क्या मधेशी मसीहा बन रहे हैं सि.के. –

विनय कुमार:स्वराज निर्माण का एक सच्चा क्रान्तिकारी । नेपाली शासक वर्गाें से मुक्ति पाने की एक प्रतिज्ञा । गुलामी नहीं ‘अपनी मिट्टी पर अपना अधिकार’ की एक बुलन्द आवाज है – डा. सी.के राउत ।
डा. सी.के राउत ने जब संवैधानिक-राजनैतिक समिति तथा सहमति के अध्यक्ष डा. बाबुराम भट्टर्राई को राज्य से अलग होने का अधिकार -र्राईटस् टु सेप्रेसन) की मांग संविधान में सुनिश्चित करने का सुझाव दिया तब से सरकार को सर्रदर्द शुरु हो गया । सरकार ने डा. राउत का पीछा करना भी शुरु किया । इस के बाद आखिर दो/तीन दिन में ही मोरङ, रंगेली नगरपालिका ३ से शाम सवा ७ बजे दो गाडियों में आई पुलिस ने उन्हे गिरफ्तार कर लिया । पुलिस हिरासत में आने के बाद उन की रिहाई की जोरदार मांग पत्रकार, मानवअधिकारकर्मी, नागरिक समाज ने करना शुरु किया । सरकार नें राजद्रोह की सजा तक की बात उर्ठाई । लेकिन राउत के र्समर्थकांे ने मधेश के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी रिहाई के लिए पर््रदर्शन किया । अदालत के आदेशानुसार राउत को जेल चालान कर दिया गया । डा. राउत तीन महीना जेल में रहे । डा. राउत और उनके र्समर्थक नहीं घबराए, धर्ैय के साथ अपने मुद्देपर डटे रहे ।

डा सी केराुउत

डा सी केराुउत

डा. राउत अपनी इच्छा से मार्ग ८ गते विशेष अदालत से जमानत पर रिहा हुए और उन्होने मार्ग १० गते टंुडिखेल में आमसभा आयोजित करने का निर्ण्र्ाालिया । उसी के तहत अपने र्समर्थकों के साथ टुंडिखेल मे प्रवेश करते समय डा. राउत को फिर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । चांैकाने वाली बात यह थी कि मधेशी चेहरे से मिलतेजुलते चेहरे ने ही मधेशी को गिरफ्तार किया था । इस से सरकार की चरम रंगभेदी नीति भी स्पष्ट होती है । पुलिस हिरासत में राउत के साथ थर्ड ड्रि्री का व्यवहार भी किया गया, ऐसा सुनने में आया । इसी सिलसिले में इन्जीनियर दीपक साह का अपहरण हुआ और उन्हें डराया धमकाया गया, तथा शान्तिपर्ूण्ा जमघट करते समय पुलिस द्वारा लाठी चार्ज भी किया गया । साथ ही मिथिलेश सहनी, गगन मंडल, प्रकाश पासवान, पप्पु यादव, धर्मलाल राय, ब्रम्हदेवर् इशर, चन्दन सिंह और पर्ूव सभासद महेश यादव के साथ दर्ुर्व्यवहार भी किया गया । इस घटना की स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन नें घोर भर्त्सना भी की ।
राउत की ऐसी इच्छा हो कि इस आमसभा से मेरी अच्छी प्रचारबाजी हो जाएगी । आठ राष्ट्रों के मेहमान राष्ट्राध्यक्ष के बीच अपने र्समर्थकों के साथ टंुडिखेल में भाषण देना अनैतिक कार्य भी है ऐसा विश्लेषण बाहर आया था । लेकिन स्वतन्त्र मधेश द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मधेश और मधेशी के ऊपर सदियों से नेपाली राज्यद्वारा लादा गया औपनिवेशिक शोषणबारे जानकारी देना और मधेश और मधेशियों को औपनिवेशीकरण से बाहर लाकर स्वतन्त्रता दिलाने की बात स्पष्ट लिखी गई है । ऐसा आरोप मधेश के हित न चाहने वाले, अभियान को बदनाम करने के मकसद से लगाया गया है । मगर एक अभियानकर्ता ने इस आरोप का खण्डन किया ।
इसके बाद डा. राउत ने मार्ग १६ गते जनकपुर के जानकी मन्दिर के प्राङ्गण में एक सभा का आयोजन करना चाहा जिसे पुलिस द्वारा निस्तेज किए जाने पर भी उसी जगह के आसपास सभा का आयोजन किया गया जो पर्ूण्ा रूप से सफल रहा । उनका र्समर्थन भी व्यापक रुप से देखा गया । एक बात तो साफ दिखाई देती है कि राउत को गिरफ्तार कर सरकार पछता रही है । क्योंकि उनके र्समर्थक दिन-ब- दिन बढÞते जा रहे हैं । स्वतन्त्र मधेश की आवाज और भी तेज होने लगी है ।
मधेशी बुद्धिजीवियों का कहना है- राउत को चमकते देखकर मधेशी नेताओं को भी चैन की नींद नही आ रही । क्योंकि मधेशी नेता जिस मुद्दे को लेकर सदनमं गए थे उसे उन लोगों ने भुला दिया । वे व्यक्तिगत लाभ के चक्कर में उलझ गए । आज मधेशी जनता ने नेताओं पर विश्वास करना छोड दिया है । अगर मधेशी नेतार् इमानदारी के साथ मधेश के हक-अधिकार के लिए लडÞते तो राउत का जन्म ही नहीं होता । जेल से रिहा होने के बाद डा.राउत स्वतन्त्र रुप से विभिन्न जिले में सभा-समारोह सफलता के साथ सम्पन्न कर रहे हैं । स्वतन्त्र मधेश के अभियान में मधेशी युवा, महिला, किसान और बुद्धिजीवियों की व्यापक सहभागिता देखी जा रही है । अन्त में सरकार और पहाडिÞयों का एक वर्ग राउत को राष्ट्रद्रोही देखता है तो मधेश में मधेशी युवा एवं जनता को राउत में मधेश का एक मसीहा नजर आता है । वीर मधेशी का नारा लेकर चलने वाले राउत आगे क्या क्या करते हैं वो देखना वांकी है ।

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