कोरिया का आकर्षण : युवाओं का पलायन

काठमान्डौ, बैशाख १७ गते

काठमान्डौ के क्षेत्रों में आजकल युवाओं की लम्बी लम्बी पंक्तियाँ आसानी से देखी जा सकती है । कोरिया जाने की इच्छा से युवाओं की भीड़ हर वर्ष देखी जाती हैं । आधी रात से आवेदनपत्र जमा करने के लिए युवा लाइन में लगे रहते हैं । चिलचिलाती धूप भी उनके जोश को कम नहीं कर पाते । युवाओं का यह पलायन कई मायनों में देश के भविष्य का पलायन है । किन्तु इस ओर कभी सत्ता पक्ष गम्भीर नहीं हो पाई है । बेरोजगारी की मार, गरीबी, भूख इन सबसे पीड़ित युवा वर्ग अपने ही देश में रहकर मेहनत नहीं करना चाहते क्योंकि उनके श्रम के लिए न तो क्षेत्र है और न ही पैसा । ऐसे में विदेशों में जाकर कुछ पैसे कमा लेने की चाहत उन्हें विदेश ले जाती है । अक्सर विदेशों में इनकी स्थिति जानवर से भी बदतर होती है । ताबूत में बन्द उनकी लाशें आती हैं, युवतियाँ अपना सब गवाँ कर लौटती हैं किन्तु दुर्भाग्य इस देश का कि इस ओर देश के प्रतिनिधियों का ध्यान नहीं जाता । वो सिर्फ अपने बैंक बैलेन्स को बढाने में लगे रहते हैं । कोई कल कारखाना, कोई उद्योग, कोई रोजगार की स्थिति जहाँ नहीं होगी आखिर वहाँ के युवाओं की मनःस्थिति क्या हो सकती है ?k-4.png44

सातवें कोरिया भाषा की परीक्षा के लिए आवेदन देने वालों की कतारें दिन प्रतिदिन लम्बी होती जा रही हैं । कीर्तिपुर, च्यासल फुटबाल खेल मैदान, काठमान्डौ भैली उच्च मावि महाराजगंज, महेन्द्र आदर्श विद्याआश्रम, नेपाल वेद विद्याश्रम आदि जगहों पर यह भीड़ आसानी से देखी जा सकती है किन्तु सरकार को यह नहीं दिखती । कोरिया कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में कामदारों को ले जाती है । वहाँ की पौलिसी अच्छी होने के कारण नेपाली युवा वहाँ जाना चाहते हैं । कितने मजे की बात है कि नेपाल खुद एक कृषिप्रधान देश है किन्तु यहाँ इन युवाओं का कोई भविष्य नहीं है ।

Loading...
%d bloggers like this: