Aliexpress INT

क्या मधेशी दल सिर्फ सहमति पर हस्ताक्षर और समर्थन देने के लिए है : श्वेता दीप्ति

 
श्वेता दीप्ति, काठमांडू,८ जून | एकबार फिर सत्ता परिवर्तन हो चुका है । नया नेतृत्व हमारे सामने है किन्तु अगर विश्लेषण किया जाय तो सिर्फ नाम परिवर्तित हुआ है । माओवादी की जगह काँग्रेस और प्रचण्ड की जगह देउवा । बाकी जो इर्दगिर्द मंत्रियों का समूह है उन्हें एक नए पद के साथ पुनः सामने लाया जाएगा । क्योंकि उन्हें मंत्रीपद और उसकी सुविधा चाहिए ताकि उनका कल लगातार सुरक्षित रहे । सच तो यह है कि, नेपाल की राजनीति में वर्तमान में जो हुआ है उसे परिवर्तन का नाम नहीं दिया जा सकता, यह एक राजनैतिक सौदा था जो पहले से तय था । एक निश्चित अवधि के बाद प्रचण्ड का हटना तय था चाहे उनका कार्यकाल अच्छा हो या बुरा । अगर उनकी कार्यवधि पर नजर डाली जाय तो उनका अधिकांश वक्त दूसरों को, खास कर एमाले को मनाने में गुजरा है । जिन शर्तों के साथ उन्हें मधेशी मोर्चा (राजपा नेपाल) का समर्थन मिला था उसे पूरा करना आसान नहीं था यह सभी जानते थे क्योंकि समीकरण साथ नहीं दे रहा था । इसी समीकरण को मिलाने की कोशिश में उनका वक्त गुजरा और एक निष्कर्षविहीन परिणाम के साथ उन्होंने अपने वादे के अनुसार अपना पद छोड़ दिया । यहाँ उनकी ईमानदारी को मानना होगा क्योंकि, अपनी भद्र सहमति को उन्होंने अभद्र नहीं होने दिया । 
इन सभी परिस्थितियों के बीच एक सवाल सामने यह आता है कि एक बार फिर कल का मधेशी मोर्चा और आज का राजपा नेपाल ने आखिर किस सोच के तहत सरकार को समर्थन दिया है ? क्या देउवा अपने बलबूते पर मधेश की माँग को सम्बोधित कर सकते हैं ? क्या काँग्रेस सच में मधेश मुद्दों को लेकर गम्भीर है ? क्या उसके पास एमाले को मधेश के पक्ष में लाने की कोई मजबूत नीति है ? और अगर है तो इस नीति का कार्यान्वयन प्रचण्ड सरकार में क्यों नहीं किया गया ? आखिर काँग्रेस उस वक्त भी सत्ता में एक मजबूत स्थिति में थी । इन सारी परिस्थितियों में मधेश का सवाल राजपा से जरुर है कि समर्थन क्यों ? आखिर सरकार बचाने या बनाने के लिए ये तारणहार क्यों बन जाते हैं ? इनके लिए बाह्य दवाब मायने रखता है मधेश ? राजपा नेपाल मधेश की माँग को विश्वस्तरीय क्यों नहीं बना पा रहे ? ऐसे कई सवाल मधेश की जनता को उद्वेलित किए हुए है जिनका जवाब उन्हें नहीं मिल रहा । देखा जाय तो आन्दोलन नहीं असहयोग की आवश्यकता है, परन्तु इसके विपरीत परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ये सत्ता के खेल में सहायक मोहरे ही बन जाते हैं । मधेश की जनता इनके साथ चलने को तैयार है, बशर्ते मधेश के हर घर तक ये पहुँचें । क्योंकि जिस मानसिकता से मधेशी जनता गुजर रही है, उसमें किसी तीसरे पक्ष का लाभान्वित होना तय है । नेतृत्व का एक स्पष्ट विजन जनता के मनोबल को बढाती है । मधेशी जनता इतनी मरतबा ठगी गई है कि, अपने नेता के हर कदम पर उन्हें शक होता है कि कहीं यह आत्मघाती तो नहीं ? पिछले दस वर्षों से यही क्रम चल रहा है । सम्भवतः इस बीच नौ प्रधानमंत्रियों के साथ मधेशी मोर्चा  मधेश की माँग पूरी कराने के लिए विभिन्न प्रधानमंत्रियों (जिसका सिलसिला २०६३ में गिरिजाप्रसाद कोइराला से शुरु हुआ था), के साथ कभी २२ बुँदे, कभी ४ बुँदे, तो कभी ८ बुँदे तो कभी तीन बुँदे सहमति करती आई है और सरकार में भागीदारी देती आई है, किन्तु परिणाम वही ढाक के तीन पात । आज फिर तीन बुँदों की सहमति के साथ सरकार को समर्थन किया गया है । जबकि सत्तासीन चेहरे वही हैं और उनकी मानसिकता भी वही है । परिस्थिति इंगित कर रही है कि कल भी कोई क्रांतिकारी परिवर्तन मधेश के हित में होने वाला नहीं है क्योंकि हर आने जाने वाली पार्टी सिर्फ सत्ता सुख भोगना चाह रही है । तो क्या सिर्फ मधेशी दल सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर करने और समर्थन देने के लिए है जो सिर्फ सरकार बनाने में अपना महत्तवपूर्र्ण योगदान देती आ रही है । समय समय पर उनके द्वारा यह वक्तव्य जारी होता रहा है कि हम सत्ता में रहकर अधिकार लेंगे पर जो होता है वह सामने है, जिसकी वजह से जनता यह सोचने पर विवश हो जाती है कि इन्हें सिर्फ सत्ता और भत्ता ही चाहिए ।
दूसरी ओर प्रमुख पार्टी एमाले के द्वारा मधेश मुद्दों को जिस तरह विखण्डन से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है और समुदाय विशेष इसका समर्थन कर रही है वह निःसन्देह भविष्य के लिए किसी सुखदायी परिणाम का संकेत नहीं है । समस्या जितनी बड़ी नहीं है इसका समाधान उतना ही संवेदनशील बना दिया गया है । राष्ट्र अगर एक परिवार है तो उसकी समस्याएँ अपनी होती हैं आयातीत नहीं । समग्र जनता की भावनाओं को अगर तरजीह नहीं दी गई तो एक अनिश्चित कल हमारे सामने है । देखना है कि जो समाधान गिरिजाप्रसाद कोइराला, पुष्पकमल दहाल प्रचण्ड, माधवकुमार नेपाल, झलनाथ खनाल, बाबुराम भट्टराई, सुशील कोइराला, केपी ओली  प्रधानमंत्री के पद पर रह कर नहीं कर पाए वो नए प्रधानमंत्री देउवा किस तरह कर पाते हैं ?

 

loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz