क्या बी.पी.,भट्टराई, त्रिभुवन,सभी “भारत के वफादार कुत्ते” थे ?

गंगेश मिश्र, कपिलवस्तु, 21 नोभेम्बर ।

काश ! आपने, अपने पिता जी से पूछा होता, भारत का ” वफादार कुत्ता ” कौन है ?

” मधेशवादी कुत्तों की , मशहूर वफादारी है । “

कुटिलता लोमड़ियों की, पैदायशी बिमारी है।

mahilaइस देश का राज- परिवार हो चाहे राजनेता,  निर्वासिन के दौरान उसे भारत में ही शरण  मिली है। कोइराला परिवार का भारत से बहुत पुराना नाता है, पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का जन्म भारत में ही हुआ था। सुशील कोइराला, कृष्ण प्रसाद भट्टराई, महाराजा त्रिभुवन , ये सभी भारत में निर्वासित जीवन बिता चुके हैं।क्या ये सभी “भारत के वफादार कुत्ते” थे या नहीं ? काश ! आपने, अपने पिता जी से पूछा होता, भारत का ” वफादार कुत्ता ” कौन है ? तो मधेशवादी दल के नेताओं को ऐसा कहने की हिमाकत नहीं करतीं।

आग में तेल डालने का कार्य, ना करें तो बेहतर है। कभी धोती, कभी भारती, तो कभी कुत्ता ; ऐसी उपमाओं से अलंकृत ‘मधेशी’ सदियों से आप लोगों के द्वारा अपमानित होता रहा है। इसलिए आप अपनी सीमा को पहचानिए, अपने हद में रहिए । रही बात कुत्तों की, तो आगे-आगे देखिए होता है क्या ?

दूसरों पर उँगली उठाने से पहले, सोचना अपरिहार्य है।

ऐसे में एक कहावत है,….

” सुपवा हँसै तो हँसै, चलनियाँ काहे हँसै; जेकरे बहत्तर छेद। ”

मधेश के आन्दोलन को दबाने के लिए सेना परिचालन की तैयारी कर चुकी सरकार को याद  रखना होगा, मुट्ठी भर माओवादियों ने जो अब सरकार में हिस्सेदार हैं। इस देश के सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे। फिर इस सरकार को हिसाब लगा लेना चाहिए कि जब मधेश की पूरी जनता सडकों पर आ जाएगी तो , सौ मधेशी के हिस्से में सेना का एक जवान आएगा। ऐसा ना हो कि गृहयुद्ध छिड़ जाय ।

बुद्ध के इस देश को लाशों का देश ना बनाओ, जीयो और जीने दो; जीवन का यही सिद्धांत है।

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