क्या मधेस इतना असुरक्षित है कि नेपाली सत्ता मोदीजी का जनकपुर भ्रमण स्थगित कर दी

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डा. मुकेश झा, जनकपुर, २३ अक्टूबर | शासक सत्ताओं ने बारम्बार मधेस पर यह आरोप लगाते नहीं थकते कि मधेस असुरक्षित है। इस का ताजा उदहारण जनकपुर में होने वाली मधेस प्रीमियर लीग पर बंधेज लगाना और उसे जनकपुर में नहीं होने देना है। मधेस को पद दलित करने और उसे बन्दूक के नोंक पर रखने के लिए यह साजिश सत्ताधारी द्वारा चलाया जा रहा है ताकि मधेस से सत्ता के अन्यायपूर्ण व्यवहार और कार्य का कोई प्रतिकार न करे, यदि करे भी तो उसे बल पूर्वक दबाया जा सके। मधेस को बारम्बार सत्ता साझेदार अपने अनर्गल वक्तव्य से आक्रोशित करते रहते हैं और अगर इसपर मधेस अपना आक्रोश व्यक्त करता है तो उसे बागी, विद्रोही, राष्ट्रघाती की संज्ञा दे दी जाती है। अगर सत्ताधारी के किसी भी अनर्गल करतूत का विरोध होता है तो उसे बन्दूक , लाठी , पुलिस , सेना लगाकर निर्ममता पूर्वक वश में लाने की कोशिस की जाती है। क्या वास्तव में मधेस इतना असुरक्षित है जो नेपाली सत्ता पिछले समय होने वाली भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की भ्रमण स्थगित कर दी ? बात वैसी कुछ भी नहीं थी, बात एक ही है मधेस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर के मधेसी पर जितना भी अत्याचार हो उसको अंतर्राष्ट्रीय स्तर से कोई विरोध न हो। मधेस को सत्ता द्वारा जान बुझ कर उपेक्षित रखा गया है, मोदी जी को मधेस भ्रमण के दौरान यह बात अपने आँख से न देखें शायद इस लिए भी उनकी भ्रमण रद्द किया गया हो।

समूचा मधेस की बात ही क्या, सिर्फ जनकपुर शहर के लिए पिछले १० वर्षों में मात्र बृहत्तर जनकपुर के लिए ४६ अर्ब का बजट आया, नगरपालिका, जिला विकाश या और दूसरे निकाय के बजट की बात ही नही। लेकिन यह लोकतन्त्र के नाम पर जो सुरसा जैसी लूटतंत्र चल रही है उसकी गाल में सारा बजट समा गया और जनकपुर की हाल जैसी की तैसी। अब अगर इस बात पर कोई विरोध करे तो सत्ता शासक के कोप का भाजन बनना होगा, बुरा से बुरा परिणाम भुगतना होगा, क्यों की यहाँ सत्ताधारी जो बोले वह सही और जनता जो बोले वह गलत। राज्य के पास हर तरह की व्यवस्था, हर तरह के निकाय है, हर तरह के कर्मचारी हैं परन्तु वह सब के सब राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं, वरन नेताओं के व्यक्तिगत और पार्टीगत स्वार्थ के लिए उपयोग में लाए जाते है। जो भी सत्ताधारी या नेताओं के खिलाफ जुबान खोलने का प्रयास करता है उसे तरह तरह के प्रपंच से, प्रलोभन से, त्रास दिखा कर मार्ग से हटा दिया जाता है।

अगर उपेक्षा के खिलाफ, अनीति और अन्याय के खिलाफ लड़ना बागी होना है, अगर अपने हक और अस्तित्व के लिए लड़ना बागी होना है, अगर सच्चाई के लिए लड़ना बागी होना है तो सच है कि हर एक मधेसी बागी है, और जब तक सत्ताधारी का लूटतन्त्र चलता रहेगा तब तक बागी बना रहेगा।

 

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