क्या मधेश भारत में होगा विलय ? कैलाश महतो

मधेश ने जब जब राज्य में सहभागी होने की बात की, नेपालियों ने मधेशियों पर नेपाल को सिक्किमीकरण और फिजीकरण करने का आरोप लगाता रहा है । मधेश को भारत में मिलाने का बेहुदा आरोप लगाता आया है ।

कैलाश महतो, परासी, १५ पूस |
राष्ट्र हमेशा आत्मपरक होता है, राज्य वस्तुपरक । युद्ध में राज्य नष्ट हो सकता है, लेकिन राष्ट्र अमर रहता है ।
सन् १९१४–१९१८ के प्रथम विश्वयुद्ध में फिनल्याण्ड और पोल्याण्ड राज्य नष्ट हो गए थे, मगर उनके फिनिश और पोलिस राष्ट्र कायम रहे । सन् १९३९–१९४५ के दूसरे विश्वयुद्ध में जापान और जर्मन राज्य समाप्त हो गए थे । मगर ज्याप्निज् और जर्मनिज् राष्ट्र जीवित रहे । उसी आधार पर तत् तत् राष्ट्रों के बासिन्दों ने पूनः फिनल्याण्ड और पोल्याण्ड तथा जापान और जर्मन राष्ट्रों की पूनस्र्थापना की ।
गोरखा के पृथ्वीनारायण शाह ने भी अनेक हथकण्डों के माध्यमों से लिम्बुवान, तमुवान, नेवा लगायत तथा उनके वंशजों ने अंगे्रजों से दलाली और चाकरी कर मधेश राज्य को समाप्ते करने के बावजुद उन सारे राज्यों का राष्ट्र प्रेम जनता में आज भी कायम है । उसी के आधार पर आज मधेश राष्ट्र के साथ साथ गोरखाली, नेपाली और अंगे्रजों द्वारा बिथोलित राज्यों ने अपने अपने राष्ट्रों कीे पूनर्निर्माण की आवाज उठा रही है ।

madhesh-india
संसार के सारे उपनिवेशवादियों का तकरीबन एक ही प्रकार के नाटकीय चाल रहा है । सन् १८८९ में भारत में शासन कर रहे एक अंग्रेज अधिकारी लर्ड कर्जन ने कहा था, “भारतीय राष्ट्रियता का स्वाभाविक कोई रुप ही नहीं है ।” सन् १९१० जॉन स्टैची नामक एक अंग्रेज ने कहा था, “भारत न तो कोई राष्ट्र रहा, न है और न होने बाला है । इसका कोई राष्ट्रियता ही नहीं हैै ।” अंगे्रजों ने वही बात अमेरिका, फ्रान्स, हङ्गकङ्ग, फिजी आदि देशों के लोगों से कहा था । तो क्या अंगे्रजों की बात मान ली लोगों ने ? अपने राष्ट्रों कोे छोड दी लोगों ने अंग्रेजो के हुकुमत में ?
बामदेव गौतम जैसे स्यूडो (नक्कली) कम्यूष्टि नेता भी कहता है, “न विगतमा कुनै मधेश राष्ट्र थियो, न वर्तमान मा छ, न भविष्यमा हुने बाला छ ।” ओली ने तो उदण्डता ही पेश कर दी है कि मधेश खोजना है तो बिहार और यू.पी में जाये मधेशी । तो क्या मधेशी अपने मधेश राष्ट्र को नेपालियों के हुकुमत में छोड देगा ? क्या उनके बातों को ही हम मान लेंगे ? और सबसे बडी बात तो अब यह है कि मधेशियों ने अपने देश का ओरिजीनल लालपूर्जा पा गया है । बस्, थोडा लडना होगा जैसे जमीनों के वास्तविक मालिक बेइमानों लडकर अपना जमीन वापस पाता है ।
मधेश ने जब जब अपने हक अधिकार की बात उठायी है, जब जब नेपाली राज्य और उसके शासन में अपने प्रतिनिधित्व की बात की है तो उन्हें भारतीय होने का, देश फोडने का, भारत, अमेरिका और यूरोप के डिजाइन में नेपाल को विखण्डन करने के आरोप लगाकर मधेश को बदनाम करने का कोशिश किया गया है । मधेश ने जब जब राज्य में सहभागी होने की बात की, नेपालियों ने मधेशियों पर नेपाल को सिक्किमीकरण और फिजीकरण करने का आरोप लगाता रहा है । मधेश को भारत में मिलाने का बेहुदा आरोप लगाता आया है ।
क्या मधेश भारत में होगा विलय ?
मधेशी क्यूँ और कैसे जायेगा भारत में विलिन होने ? क्या मधेशी जनता और उनके सन्तान बिहार और यू.पी के शिक्षित यूवाओं से भारतीय किसी सेवा आयोग में प्रतिस्पर्धा कर पायेगा ? क्या हमारा शिक्षा का मापदण्ड विभेदकारी नेपाली शिक्षा प्रणाली ने मधेशियों को भारतीयों से लडने योग्य बनाया है ? क्या विभेदकारी नेपाली शिक्षा प्रणाली द्वारा प्रदत्त शिक्षा से मधेशी यूवा किसी भारतीय से प्रतिस्पर्धा कर सकता है ? नेपाली दलदल से निकल कर भारतीय महासंग्राम में मधेशी उलझने का हैसियत रखता है ?

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3 Comments on "क्या मधेश भारत में होगा विलय ? कैलाश महतो"

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aam
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ek xetra ke adhikar lekar ladoge toh kavi vi nahi hoga, pura Nepal ke adhikar ke liye ladne se sath dengeo jo vi

प्रमोद कुमार
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प्रमोद कुमार

अच्छी बिचार है । कौशल महतो जी

Upendra Pandey
Guest

madesh desh tyo bihar par hai nepal mai madesh nahi hai.himal ,pahad ,tarai milkay Nepal banta hai.bihar se aake nepali nagrita prapta kar kay tarai ko madesh banakar madesh maag rahe ho.kya ye jayaj hai?tum log gorkha land ku nai detay wha.

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