क्या आने वाले दिनों में, मधेश में ही अल्पसंख्यक हो जाएँगे मधेशी ?

क्या आने वाले दिनों में, मधेश में ही अल्पसंख्यक हो जाएँगे मधेशी ?

गंगेश मिश्र, कपिलवस्तु
हाँ, लगता तो यही है । आने वाले दिनों में मधेश में ही अल्पसंख्यक हो जाएगा मधेशी। पूर्व पश्चिम राजमार्ग निर्माण के दौरान व्यापक रूप में जंगल को काटा गया साथ ही एक पूर्व नियोजित साज़िश के तहत, राजमार्ग के दोनों किनारों पर पहाड़ी समुदाय के लोगों को बसाने के लिए भूमि आवंटित की गयी। इस समय राजमार्ग पर पहाड़ी समुदाय का वर्चस्व है, और ऐसे में नगरपालिका का निर्माण कर, सरकार राजनैतिक चाल चल रही है। सोचने वाली बात है, तुलनात्मक दृष्टि से यदि देखा जाय तो एक नगरपालिका की जनसंख्या बराबर करीब तीन गाँव विकास समिति ( गा।वि।स। ) की जनसंख्या होगी।जो मधेशी व अन्य गैर पहाड़ी समुदाय के लिए बहुत घातक सिद्ध होगी।
जहाँ सरकार को स्थानीय निकाय को बहाल कर स्थानीय विकास को पटरी पर लाने की आवश्यकता थी, पर ऐसा न करके सरकार नगरपालिका की संख्या बढ़ाने में लगी है। लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका का निर्माण एक गुरु(योजना के तहत किया जा रहा है, जहाँ बड़े पैमाने पर पहाड़ी समुदाय के लोगों को बसाने की योजना है। इस ओर हमारे मधेशी नेतागण अवश्य ध्यान दें, अन्यथा इस भूल की बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है।
चाहे जिस किसी की भी सरकार रही हो, पर निशाने पर सबके मधेशी समुदाय ही रहा।
लोग कमाने के लिए विदेश जाते हैं, पर मधेश में ऊपर से कर्मचारीगणस घूसखोरी से कमाई करने आते हैं। क्रान्तिकारी भूमिसुधार के नाम पर मधेश की उर्वर भूमि को हथियाने की कई कोशिशें हो चुकीं हैं, और ऐसे ही होती रहेंगी।सचेत युवाओं को अब उठ खड़ा होना होगा, कंधे से कंधा मिलाकर अपने अधिकार के लिए, डट कर लड़ना होगा।

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