क्या इस तरह की मान्यता का पालन जरुरी है ?

मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, ३ जून

आज हम इस युग में जी रहे हैं जहाँ इंसान चन्द्रमा व मंगल ग्रह पर जाकर सैर करने की बात कर रहे हैं और अभी भी कुछ ऐसी आदिवासी प्रजातियां अस्तित्व में हैं जो ऐेसी मान्यताओं पर विश्वास करती हैं जिसे सुनकर हमारी आँखों के सामने अंधेरा छा जाएगा ।

papua

ऐसी ही एक आश्चर्यजनक व अनूठी परम्परा का पालन करने वाली इण्डोनेशियन पापुआ की “दानी” आदिवासी है जो जी तो रहे हैं पर उस परम्परा के साथ जो मानव जाति के लिए कलंक के समान है । विडम्बना तो यह है कि यहाँ भी परम्परा मार के रूप में महिलाओं के लिए है । इस आदिवासी समुदाय में परिवार के मुख्य सदस्य की मृत्यु के बाद महिलाएँ अपनी अंगुली को काट देती हैं । सिफ इतना ही नही इसके साथ ही महिला के चेहरे पर मिट्टी भी लेप दी जाती है । समुदाय का विश्वास है कि इस प्रथा से मरने वाले की आत्मा को शान्ति मिलती है । सबसे पहले अंगुली को धागे से बांध कर रखा जाता है फिर काटने की प्रथा की समाप्ती के पश्चात उस कटी हुई अंगुली को जलाया जाता है । सरकार के रोक लगाने पर भी समुदाय के द्वारा इस प्रथा की समाप्ति नही हुई है ।

मरने वाला मर गया, यह शोक क्या कम है एक परिवार के लिए जो एक और शोक दिया जाता है, वह भी सिर्फ महिलाओं को । मृतक का दुःख क्या सिर्फ महिलाओं को ही है । क्या यह प्रताड़ना नही है ? एक तरफ हम समानता का झण्डा फैलाते हैं दूसरी तरफ इस तरह की मान्यताओं का पालन भी होता है ।

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