कौन नकली और कौन असली ? बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू,१९ जून | (व्यग्ंय)
इस देश में लगता है नकलियों की ही चांदी है । असली तो औने पौने भाव में भी नहीं बिकते । पहले सिर्फ दूध और सब्जी ही नकली थी । दूध में खूब पानी डालो और सब्जियों को हरे रंग से रंग दो । हो गया असली । आंख नकली, दांत नकली, बाल नकली तो था ही अब डाक्टर भी नकली हो गए । ईन्जिनियर नकली, परिक्षार्थी नकली, नेता नकली । बाप रे असली तो सिर्फ मरीज ही रह गए हैं जो इन नकली डाक्टर के पास अपना असली इलाज कराने जाते हैं ।
asli+nakli
अब तो खुद पर भी शक करने को मन करता है । क्या पता हम खुद भी नकली हो । नकली चीज को खाते और नकली लोगों के शोहबत में रहने से हो सकता है हमलोग खुद भी नकली हो गए हों ? दरअसल बात यह है की हमें असली चीजें रास नहीं आती है । शुद्ध घी हमें नहीं पचता है पर सनफ्लावर हम पचा लेते हैं आसानी से । इसी लिए सरकार हो या कोई शैक्षणिक संस्था चलाने वाला । सबको मालूम है कि नकली का ही बोलबाला है । इसी लिए सब नकली को ही तवज्जो देते हैं तभी तो नकली खूब फलफूल रहा है । नकली प्रमाण पत्रधारी ईन्जिनियर असली भवन और पुल बनाता है और वह कुछ सालों बाद धडाम् से गिर जाता है । सरकार इस की जांच के लिए कमिटी बनाती है और फिर दुसरा पुल और भवन का निर्माण होता है । एक नकली इन्जिनियर जाता है तो दूसरा आ जाता है ।
इस देश में कुल मिला कर ९ हजार डाक्टर हैं और उस में से कहा जा रहा है कि २ हजार डाक्टर नकली है । इस का मतलब २० प्रतिशत डाक्टर नकली है । अभी तक के जांच में १ सौ से ज्यादा डाक्टर नकली पाए गए हैं । तो इस नकली के धंधे मे मेडिकल काउसिंल का पौ बारह है । पर उस कि ओर सब अनदेखा कर रहे हैं । ऐसा लगता है नकली प्रमाणपत्र ले कर डाक्डर बिना मेडिकल काउसिंल से अनुमति लिए ही अस्पताल में मरिजों का ईलाज करने के लिए चले जाते हैं । अस्पताल खराब है, नकली डाक्टर डाक्टर खराब है पर इन नकली डाक्टरों की प्रमाण पत्रअच्छी तरह जांचे बिना डाक्टरी का लाईसेंस देने वाला मेडिकल काउसिंल क्या वास्तव में असली है । चंद सिक्कों और सिफारिश में बिक जाने वाला नेपाल मेडिकल काउसिंल सब से ज्यादा नकली और अपारदर्शी है । पर उस पर कार्वाही नहीं होगा क्यों कि मेडिकल काउसिंल को कुछ फुफकारते नाग घेर कर बैठे हुए हैं ।
गजब है यह देश और अजब है यहां के नीति नियम । आठ क्लास पास प्रधानमंत्री असली है पर एमबिबिएस और एमडी का प्रमाणपत्र असली है पर ईंटर का प्रमाणपत्र नकली होने के कारण डाक्टर नकली है । मेट्रिक पास अर्थ मंत्री असली है  जिसको बजट के बारे में भी अच्छी तरह पता नहीं है । देश के स्वास्थ्य का डाक्टर माना जानेवाला देश का प्रधानमंत्री अनपढ़ हो या आठ क्लास पढ़ा हो तो भी कोई बात नहीं पर डाक्टर कि डिग्री नकली होने पर हायतौबा मचाते हैं । पहले प्रधानमंत्री की डिग्री तो देखो कहीं वह आठ क्लास का प्रमाण पत्र भी नकली न हो ? जो लंबीलंबी फेंकता हो, हवाई बातें करता हो वहअसली है और बांकी सब नकली । हे भगवान कंही यह सिंह दरवार और बालुवा टार भी नकली न हो । दूसरों की किडनी उधार ले कर नकली जिंदगी जीने वाला असली और सब नकली ? यदि सच में वह डाक्टर नकली हैं तो स्वास्थ्यमंत्रालयऔर मेडिकल काउसिंल उन के बारे में छानबीन करें । सिआईबी को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर घुसने का अधिकार किसने दिया ? हो सकता है नकली पुलिस की तरह यह सआिईबी भी नकली हो ?
दिन दहाडे एक पुलिस कर्मी एक रिक्सावाले को अपने पैर से किक मारता है । लोग देखते रह जाते हैं, कोई कुछ नहीं बोलता । यदि वह पुलिस कर्मी और रिक्सावाला दोनों असली थे, वह पैर से किक मारने वाला दृश्य भी असली था और वहां पर जमा हुए लोग भी असली थे तो  कार्वाही क्यों नहीं हुई ? क्या नेपाल पुलिस नकली है ? यदि असली है तो खुद के असली होने का प्रमाण उस पुलीस कर्मी को कार्वार्ही कर के दें ? पर नहीं इन्हे तो मधेशी मूल के डाक्टर ही नकली दिख रहे हैं ।
हद है भई इस देश के नागरिक और बुद्धुजीवियों के सोचने की शक्ति को । वीरगञ्ज और देश के अन्य शहरो में पकड़े गएजो डाक्टर अधिकांश मधेशीमूल के हैं तो सारे मधेशी ही नकली हो गए ? सिर्फ मधेशी ही गलत काम करते है और पहाडी दूध के धूले हुए पाक साफ हैं ? और नकली डिग्री को दहेज से जोर कर भी देखा जा रहा है । वह इसी लिए कि शादी में भारी भरकम दहेज लेने के लिए डाक्टरी का नकली प्रमाण पत्र बनाया जाता है । पर वह लडका और लडकी तो नकली नहीं होगें जिन्होने आपस में शादी की होगी । बिना लोक सेवाआयोग पास किए लोकमान सिंह कार्की देश के जिम्मेवार पद अख्तियार दुरुपयोग नियंत्रण आयोग के मुखिया बनजाते है और अनापशनाप काम करते है तो वह नकली नहीं है ?और कार्की को इस पद के लिए सिफारिश करने वाले एमाओवादी के कमाडंर प्रचडं नकली नहीं है ? देखा जाएतो इस देश में कोई भी असली नहीं है ।
न नेता न मंत्री न जनता ही असली है । जनता भी तो पार्टी का कार्यकर्ता बन कर कभी इस खेमें में तो कभी उस खेमें मे रासलीला करती है । तो क्या वह असली है ? जिस देश में दाल को पालिस कर के बेचा जाता है, चावल में चावल कम ककंड़ और घून ज्यादा है वहां पर असली की बात करना ही बेमानी है । अब तो हमारा परम पूज्य दक्षिणी पडोसी चीन प्लास्टिक का नकली चावल बना कर निर्यात कर रहा है और हमारें पेट को भी नकली बना रहा है । पर कोई बात नहीं । भुटानी करण और सिक्किमी करण पर चिल्लाने और विरोध करने वाले हम तिब्बती करण पर मौन बैंठेगें । क्योंकि हम सब नकली है । क्योंकि हमारी संवेदना, ईमान और विवेक सब नकली है । हमारा विरोध और तर्क भी नकली है । जब नकली का ही हर तरफ राज है तो असली को पड़े रहने दो कोने में । असली ईंसान और असली नियत अब किसी संग्रहालय में ही मिलेगा इस देश में नहीं । आम का सीजन है ईसी लिए नकली कार्बाईड से पकाया गया आम की तरह है जो हर जगह मिलता है  और असली पेड़ में प्राकृतिक रुप से पका हुआ “गछपक्कु” आम की तरह है जो हर तरफ नहीं मिलता या नहीं मिलता । इसी लिए देख कर और असली नकली तय करने के बाद ही खाईए नहीं तो देश और आपका पेट एक ही साथ खराब होगा तो किसी को दोष देना बेकार ही है ।
“क्या मिलिए ऐसे लोगों से,
जिनकी हकीकत छुपी रहे ।
नकली चेहरा सामने आए,
असली सुरत छुपी रहे ।”
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