिए वे लोग कुछ भी कर सकते हैं । नेपाली कांग्रेस का आधारभूमि और मधेशी जनता की विश्वास आपस में जुड़ी हुई है । मधेश समस्या समाधान के लिए नेपाली कांग्रेस भी प्रतिबद्ध है । ऐसी अवस्था में प्रजातान्त्रिक शक्तियों के बीच ध्रुवीकरण होना आवश्यक बनता है ।
० एमाले–माओवादी बीच आज जो गठबन्धन हो रहा है, इसके बारे में आप क्या कहेंगे ?
– एमाले–माओवादी गठबन्धन ज्यादा दिन टिकनेवाला नहीं है । सर्वप्रथम पार्टी एकीकरण संबंधी समाचार बाहर आया, बाद में कार्यगत एकता की बात आई फिर एक ही चुनाव–चिह्न संबंधी बात सामने आया । किसी के पास भी स्थिरता नहीं है । यह स्वार्थियों का गठबन्धन है, जो सुबह कुछ कहते है और साम होते ही कुछ और । मुझे लगता है, चुनाव से पहले ही यह गठबन्धन टूट जाएगा ।
० लेकिन इसी गठबंधन को देखकर नेपाली कांग्रेस ने भी ‘बृहत लोकतान्त्रिक गठबंधन’ संबंधी अवधारण को सामने लाया है । मतलब गठबंधन के कारण कांग्रेस भी प्रभावित हो गया है, क्या कहेंगे ?
– हां, आज देश दो ध्रुव में ध्रूवीकृत हो रहा है । वामपन्थी (कम्युनिष्ट) की एक ध्रुव और लोकतान्त्रिक शक्तियों की दूसरी ध्रुव । यह नेशनल इस्यु बन रहा है । लोकतान्त्रिक शक्तियों का नेतृत्व नेपाली कांग्रेस कर रहा है । प्रजातान्त्रिक हकअधिकार को सुरक्षित करना है तो यह आवश्यक भी है ।
० आप की नजर में लोकतान्त्रिक शक्ति कौन है ? कांग्रेस किस पार्टी से गठबन्धन कर सकता है ?
– प्रजातान्त्रिक मूल्य–मान्यता में विश्वास रखनेवाले शक्ति ही लोकतान्त्रिक शक्ति है । विजय गच्छदार नेतृत्व के लोकतान्त्रिक फोरम, राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) आदि शक्तियों के साथ नेपाली कांग्रेस कार्यगत एकता कर सकता है । सभी प्रजातान्त्रिक शक्तियों के बीच विचार–विमर्श जारी है, परिणाम तो आनेवाले दिन ही बता सकता है ।

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