क्या आप फियर ऑफ मिसिंग आउट के शिकार हैं ?

२२ अक्टुवर
क्या आपको facebook स्टेटस अपडेट किए बिना नहीं रहा जाता ?
अगर इस प्रकार की आदतें हैं, तो आप फोमो यानी कि फियर ऑफ मिसिंग आउट के शिकार हैं।
 यदि आप whatsapp, facebook, twitter के बिना नहीं रह पाते, और कुछ ही समय में अपने फोन को स्क्रॉल करते रहते हैं, तो आप फोमो यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट के शिकार हैं।
 आजकल लोगों को सोशल मीडिया की गहरी आदत हो गई है, ऑफिस में या घर में बिना मोबाइल के नहीं रहा जाता। हर समय दिमाग में यह चलता रहता है कि facebook पर आज क्या नया आया है?
 किसी के पोस्ट या फोटो पर लाइक और कमेंट आते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है, इस प्रकार के लोग यदि ज्यादा देर सोशल मीडिया से दूर रहते हैं तो मन बेचैन हो उठता है।

क्या है फोमो?

फोमो एक प्रकार का सोशल एंजाइटी ही है, जिसमें इंसान इंटरनेट से दूर होने पर ऐसा लगता है, जैसे वह पूरी दुनिया से कटा हुआ है । फोमो के शिकार होने पर सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ शेयर करने का दबाव बना रहता है । ऐसे लोग सोशल मीडिया पर यह दिखाना चाहते हैं कि उनका जीवन कितना आनंदमय है । कई लोगों को सोशल मीडिया से दूर होते ही ऐसा लगने लगता है जैसे उनकी पहचान कम हो रही है, ऐसे लोग आत्मसम्मान को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, इसलिए सोशल मीडिया से लगातार जुड़े रहते हैं।

जानिए क्या है फोमो के नुकसान

 मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि फोमो की समस्या तब और बढ़ जाती है , जब आप सोशल मीडिया पर खुद को दूसरों से आँकने लगते हैं , अगर आपके लाइक्स या कमेंट किसी दूसरे शख्स से कम है , तो आपको बुरा लगने लगता है, ऐसे मे मन में फियर ऑफ मिसिंग आउट की स्थिति जन्म लेती है । फोमो का प्रभाव ऐसे लोगों में भी पड़ता है जिन्हें वास्तविक जीवन में टेंशन नहीं होता है, ऐसे लोग वर्चुअल दुनिया में खुशियां ढूंढते हैं इसी के साथ फोमो के शिकार लोग वास्तविक जीवन से बिल्कुल अलग हो जाते हैं और प्रतिक्रिया करना उनके बस में नहीं होता है।

कैसे सुधारें आदत

 वर्चुअल दुनिया से बाहर निकले-

  इससे उबरने के लिए सामाजिक बनने की कोशिश करें, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताए, नकली जिंदगी से निकलकर असली जिंदगी में जियें और कुछ ही समय में आप जल्दी ही फोमो से मुक्त हो जाएंगे।
 भारत के जाने-माने ब्लॉगर भी फोमो के शिकार थे। उन्होंने इस स्थिति से उबरने के लिए सोशल मीडिया से 1 महीने की छुट्टी लेने का प्लान बनाया । एक महीने तक उन्होंने अपने मोबाइल को केवल कॉलिंग के लिए प्रयोग किया । इसके अलावा उन्होंने पूरा वक्त अपने बेटे और परिवार के साथ बिताया, एक महीने बाद उनकी जीवनशैली में जो बदलाव हुआ, वह वाकई चौकाने वाला था, हर मिनट मोबाइल देखने की उनकी आदत छूट गई थी ।
    अगर आप भी फोमो के शिकार हैं तो अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर आप इससे उबर सकते हैं । जब भी टहलने निकले अपना फोन साथ लेकर ना जाइए, मोबाइल हाथ में रखने के बजाय कोई अच्छी सी किताब रखें। सोते समय फोन साइलेंट मोड में रखें, सुबह उठकर कुछ देर मेडिटेशन करें। 2 हफ्ते में एक बार परिवार के साथ बैठकर खूब बातें करें, आप अवश्य ही इसके शिकार से मुक्त हो जाएंगे।
    दोस्तों, मोबाइल, सोशल साइट्स का प्रयोग आवश्यकता के लिये करिये, इसके आदी मत बनिए, अपनी वास्तविक पहचान बनाइये, काल्पनिक नहीं।
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