क्या अपडेट होता है फेशबुक में

लीलानाथ गौतम:चितवन, वीरेन्द्रनगर-३ निवासी सावित्री कँडेल अभी बहुत खुश नजर आती है । कारण है- १४ साल के बाद, वह अपने खोए हुए पति यज्ञप्रसाद कँडेल के साथ मिल रही है । यज्ञप्रसाद कँडेल गत फरवरी १३ को अचानक सावित्री के सर्म्पर्क में आए । सन् २००१ में शादी करके कँडेल रोजगार के लिए मलेसिया गए थे । इतने साल तक वे लौट कर नहीं आए । कहाँ थे, यह भी पता नहीं चला । लेकिन इस तरह अचानक वे फिर मिल जाएँगे, सावित्री ने ऐसा सपने मंे भी नहीं सोचा था । पति विदेश जाते वक्त उनकी गोद में पाँच महीने का बेटा था । अभी वह १३ वषर्ीय किशोर हो चुका है । अब आकर उस को अपने खोए हुए पिता मिले हंै । इसी तरह यज्ञप्रसाद की माँ जानुका ने भी अपने खोए बेटे को पुनः प्राप्त किया है । अभी थाइल्याण्ड में रह कर व्यवसाय कर रहे यज्ञप्रसाद भी अपने परिवार के मिलने पर खुश हैं । इस मिलन का श्रेय जाता है- सिर्फफेशबुक को ।index
हाँ, यह सामाजिक सञ्जाल फेशबुक की एक महत्त्वपर्ूण्ा देन है । वर्षों से सर्म्पर्कविहीन बहुत से परिवारिक सदस्य तथा दोस्तों को सामाजिक सञ्जाल फेशबुक ने आपस में मिलाया है । ढूंढने लगें तो इस तरह की घटनाएं बहुत सारी मिल सकती हैं । विज्ञान और प्रविधि की महत्त्वपर्ूण्ा उपलब्धि माने जाने वाला फेशबुक की तरह अन्य सामाजिक सञ्जाल भी सक्रिय हैं । ट्वीटर भी इसका एक उदाहरण है । ट््वीटर की लोकप्रियता भी दिन प्रति दिन बढÞ रही है । लेकिन इससे फेशबुक की लोकप्रियता घटी नहीं है । चाहे व्यक्तिगत हो वा संस्थागत, फेशबुक को प्रचार-प्रसार के लिए एक सशक्त हथियार माना जाता है । उदाहरण के लिए भारत में हो रहे आम निर्वाचन को ले सकते हैं । जहाँ हर पार्टर्ीीौर नेता अपने प्रचार-प्रसार के लिए सामाजिक सञ्जाल का इस्तमाल बखूबी कर रहे हैं । माना जाता है कि सामाजिक सञ्जाल के जरिए ही आप बहस के लिए उत्तम मञ्च प्राप्त कर सकते हैं । सामाजिक सञ्जाल के प्रयोग के कारण निर्वाचन परिणाम भी प्रभावित हो सकते हंै । उदाहरण के लिए सन् २००८ में अमेरिका, सन् २०१० में बेलायत, आस्ट्रेलिया और श्रीलंका, सन् २०१२ में इटली में हुए निर्वाचन परिणाम को लिया जा सकता है । उक्त प्रकाशित समाचार बताते हैं कि सामाजिक सञ्जाल के प्रयोग से निर्वाचन बहुत ही प्रभावित हुआ है । बैंकाक में तो निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव में ‘सामाजिक मीडिया’ कैसे प्रयोग किया जाए, इस के बारे में आचारसंहिता ही जारी की गई थी । इस घटना से आज की दुनियाँ में सामाजिक सञ्जाल का महत्व कैसे बढÞ रहा है, प्रमाणित होता है । इसलिए आप इस का कितना प्रयोग कर सकते हैं, उसी पर इसका महत्त्व निर्भर है । यहाँ एमाओवादी नेता डा. बाबुराम भट्टर्राई का कथन बहुत ही सान्दर्भिक रहेगा । उन्होंने गत जनवरी ४ में कहा है- ‘सामाजिक सञ्जाल एक विश्वविद्यालय है ।’ फेशबुक के सम्बन्ध में डा. भट्टर्राई का यह कथन हम सभी के लिए मनननीय है ।
ऐसी अवस्था में नेपाल की राजनीतिक पार्टर्ीीथा उन के नेता, सामाजिक सञ्जाल में प्रवेश न करें, ऐसा हो नहीं सकता । फिर भी पुरानी पीढÞी के नेतागण इस में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते । लेकिन दुःख की बात यह है कि इसका गलत प्रयोग होने के कारण समाज में अनेक विकृतियाँ दिखाई दे रही हैं । जिस के कारण कुछ देशों ने तो फेशबुक में प्रतिबन्ध भी लगा दिया है । इसका एक उदाहरण पडÞोसी मित्रराष्ट्र चीन भी है । इसी तरह भारत के राजनीतिक वृत्त में भी इस को प्रतिबन्धित करने के लिए बहस होती रही है । अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा भी फेशबुक के कारण परेशान हुए हंै, ऐसा समाचार र्सार्वजनिक हो चुका है । ऐसी अवस्था में नेपाल मंे सामाजिक तथा राजनीतिक वृत्त में स्थापित व्यक्ति, सामाजिक सञ्जाल को कैसे प्रयोग कर रहे हैं, इस में चर्चा करना बहुत ही प्रासंगिक  रहेगा ।
आज का युग सूचना-प्रविधि तथा इन्टरनेट का है । इसीलिए बहुत सी राजनीतिक पार्टियों ने पार्टर्ीीे नाम से वेभसाइट बनवाया है । कुछ शर्ीष्ा नेता तो अपने व्यक्तिगत वेभसाइट भी चलाते हैं । उदाहरण के लिए नेपाली कांग्रेस के नेता रामचन्द्र पौडेल को लिया जा सकता है । उन्होंने चamअजबलमचबउयगमभ।अिom वेभसाइट निर्माण किया है । लेकिन अभी यह वेभसाइट सक्रिय नहीं है । लेकिन सामाजिक सञ्जाल में वे सक्रिय ही हैं । काँग्रेस के शर्ीष्ा नेता सुशील कोइराला और शेरबहादुर देउवा का कोई वेभसाइट नहीं है । वे दोनों सामाजिक सञ्जाल में भी सक्रिय नहीं रहते । लेकिन कांग्रेस के युवा नेता गगन थापा सामाजिक सञ्जाल में खूब सक्रिय दिखाइ देते है । उन का अपन वेवर्साईट नबनबलतजबउब।अom।लउ है । उनके फेशबुक में देखा जाए तो उनकी अन्तर्वाता, पत्रपत्रिका में प्रकाशित लेख आदि के लिंक मिलते हैं । लेकिन अभी वह ज्यादा फेशबुक नहीं चलाते । थापा फेशबुक से ज्यादा ट्वीटर में सक्रिय दिखाइ दे रहे हैं । इसी तरह कांग्रेस में डा. शशांक कोइराला, डा. रामशरण महत, अर्जुननरसिंह केसी, दीपकुमार उपाध्याय, बालकृष्ण खाँड, शंकर भण्डारी, लक्ष्मण घिमिरे आदि नेतागण का फेशबुक आइडी है । उन में से बहुत नेता चुनाव के बाद निष्त्रिmय दिखाई देते हैं । लेकिन डा. शशांक कोइराला की बात अलग है । कोइराला दैनिक ४ से ५ बार कुछ न कुछ नयाँ अपडेट करते रहते हैं । उन के अपडेट में पार्टर्ीीे साथ सम्बन्धित गतिविधियां अधिक रहती हैं । साथ में महत्त्वपर्ूण्ा अन्य समाचार का लिंक भी अपडेट रहता है ।
नेकपा एमाले के नेतागण झलनाथ खनाल, माधवकुमार नेपाल और केपी ओली ने भी अपना-अपना वेवसाइट बनाया था । एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल के वेभसाइट वलपजबलब।अिom।लउ हैं । लेकिन यह अपडेट नहीं है । पिछली बार उन्होंने बाबुराम भट्टर्राई प्रधानमन्त्री रहते समय अपडेट किया था, जिस में लिखा है- अध्यक्ष खनाल और प्रधानमन्त्री भट्टर्राई के बीच भेटवार्ता । इसी तरह एमाले के ही वरिष्ठ नेता माधव नेपाल का व्यक्तिगत वेवर्साईट mबमजबखभलभउब।अिom।लउ भी अभी बन्द पडÞा है । तीसरे नेता केपी ओली का पउयष्।िअom भी नहीं चलता है । ये तीनों नेता सामाजिक सञ्जाल में भी सक्रिय नहीं हैं ।
लेकिन नेकपा एमाले के ही युवा नेता रवीन्द्र अधिकारी तथा माधव ढुंगेल सामाजिक सञ्जाल में सक्रिय रहते हैं । ये दोनों नेता फेसबुक और ट्वीटर में हैं । सामाजिक सञ्जाल के द्वारा रवीन्द्र अधिकारी अपना सन्देश पोस्ट करते हैं । इसी तरह एमाले में महासचिवर् इश्वर पोखरेल, शंकर पोखरेल, विष्णु पौडेल, योगेश भट्टर्राई, रामेश्वर फुयाँल, निर्मल कर्ुइंकेल, महेश बस्नेत आदि दर्जनों नेता फेशबुक में सक्रिय हैं । सचिव शंकर पोखरेल फेशबुक में राजनीतिज्ञ और साहित्यकार दोनों रूप में दिखाई पडÞते हैं । पोखरेल कविता तथा हाइकु के द्वारा माओवादी राजनीति तथा क्रियाकलाप की तीव्र आलोचना करते हैं । कविता और हाइकु के अलावा विचारात्मक अपडेट कुछ कम ही मिलता है । पोखरेल फेशबुक में पारिवारिक तस्वीर भी उतना ही अपडेट करते हैं । अपनी अन्तरवार्ता तथा लेखों के लिंक भी उनके फेशबुक में मिलते हंै । पार्टर्ीीर लगे आरोपों का पोखरेल फेशबुक द्वारा ही जोरदार खण्डन करते हैं । एमाले द्वारा चयनित मन्त्री के प्रति हुए विरोध को सम्बोधन करते हुए फरवरी २६ में उन्होंने लिखा है- ‘जनता मंे अपरिचत मन्त्री, कहकर एमाले की आलोचना हो रही है । लेकिन ऐसा नहीं है । संविधानसभा सदस्य तो संविधान निर्माण में लगेंगे । इसीलिए एमाले के दूसरे नेता, सरकार सञ्चालन में आए हैं तो इस में आलोचना करने की क्या जरूरत है -‘ उन का यह तर्क एमाले के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन आम जनता इस तर्क को सहज रूप में स्वीकार नहीं करेगी । पोखरेल सामान्य से सामान्य विषय भी अपडेट करते हैं, जो उन जैसे नेताओं के लिए शोभनीय नहीं लगता । उदाहरण के लिए उन्हों ने मार्च २० में एसएलसी में सहभागी परीक्षार्थी को शुभकामना देते हुए अपना फेशबुक अपडेट किया है ।
इसी तरह एमाले के विद्यार्थी नेता माधव ढुंगेल भी फेशबुक में उतने ही सक्रिय हैं । देश के समयसामयिक विषय और अपनी सहभागिता वाली राजनीतिक गतिविधियों का अपडेट उनके फेशबुक में रहता है । ढुंगेल ने पिछली बार रामेछाप के अपने गांव और वहाँ की विकासावस्था के बारे में अपडेट किया है । इसी तरह माओवादी की राजनीतिक गतिविधि, युवा राजनीति, देश की आर्थिक गतिविधि आदि के बारे में भी वे लिखते रहते हैं । आर्थिक रूप में देश को समृद्ध बनाने के लिए वे जोर देते हैं । उदाहरण के लिए मार्च १४ के रोज उन्होंने लिखा है- ‘शब्द को खेलते हुए बुद्धि विलास करने से ज्यादा देश को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना आवश्यक है । पर्यटन, जलश्रोत, कृषि, बन तथा जडीÞबूटी, खनिज, सहकारी, उद्योग और मानव संसाधन नेपाल के आर्थिक विकास के आधार हैं । शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार, असल शासन, इस के साथ जुडÞे हुए अन्य बिषय वस्तु हैं ।’
एमाओवादी के भीतर इन्टरनेट तथा सामाजिक सञ्जाल में सब से ज्यादा सक्रिय नेता डा. बाबुराम भट्टर्राई हैं । उन का व्यक्तिगत वेवसाइट दबदगचamदजबततबचबष्।अom है । सामाजिक सञ्जाल में भी डा. भट्टर्राई उतने ही सक्रिय हंै । भट्टर्राई इस तरह के व्यक्तित्व हैं, जिसके फेशबुक तथा ट्वीटर अपडेट बहुत सारे पत्रकारों के लिए समाचार स्रोत बनते हैं । साथ ही उन के फेशबुक अपडेट से पार्टर्ीीराजनीति तथा समाज में नयी बहस की शुरुआत होती है । पिछली बार भट्टर्राई ने ‘राजनीति में नयी शक्ति की आवश्यकता’ पर जोर देते हुए बहस का मुद्दा उठाया है ।
एमाओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल, प्रचण्ड के नाम से cmउचबअजबलमब।अom नामक वेवसाइट सञ्चालन में था । लेकिन अभी वह निष्त्रिmय है । दाहाल सामाजिक सञ्जाल में भी सक्रिय नहीं हैं । एमाओवादी में अग्नि सापकोटा, पोष्टबहादुर बोगटी, कृष्णबहादुर महरा, शक्ति बस्नेत, देवेन्द्र पौडेल, महेन्द्र श्रेष्ठ, वर्षान पुन, नन्दबहादुर पुन, रेणु चन्द, शालिकराम जमरकट्टेल, महेश्वर गहतराज आदि नेतागण समाजिक सञ्जाल में उपलब्ध हैं । लेकिन चुनाव के बाद बहुत से प्रायः निष्त्रिmय हंै ।
इधर मधेशीवादी पार्टर्ीीथा नेताओं में से जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता और सरिता गिरी ही इस मामले में सब से ज्यादा आगे हैं । विगत कुछ महीनों से गुप्ता ‘तर्राई मधेश राष्ट्रिय अभियान’ के बारे में फेशबुक मार्फ प्रचार-प्रसार कर रहे हैं । अभी अपने अभियान के अलावा अन्य कोई भी अपडेट उन्होंने नहीं किया है । वर्तमान मधेशवादी दलों के द्वारा मधेश को कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है, इस आशय के अपडेट उनके फेशबुक में कुछ ज्यादा ही मिलेगा । दूसरे संविधानसभा निर्वाचन और उस में मधेशवादी दलों की पराजय के सम्बन्ध में उन्हों ने कहा है- ‘जनता ने कथित धोखेवाज और यथास्थितिवादी मधेसी नेता और उन की पार्टर्ीीो दण्डित किया है । यह मधेशी जनता की पराजय नहीं है, मधेसी जनता अपराजेय है ।’ इसी तरह अपने पर भ्रष्टाचार मुद्दा लगाना और जेल भेजने के पीछे बहुत बडÞा षड्यन्त्र दिखाते हैं, गुप्ता । फेशबुक के द्वारा गुप्ता ने यह बात बहुत बार पोस्ट किया है । गुप्ता ऐसे फेशबुक यूजर नेता हैं, जिन का अपडेट एमाओवादी नेता डा. भट्टर्राई की तरह ही पत्रकारों के लिए समाचार स्रोत बनता है । उदाहरण के लिए कुछ समय पहले उन्होंने एमाओवादी तथा मधेशवादी कुछ नेताओं के साथ हाथ में दारु का गिलास लेकर ‘चियर्स’ करते हुए अपडेट किया था, जो बहुत से पत्रकार के लिए समाचार का मसला बना था ।
इसी तरह नेपाल सद्भावना पार्टर्ीीी नेतृ सरिता गिरी भी सामाजिक सञ्जाल में सक्रिय हैं । वह फेशबुक और ट्वीटर दोनों में उतनी ही सक्रिय दिखाई देती हैं । जहाँ गिरी अपनी बात रखते हुए बहस में भी उतर आती हैं । गिरी का कबचष्तबनष्चष्।दयिनकउयत।अom नामक अपना ब्लाँग भी है । ब्लाँग पिछले कुछ समय से अपडेट नहीं है । लेकिन फेशबुक में हर दिन उन का ४-५ से ज्यादा ही अपडेट मिलता है । उस में वह मधेश और राष्टी्रय राजनीति में सटीक एवं महत्त्वपर्ूण्ा बात रखती है । उनका विश्लेषण सिर्फमधेशी नेताओं के लिए नहीं, समग्र राजनीति के प्रति रुचि रखने वालों के लिए भी पठनीय रहता है । इसके अलावा शिक्षाप्रद विभिन्न नेपाली तथा अंग्रेजी लेखों का लिंक, जीवन दर्शनयुक्त युक्ति आदि भी उन के फेशबुक में मिलता है । उन के अपडेट से पता चलता है कि वह नेपाली, हिन्दी और अंग्रेजी तीनों भाषा में दक्ष हैं । मधेश राजनीति का विश्लेषण करते हुए उन्हांेने अपने फेशबुक पेज में कहा है- ‘नेपाल में मधेश की राजनीति दो धार की तलवार पर चलने के समान है । इस यात्रा में बहुतों के पैर कटेंगे, बहुतों के हाथ बँधेंगे, बहुत गुमनाम हुए हैं अभी और बहुत होंगे । बहुत बदनाम हुए हैं और बहुत बदनाम किये जाएंगे । यात्रा लम्बी है और दुरूह भी ।’ इसी तरह अन्य मधेशी नेताओं की तुलना में गिरी का पहाडÞी समुदाय के प्रति कुछ सम्मानजनक दृष्टिकोण दिखाइ देता है । उदाहरण के लिए उनका यह अपडेट उल्लेखनीय है- ‘मुझ को समझ में नहीं आता है कि जब कोई नेपाली भाषी किसी मधेशी को भैया कहते है, तब मधेशी क्यों नाराजगी दिखते है – … !’
इसी तरह सद्भावना पार्टर्ीीे महासचिव मनीष सुमन भी समाजिक सञ्जाल में हंै । लेकिन उन का फेशबुक अपडेट चुनाव के बाद कम हो रहा है । पिछली बार मार्च २५ में उन्होंने पार्टर्ीीे नेता तथा सभासद् सञ्जय साह की गिरफ्तारी के विरोध फेशबुक अपडेट किया है, जहाँ मनीष और पार्टर्ीीे अध्यक्ष राजेन्द्र महतो प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला को ज्ञापनपत्र दे रहे हैं । उस में उन्होंने साह का बचाव किया है । पत्रपत्रिका, रेडियो तथा टेलिभिजन जैसे मिडिया में राजनीति के बारे में सशक्त विचार प्रस्तुत करने वाले सुमन अपने सामाजिक सञ्जाल फेशबुक में कुछ कमजोर दिखाइ पडÞते हैं । क्योंकि सामान्य से सामान्य विषय वह अपडेट करते हैं । उदाहरण के लिए उन्होंने मार्च १० में अभी तक अपने को काँलेज का विद्यार्थी बताते हुए महेन्द्र विन्देश्वरी क्याम्पस सप्तरी द्वारा जारी एलएलवी लेभल के विद्यार्थी का परिचयपत्र अपडेट किया है । इसी तरह मिडिया में वह पहाडÞी समुदाय के प्रति उतना आक्रमक नहीं दिखाई देते हंै, लेकिन अपने सामाजिक सञ्जाल में उनकी मानसिकता साम्प्रदायिक जैसी दिखती है । उदाहरण के लिए उन्होंने अपनी बेटी की तस्वीर अपडेट करते हुए काठमांडू में मधेशी विद्यालय ढूंढÞ रहे हैं, जहाँ कहा गया है- ‘क्या काठमांडू में कोई ऐसा विद्यालय है – जहाँ मेरी ५ साल की बेटी आराध्या सिर्फ मधेशी बच्चों के साथ पढÞ सके, ताकि उसके साथ किसी प्रकार के सामाजिक भेदभाव न हो ।’ इस अपडेट से पता चलता है कि सुमन जी को इतना भी पता नहीं है कि बच्चे आपस में इस तरह घुलमिल जाते हैं ताकि उन में कौन गरीब, कौन धनी, कौन गोरा-काला कोई भेदभाव नहीं रह जाता ।
इसी तरह सद्भावना के ही युवा नेता योगेन्द्र राय यादव भी फेशबुक चलाते हंै । फोरम नेपाल से सद्भावना प्रवेश करते वक्त वे ज्यादा ही फोरम नेपाल के विरोध और सद्भावना के र्समर्थन में थे । मधेश राजनीति के बारे में भी खूब लिखते थे । संविधानसभा निर्वाचन में हुए चुनाव प्रचार-प्रसार का अपडेट भी उन्होंने खूब किया । लेकिन चुनाव के बाद वे कुछ सुस्त दिखाइ पडÞते हंै । पिछली बार मधेशी दलों के एकीकरण प्रसंग को लेकर यादव अपने फेशबुक अपडेट कर रहे हैं ।
इसी तरह तमलोपा के उपाध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल भी सामाजिक सञ्जाल फेशबुक में उपलब्ध हंै । वह समसामयिक मधेश राजनीति के बारे में ज्यादा अपडेट करते हंै । पत्रपत्रिका में प्रकाशित अपना समाचार तथा इन्टरव्यू उनकी प्राथमिकता में हंै । इसी तरह पार्टर्ीीे साथ सम्बन्धित समाचार और चित्र भी उतना ही रहता है । पारिवारिक तस्वीर और उस के बारे में जानकारी भी वह देते रहते हैं । लेकिन राजनीतिज्ञ होते हुए भी संक्षिप्त और मौलिक विचार उन के फेशबुक में नहीं मिलता । उनके द्वारा लिखे गए लम्बे लेख तथा अन्तरवार्ता ही उन के फेशबुक में अपडेट रहता है ।
इधर फोरम नेपाल के युवा नेता तथा सभासद् अभिषेकप्रताप शाह भी फेशबुक में हैं । व्यक्तिगत विचार तथा समसामयिक विषय उनकी प्राथमिकता में पडÞते हैं । मधेशवादी पार्टर्ीीे भीतर रहते हुए भी वे अपने को मधेशवाद में सीमित नहीं रखते हैं । उनकी अभिव्यक्ति से ऐसा संकेत मिलता है । ‘नेपाली ढाका टोपी’, जिसको अन्य मधेशवादी नेता पहाडी समुदाय का प्रतीक मानते है और जो राष्ट्रीय पोशाक में से एक है, पहने हुए फेशबुक की प्रोफाइल तस्वीर भी इस का एक उदाहरण है । इसी तरह नेपाली क्रिकेट टीम को खेल शुरु होने से पहले सम्बोधन करते हुए उन्होंने कहा है- ‘जैसे भी हो नेपाली टीम को जीतना जरूरी है । जय पशुपति नाथ ।’ वैसे तो टी ट्वान्टी क्रिकेट के सम्बन्ध में सभी मधेशी और पहाडÞी समुदाय ने अपने को सम्बन्धित और गौरवान्वित महसूस किया है ।
मधेशवादी प्रमुख नेतागण उपेन्द्र यादव, महन्थ ठाकुर, राजेन्द्र महतो, हृदयेश त्रिपाठी, अनिल झा, राजकिशोर यादव आदि ने अपना-अपना फेशबुक आइडी बनाया है । उनमें से अनिल झा, राजकिशोर यादव कभी-कभार अपडेट करते है । लेकिन अन्य नेतागण का फेशबुक अपडेट नहीं मिलता । कुछ प्रमुख नेताओं का अपडेट कभी-कभार मिलता है, लेकिन वह अपडेट वे खुद अपने हाथ से नहीं करते, उनके अपडेट से इसका संकेत मिलता है । ऐसे नेताओं के अपडेट में पार्टर्ीीे कार्यक्रम और तस्वीर होते हैं ।
यह तो हर्ुइ राजनीतिक व्यक्तित्व की बात । लेकिन फेशबुक चलाने में राजनीतिज्ञ से ज्यादा पत्रकार दिखाई देते हैं । पत्रकार के फेशबुक स्टेटस से इस बात की पुष्टि होती है । इसी तरह उद्योगपति, कलाकार, साहित्यकार भी सामाजिक सञ्जाल में लगे हुए है । विशेषतः सामाजिक सञ्जाल में नयी पीढÞी का वर्चस्व दिखाइ देता है । पुरानी पीढÞी इस में कम ही दिखाइ देती है । इमेल, इन्टरनेट चलाने वाली पुरानी पीढÞी में से कुछ ने तो अपने को सामाजिक सञ्जाल फेशबुक और ट्वीटर से दूर ही रखा है । उदाहरण के लिए लम्बे समय से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार रामाशीष और सुकेश्वर पाठक को लिया जा सकता है । ये दोनों इमेल-इन्टरनेट अच्छी तरह चलाते हंै । लेकिन उन्होंने अभी तक फेशबुक आइडी बनाया नहीं है । पत्रकार सुकेश्वर पाठक कहते है- ‘अपनों के साथ सर्म्पर्क करने के लिए टेलिफोन है ही, मुझे फेशबुक की क्या आवश्यकता -‘
लेकिन नई पीढÞी के पत्रकार सामाजिक सञ्जाल से थोडÞी देर के लिए भी दूरी नहीं रख पाते । प्रायः सभी पत्रकार कुछ न कुछ अपडेट करते रहते है । इनके अपडेट में प्रायः राजनीतिक पार्टर्ीीथा उन की गतिविधियों के प्रति आक्रोश मिलता है । लेकिन कुछ पत्रकार अपनी व्यक्तिगत गतिविधि में ही ज्यादा केन्द्रीत रहते हैं । उदाहरण के लिए वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र मिश्र को ले सकते हैं । वह अभी अपनी ही संस्था ‘हेल्प नेपाल’ की गतिविधियां अपडेट कर रहे हैं । लेकिन देश के समसामयिक विषय में भी उतनी ही रुचि उन में है । मार्च २४ को अपने फेशबुक अपडेट में उन्होंने कहा है- ‘विकसित देशों में नेता लोग दुख झेलते है और जनता सुख पाती है । लेकिन नेपाल जैसे देशों में जनता दुख भोगती है और नेता लोग ऐश फरमाते हैं ।’
खिलबहादुर भण्डारी एमाओवादी पार्टर्ीीे निकट पत्रकार माने जाते हैं, यह बात वह भी खुल्लम खुल्ला स्वीकार करते हैं । लेकिन उन का अपडेट देखने से लगता है कि वे माओवादी कें कट्टर विरोधी हैं । मार्च १७ के अपडेट में वे कहते हैं, ‘अब नेपाल में परीक्षण के लिए एक ही नेता बाकी है- चित्रबहादुर केसी । अन्य सबों की परीक्षा हो चुकी । अन्य नेता हम यह करंेगे, वह करेंगे कह कर सिर्फअपनी जगहंर्साई करते हैं ।’ उन को माओवादी विरोधी कहने वालों को वे जवाव में कहते हैं, ‘नेतागण खराब हो गए तो पार्टर्ीीेडक्वार्टर में विस्फोट करेंगे, लेकिन अपने पुराने घर को छोडÞ कर मैं कहीं नहीं जाऊँगा ।’ पार्टर्ीीति आस्थावान होते हुए भी भण्डारी खुल कर माओवादी का विरोध करते हंै । इसी तरह माओवादी पार्टर्ीीे भातृ संगठन द्वारा किया गया ‘उपत्यका बन्द’ कार्यक्रम का विरोध करते हुए मार्च १९ में वे लिखते हैं- ‘आन्दोलन कहने का मतलब सिर्फबन्द और चक्काजाम ही होता है क्या – नेतागण को पकडÞ लें, घेराबन्दी करें, उन लोगों के रास्ते बन्द कर दंे, बानेश्वर स्थित संविधानसभा भवन घेर लंे, सिंहदरबार घेर लंे, नेतागण मुँह काले करें । सिर्फबन्द ! बन्द !! बन्द !!! ऐसा नहीं चलेगा । बन्द मर्ुदावाद !’ इस प्रकार का अपडेट उन के फेशबुक में ज्यादा ही पढÞने को मिलता है ।
इसी तरह मधेशी पत्रकार के रूप में परिचित पत्रकार वीरेन्द्र केमए भी खूब फेशबुक अपडेट करते हैं । उनके अपडेट में समाचारमूलक खबरें ज्यादा रहती हंै । उनका कुछ अपटेड देखने से लगता है कि देश और विदेश में हर्ुइ महत्वपर्ूण्ा घटना का पता उन्हें पहले ही चल जाता है । । किसी भी घटना का सत्यतथ्य पता लगाने से पहले ही अपडेट हो जाता है । मलेसिया से बेइजिङ के लिए रवाना हुए प्लेन खो जाने के बाद कुछ समाचार माध्यमों का हवाला देकर समय से पहले ही अपडेट होना इस का उदाहरण है । इसी तरह आर्श्चर्यजनक और दर्ुलभ तस्वीर अपडेट करना भी उनका शौक है । लेकिन उस तस्वीर के बारे में लिखे हुए सन्देश को पढÞने पर पाठक दिग्भ्रमित होते हैं । पता नहीं चलता कि यह तस्वीर किस देश की है – हो सकता है कि यह उनका वौद्धिक मनोरंजन हो । अपने व्यक्तिगत चित्र अपडेट करना भी उन की प्राथमिकता में पडÞता है । नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास और भारतीय राजनीति के सम्बन्ध में भी वे अपडेट करते रहते हैं । मधेशी पत्रकार के रूप में परिचित होते हुए भी वह अपने को सिर्फमधेशवादी में सीमित रखना नहीं चाहते । उनके अपडेट से भी इस बात का संकेत मिलता है । मधेशवादी दलों की आलोचना भी वह खूब करते हैं । उदाहरण के लिए मार्च २५ में उन्होंने अपने अपडेट में कहा है- ‘दूसरे सविंधानसभा-निर्वाचन में पराजित होने के बाद, मधेशीवादी दलों की कोई भी गतिविधि देखने को नहीं मिल रही है । मधेशी नेतागण कहा गुप्तबास कर रहे है -‘
महिला पत्रकार बबिता बस्नेत भी सामाजिक सञ्जाल में खूब सक्रिय हैं । अपने साथ जुडेÞ कार्यक्रमों की गतिविधि, महिला सम्बन्धित समाचार, समसामयिक विषय आदि में उनकी टिप्पणी रहती है । इसके साथ अपने नाम से प्रकाशित लेख-रचना का लिंक भी उनके फेशबुक में अपडेट होते हंै । उन का कुछ अपडेट व्यंग्यात्मक और पढÞने के लायक रहता है । मार्च १७ में बस्नेत ने लिखा है- ‘बहुत दिन हुए नेपाल में बन्द-हडताल नहीं हुआ था । ऐसा लग रहा था, जैसे कुछ खो गया हो । लेकिन बन्द ने उस एकरसता को निरस्त कर दिया । जनता को लक्षित कर बन्द करने से बेहतर है, निर्ण्ाायक लोगों को बन्द करना ।’
पत्रकारों में दिनेश यादव का अपडेट पठनीय होता है । उन का अपडेट साहित्यिक, उपदेशमूलक तथा दर्शानिक रंग दिखाई पडÞता है । पिछली बार चिरपरिचित दार्शनिक, लेखक तथा साहित्यकारों के कथन उन्होंने अपने फेशबुक अपडेट बनाया है । इस में कुछ उनका मौलिक भी होता है, जो प्रायः सभी व्यक्ति के लिए पढने लायक माना जाता है । इस तरह का अपडेट यादव दिन में ४-५ बार करते हंै । उदाहरण के लिए उन्होंने मार्च २५ में ऐसा अपडेट ७ बार किया है । वे प्रायः हिन्दी में अपडेट करते हैं । उस में से एक अपडेट है- ‘जब तालाव भरता है, तब मछलिया चीटियों को खाती हैं और जब तालाव खाली होता है, तब चीटियां मछली को खाती हैं । मौका सब को मिलता है, बस अपनी बारी का इन्तजार करो ।’ इसी तरह दूसरे अपडेट में वे कहते हैं- ‘
काम करो ऐसा कि पहचान बन जाये ।
हर कदम ऐसा चलो कि निशान बन जाये ।
यहाँ जिन्दगी तो सभी काट लेते हैं,
जिन्दगी जियो ऐसी कि मिसाल बन जाये ।”
इस तरह के अपडेट उनके पास अनेक हैं ।
इसी तरह के अपडेट कुछ समय पहले पत्रकार निमेश कर्ण्र्ााी करते थे । लेकिन अब वे रुक गए हैं । अब वे व्यक्तिगत गतिविधि और तस्वीर ज्यादा अपडेट कर रहे हंै । पत्रकार होने के चलते उन्हें अनेक कार्यक्रमों में आना जाना पडÞता है । फलस्वरुप इसका सदुपयोग करते हुए तस्वीर अपडेट होता रहता है । पत्रकारिता पेशा को लेकर उन्होंने अपने पेज में कहा है- ‘पत्रकारिता सिर्फशौक के लिए नहीं अपनाई जाती । यह अत्यन्त ही गहन, जिम्मेदारीपर्ूण्ा और जोखिमपर्ूण्ा पेशा है -ऐसा मेरा अनुभव है ।’ इसी तरह मधेशी पत्रकार मोहन सिंह भी कम ही अपडेट करनेवाले पत्रकारों में से हंै । वे समाचारमूलक विषयों को ज्यादा अपडेट करते हैं । तस्वीर तथा विभिन्न वेभसाइट का लिंक भी उनके फेशबुक में ज्यादा ही मिलता है । विशेषतः मधेश से जुडÞे समाचार उन की प्राथमिकता में आते हैं । व्यक्तिगत समाचार तथा तस्वीर अपडेट करने में धर्मेन्द्र झा, राजेश अहिराज भी हैं । राजेश अहिराज कभी कभार मधेश के बारे में संक्षिप्त टीका-टिप्पणी भी करते हैं । विचार के दृष्टिकोण से सशक्त माने जानेवाले पत्रकार चन्द्रकिशोर झा हैं । लेकिन उन के फेशबुक में इस तरह का कुछ भी अपडेट नहीं मिलता । वह अपने द्वारा लिखे गए लेखों का लिंक ज्यादा अपडेट करते हैं । इसी तरह मधेश के दूसरे सशक्त पत्रकार सुरेशकुमार यादव भी हैं । वे फेशबुक में संक्षिप्त मंतव्य कम ही व्यक्त करते हंै । निजी ब्लाँक भी चलाने वाले यादव फेशबुक में भी वही ब्लाँक अपडेट करते हैं ।
मधेशी समुदाय में अच्छी खासी पहचान वाले साहित्यकार तथा गीतकार विनीत ठाकुर का फेशबुक देखने से लगता है कि वे मैथिली भाषा-साहित्य के उत्थान में ज्यादा ही सक्रिय हैं । उनके अपडेट से लगता है- मैथिली भाषा-साहित्य का संरक्षण करने का ठेका उन्होंने ही लिया है । ठाकुर प्रायः सभी अपडेट मैथिली भाषा में ही करते हैं । जिस में भी मैथिली लिपि, कला, भाषा और साहित्य के बारे में लिखा होता है । फेशबुक के जरिए वे मैथिली लिपी तथा भाषा कैसे लिखा जाए, यह सिखाते रहते हंै । इसी तरह ठाकुर मिथिला क्षेत्र में होने वाले राजनीतिक तथा सामाजिक गतिविधि भी अपडेट करते हैं ।
लेकिन साहित्यकार रामदयाल राकेश का फेशबुक देखंे तो उल्लेख करने के लिए लायक कुछ भी नहीं मिलता । गत फेबु्रुअरी २१ के बाद उन्होंने ने अपना फेशबुक अपडेट नहीं किया है । लेकिन साहित्यकार तथा पत्रकार शिवानी सिंह थारु का फेशबुक पढÞने में मजा आता है । समसामयिक राजनीति तथा सामाजिक विषय में व्यंग्यात्मक और कडÞा प्रहार करना उनकी खूबी है । शिवानी के हर लेखन में साहित्यिक सुवास होता है और वह पढÞने लायक रहता है । ‘बलात्कारी पुरुषों का लिंग काटना चाहिए’ कह कर किया गया फेशबुक अपडेट ज्यादा ही चर्चित रहा । सामान्य विषयों को भी वे अपने अनुभव जोर कर अच्छी तरह प्रस्तुत करती हैं । उदाहरण के लिए हाल ही में सम्पन्न एसएलसी परीक्षा के सर्न्दर्भ को लेकर उन्होंने लिखा है- ‘स्कूल में पढÞते समय दिया गया एसएलसी लगता था कि यह अन्तिम परीक्षा है । लेकिन अब आ कर महसूस हो रहा है कि जिन्दगी में बार बार एसएलसी देना पडÞता है ।’ देश के समसामयिक राजनीति, खेल, साहित्य, समाज हरेक विषय में उन की टिप्पणी महत्वपर्ूण्ा और पठनीय होती है । काठमांडू में पानी कीे समस्या को देख कर शिवानी ने पिछली बार किए गए अपडेट में ऐसा राजनीतिक व्यंग्य किया है- ‘होली खेलने में पानी नहीं मिलने के कारण एक व्यक्ति होली खेलते हंै, और अन्य तीन लोग उस को देख कर मजा लेते हैं । लेकिन हमारे कम्युनिष्ट राजा थोडÞी सी दूरी में रहे धादिङ तक के लिए होलिकप्टर चार्टड करके जनता को दर्शन देने के लिए जाते हंै ।’ यह व्यंग्य नेकपा एमाले के नेताओं के प्रति लक्षित है । अन्य पार्टर्ीीथा देश की समसामयिक राजनीति के प्रति भी शिवानी का दृष्टिकोण संक्षिप्त और चुटिला रहता है । कुछ समय पहले सम्पन्न बिमस्टेक सम्मेलन और वहाँ नेपाल की सहभागिता को लेकर वे कहती हैं- ‘देश में बिजली नहीं है, पीने का पानी नहीं है, पेट्रोल नहीं है, ‘भाँड में जाए’ इस तरह का बिमस्टेक सम्मेलन । लगता है- ऐसे आर्थिक विकास के बारे में बढÞचढÞ कर छपने वाले समाचारपत्रों को मैं ट्वाइलेट पेपर बना दूं !’ उन का हर अपडेट इसी तरह संक्षिप्त और मार्मिक रहता है ।
पत्रकार तथा लोकगायिका कोमल ओली अपने व्यक्तिगत चित्र अपडेट में ही मस्त हैं । अनेक मोडलिङ पोज में फेशबुक में वे दिखाई पडÞती हैं । पिछली बार जापान भ्रमण के चित्रों को उन्होने अपडेट किया है । इधर कलाकार हरिवंश आचार्य भी ज्यादा फेशबुक अपडेट नहीं करते हैं । उन्हों ने पिछली बार नेपाली क्रिकेट टीम को बधाई दी है । लेकिन कलाकार केकी अधिकारी, निशा अधिकारी, प्रियंका कार्की आदि दूसरी पीढÞी के कालाकार अच्छी तरह फेशबुक अपडेट करते रहते हैं ।
पर्ूव प्रशासक तथा मुख्य सचिव रामेश्वर खनाल का फेशबुक भी पढÞने लायक रहता है । वे बौद्धिक विषयों से भरे होते है । लेकिन खनाल कम अपडेट करते हंै । खुद के साथ जुडेÞ हुए समाचार, लेख तथा अन्तरवार्ता के लिंक उनके अपडेट में ज्यादा मिलते हैं । जब तक नेपाल में आर्थिक विकास नहीं होता, तब तक यहाँ राजनीति उंचाई हासिल नहीं होगी, ऐसी धारणा उन की रहती है । उन्होंने पिछली बार सेतोपाटीडटकम में प्रकाशित अपने लेख का लिंक अपडेट किया है । जहाँ उन्होंने कहा है- ‘नेपाल में पेट्रोलियम पदार्थ का मूल्य इससे पहले ही बढÞना चाहिए था, लेट हो चुका है । फिर जितना बढÞना चाहिए था, उतना नहीं बढÞा । सामान्यतः उन का यह कथन र्सवसाधारण जनता विरोधी लग सकता है । लेकिन खनाल के दृष्टिकोण में मूल्य बढÞाने के कारण दर्ीघकालीन रूप में र्सवसाधारण जनता को ही लाभ होता है । इस के लिए क्या करना चाहिए, उन्होंने अपने लेख में लिखा है ।
उद्योगपति तथा साहित्यकार बसन्त चौधरी भी फेशबुक अपडेट करते रहते हैं । उन के अपडेट में व्यक्तिगत, व्यावसायिक तथा साहित्यिक गतिविधि ज्यादा मिलती है । फेशबुक अपडेट से लगता है कि राजनीति के प्रति उन की खास रुचि नहीं है । दार्शनिक तथा साहित्यिक अपडेट करने में उनकी दिलचस्पी है । उदाहरण के लिए उनके अपडेट में रहे ये वाक्य देखा जाए- ‘तकलीफ किस की जिन्दगी में नहीं आती – कोई इसे अश्को में छुपाते है, कोई हंस कर पी जाते हैं ।’ दूसरे व्यवसायी मिथिलेशकुमार झा भी खूब फेशबुक चलाते है । लेकिन उन के फेशबुक में सिर्फधार्मिक तस्वीरें रहती हैं । कभी कभार वे अन्य विषय अपडेट करते है । लेकिन दिन में ४ से ५ बार तक धार्मिक तस्वीरें रहती हैं । जिन में कृष्ण और शिव की तस्वीरें ज्यादा होती हैं । इससे लगता है कि वे कृष्ण और शिव के परमभक्त हैं !
क्या है फेशबुक –
फेसबुक संचार की दुनिया में लंबी छलांग है । यह एक ऐसा सामाजिक मंच है, जिस पर आप व्यापार, संवाद, संचार, विचार-विमर्श, राजनैतिक प्रचार, सामाजिक गोलबंदी आदि कर सकते हैं । यह ऐसा मंच है जो व्यक्तिगत और सामाजिक एक ही साथ है । यह ऐसा मंच भी है जो संचार के साथ-साथ आपके ऊपर नजर भी रखता है । यह सूचनाओं का साझा सामाजिक मंच है । फेसबुक के यूजरों की संख्या एक अरब से ऊपर पहुँच चुकी है । फेशबुक की स्थापना अमेरिकी नौजवान मार्क जुकेर्रबर्ग ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर २००४ फरवरी ४ में की थी । अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हर्ुइ फेशबुक नेपाल, भारत सहित अन्य देशों में उससे भी ज्यादा तेजी से लोकप्रिय हो रही है । माना जाता है कि नेपाल में २५ लाख से ज्यादा फेशबुक के यूजर हैं ।

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