कोलकाता बन्दरगाह में व्यापारिक समस्या

नेपाल-भारत के बीच आनेवाली व्यापारिक समस्याओं के समाधान के लिए कोलकाता में नेपाली महावाणिज्य दूतावास की स्थापना की गई है । कुछ वर्षपहले तक इस दूतावास की कोई खास भूमिका नहीं थी । भारत और तीसरे देश के साथ होने वाले व्यापार को नेपाली प्रतिनिधि होकर सहयोग करना और समय-समय में व्यापार पारवहन सम्बन्धी बैठकों में नेपाली पक्ष से सहभागी होने का काम यहाँ स्थित महावाणिज्य दूतावास करता है । क्योंकि तीसरे देशों से नेपाल के लिए आयत होने वाले सामान समुद्र के साथ जुडÞे नाका कोलकाता स्थित पोर्ट होने से इस पोर्ट का महत्व बढÞे जाता है । उद्योग मन्त्रालय मंे लम्बे समय तक, विश्व व्यापार संगठन तथा अन्य अन्तर्रर्ाा्रीय व्याणिज्य सन्धियों के बारे में अनुभवी प्रशासक चन्द्र घिमिरे वहाँ महावाणिज्य दूत के पद में कार्यरत हैं । उनसे हिमालिनी के वीरगंज सम्वाददाता अनिल तिवारी द्वारा ली गई अन्तरवार्ता का सारसंक्षेप-
० तीसरे देशों से नेपाल के लिए आयातीत कार्गो सम्बन्धित अवस्था कैसी है –
-तीसरे देशों से व्यापार में पारवहन मार्ग प्रयोग करते समय ढिÞलाई होना और उच्च दर में जरिवाना भरने की समस्या वर्षों से हम लोग झेलते आ रहे हैं । कोलकाता बन्दरगाह प्रमुख पारवहन बिन्दु के रूप में प्रयोग होते आ रहा है । भारत के आन्तरिक व्यापार के आयतन में वृद्धि हर्ुइ है और नेपाल के लिए जो कार्गो आता है, उसका दबाव भी दिनों kolदिन बढते जा रहा है । लेकिन काम में जो तेजी आनी चाहिए, वो नहीं आ पा रही है ।
० नेपाल का अन्य देशों के साथ व्यापार में भारत का ट्रान्जिट रुट प्रयोग करने पर समय-समय में स्थानीय स्तर में अवरोध दिखता है, इसका खास कारण क्या है –
– भारत के साथ हमारा जो व्यापार और ट्रान्जिट है, उसे दो देशों के बीच का व्यापार और पारवहन सन्धी के द्वारा निर्देशित किया गया है । भारत सरकार जब कोई नयाँ प्रावधान लाती है, उस समय भारतीय कर्मचारी तन्त्र से नेपाल के लिए आयातीत कार्गों में भी वही नियम लागू किया जाता है । लेकिन बाद में जब हम लोग तथ्य के साथ इस बारे में सम्बन्धित निकाय का ध्यानाकर्षा कराते हैं, तब जा कर समस्या का समाधान होता है ।
० राज्य सरकार के द्वारा भी अनेक बहाने बना कर नेपाली कार्गों के लिए शुल्क और अवरोध लगाने की अवस्था देखी गई है । ऐसी प्रवृत्ति बार-बार देखने में आती है, क्यों –
– राज्य सरकार के अपने नियम-कानून हैं । राज्य सरकार अपनी आय बढÞाने के लिए अपने भूभाग में और राजमार्ग का प्रयोग कर रहे सवारी साधनों से सेवा शुल्क वसूलने के लिए राज्य स्तर पर समय-समय में प्रावधान जारी करती है । हांलाकि अन्तर्रर्ाा्रीय सन्धी के सामने में भारत के किसी भी राज्य द्वारा जारी कानून प्रभावित नहीं होना चाहिए । फिर भी स्थानीय स्तर में भारतीय कम्पनियांे के साथ जैसा व्यहार किया जाता है, हमारे साथ भी वही व्यवहार होता है । इसीलिए हम लागों को बढÞी कठिनाई होती है ।
० ऐसे अवरोध के समाधान के लिए कितनी मशक्कत करनी पडÞती है –
-महावाणिज्य दूतावास के महत्वपर्ूण्ा कार्यों के अर्न्तर्गत यह काम भी पडÞता है । मैंने जब से कार्यभार सम्हाला है, पश्चिम बंगाल के कोलकाता अथवा नर्थ बंगला का फुलबारी मार्ग दोनांे ट्रान्जिट में इस प्रकार के अवरोध को हटाने में सफलता मिली है । कोलकाता बन्दरगाह से होने वाले आयात-निर्यात कागोर्ं मंे राज्य स्तर से टैक्स लगाने का निर्ण्र्ााहुआ था । हमने नेपाल-भारत व्यापार सन्धी, ग्याट, भूपरिवेष्ठित देशों के साथ सम्बन्धित अभिसन्धी एमसी नाइन को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर यहाँ की राज्य सरकार के उच्च अधिकारी, वाणिज्य कर निर्देशनालय के साथ विभिन्न चरण में वार्ता कर टैक्स हटाने में सफल हुए हैं । नर्थ बंगाल के फुलवारी रुट में भी फुलबारी वेलफेयर अर्गनाइजेशन, नर्थवेष्ट एक्स्पोर्ट एसोसियसन, वर्कर्स अफ फुलबारी के नाम में शुल्क वसूल करते आ रहे थे । राज्य के गृहमन्त्री द्वारा उस शुल्क को खारेज कराया गया ।
० तीसरे देशों से आयातीत कार्गो जब तक नेपाल नहीं पहुँचता है, उसे डिटेन्सन शुल्क मासिक कितना देना पडÞता है – इसके स्थायी समाधान के लिए नेपाल सरकारको क्या करना चाहिए –  
-तीसरे देशों से कोलकता बन्दरगाह होते हुए मालसमान आयात करने वाले नेपाली व्यापारी को डिटेन्शन शुल्क के रूप में वाषिर्क लगभग दो अर्ब रूपया सिपिङ कम्पनी को देना पडÞ रहा है । वर्षों से यह अनावश्यक शुल्क हम लोग देने के लिए मजबूर हैं, फिर भी इसके समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास अभी तक नहीं हुआ है । नेपाली व्यापारी द्वारा खाली कन्टेनर वापस करते समय जो ढिÞलाई होती है, उसके लिए डिटेन्शन वसूल कर सिपिङ लाइन अच्छी कमाई कर रही है । सिपिङ लाइन वीरगंजस्थित सुखा बन्दरगाह में नेपाली आयात कर्ताओं को कन्टेनर देने का प्रावधान लागू करे तो समस्या का समाधान हो सकता है । इसके लिए नेपाल-भारत द्वारा रेल्वे सम्झौते में सुधार करने की आवश्यकता है । लगभग ६ वर्षों से यह मामला अधर में लटका है, फिर भी नेपाल सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है ।
० भारत में नई सरकार के गठन के बाद उसकी नेपाल सम्बन्धी नीति में कोई परिवर्तन आ सकता है –
-भारत में सरकार परिवर्तन होने पर वैदेशिक नीति में कोई खास परिवर्तन नहीं होता । इस बार भी निर्वाचन के बाद नई सरकार आई तो है, लेकिन उसके दृष्टिकोण में वा कूटनीति में कोई विशेष परिवर्तन होगा, ऐसा नहीं लगता ।
० आप यहाँ वर्षों से कार्यरत हैं, अभी तक आपका समय कैसा रहा –
-जब मेरी नियुक्ति यहाँ हर्ुइ, तो मैं उसी समय से सक्रिय रूप से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान के लिए क्रियाशील हूँ । गत १ वर्षमें नेपाली आयातकर्ताओं से कुछ अवैध संस्थागत टैक्स लेने का प्रचलन था, जिसे हटाने के लिए मैंने पहल किया और उसे पर्ूण्ा रूप से खारिज कर दिया गया । यहाँ के स्थानीय संचार माध्यमों ने भी हमें भरपूर सहयोग किया है, जिसके चलते काम करने में सुविधा हर्ुइ है ।

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