Sat. Sep 22nd, 2018

क्या डा. राउत पेशेवर अपराधी हैं ?

ck raut i scश्वेता दीप्ति, काठमाणडू,१९ सितम्बर।एक सुखी सम्पन्न व्यक्ति अपने सफल कैरियर को छोड़ ना जाने किस मोह से ग्रस्त होकर अपने देश लौटता है ? १४ लाख मासिक कमाने वाला व्यक्ति क्यों अपनी सम्पन्नता को ठोकर मार कर दर दर भटकने की राह चुनता है ? क्या देश को या फिर मधेश को इसका जवाब नहीं ढूँढना चाहिए ? विदेशों के प्रति नेपाली जनता की मोह को सभी जानते हैं । काम कोई भी करना पड़े पर विदेश जाने की ललक होती है । ऐसे हालात में डा.सी.के राउत का अपने देश की मिट्टी को चुनना क्या मायने नहीं रखता ? यह जाहिर नहीं करता कि उन्हें अपनी मिट्टी प्यारी है ? वर्षों से मधेश ने जो झेला है और आज तक झेल रहा है क्या इसके प्रति मधेशी जनता को जगाना अपराध है ? लोगों को उसके अधिकार के प्रति सचेत करना अपराध है ? भले ही आज डा. राउत की मांग अनावश्यक लग रही हो पर सरकार और सत्ता की जो नीति मधेश के प्रति है उसको देखकर तो लगता है कि आगामी दिनों में यही मांग अत्यावश्यक हो जाएगी । इतिहास साक्षी है कि ऐसा होता आया है और अंततोगत्वा सत्ता को झुकना पड़ा है । विलगाव कोई नहीं चाहता पर इसे उकसाने में सत्ता का ही हाथ होता है ।

आज न्यायालय परिसर में हथकड़ी में जकड़े डा. राउत को देखकर यह लगा कि क्या डा. राउत पेशेवर अपराधी हैं ? एक व्यक्ति जो अहिंसा के राह पर चलकर लोगों के बीच अपनी बातें रखता आया है उसे इस तरह पेश किए जाने का औचित्य समझ में नहीं आया । इसी लोकतंत्र में कई चेहरे ऐसे हैं जिन्होंने कई घर के चिराग को उजाड़ा, कई घर ऐसे हैं जो अपने लापता सगे को आज भी ढूँढ रहे हैं, आँखें पथरा गई हैं पर उन्हें न तो सरकार और न ही कानून जवाब दे रहा है । अस्पताल की शैया पर मौत से जूझ रहे हैं पर सरकार का ध्यान उधर नहीं है । पर एक निहत्था व्यक्ति इतना खतरनाक हो गया है कि उसे सख्त पहरे में रखने की आवश्यकता महसूस हो रही है । अपने लोगों तक अपनी बात पहुँचाना इतना गम्भीर अपराध है तो निःसन्देह सजा मिलनी चाहिए और हर किसी को मिलनी चाहिए, क्योंकि यह अपराध किसी ना किसी रूप में हर कोई कर रहा है । देखें हमारा कानून कितना न्यायशील है ।

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