क्या महिलाओं को दी जाने वाली सुविधाओं से रेमिटेंस में बढोत्तरी हो पाएगी ?

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मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, ४ अगस्त | नेपाल से बाहर जाने वाली महिलाओं में अधिकांश महिलाएं घरेलू कामदार के रुप में जाती हैं । इसमें खास तौर पर वों महिलाएं हैं जों आर्थिक रुप से विपन्न हैं  परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ही ये महिलाएं ये कदम उठाती हैं । पैसों के लिए यह अवैधानिक रुप से भी दूसरे देशों में जाने का काम करती हैं । विगत वर्षों में महिलाएं औधोगिक काम में भी जा रही हैं ।

पर विदेश जाने के क्रम में महिला कामदारों की संखया में कमी आ रही है । ये सिर्फ वर्तमान में ही नहीं है वरन् विगत कुछ वर्षों से ही कामदारों की संख्या में  काफी कमी आयी है ।
 जैसा कि आकड़े के मुताबिक, आर्थिक वर्ष, २०७१, ७२ की तुलना में १३% की कमी देखी जा रही है । जिसका एक कारण सुरक्षा भी बताया जा रहा है ।
इसी प्रकार दूसरा आकर्षण का केंद्र बिन्दु मलेशिया है । पर मलेशिया जाने वालों में भी अभी काफी गिरावट आयी है । पिछले वर्ष जहां ५ हजार ८०० के लगभग महिलाएं मलेशियां गयी थी पर अभी के आकड़े के अनुसार १ वर्ष में १ हजार ६०० के लगभग महिलाएं ही तैयार हुई हैं ।
 देखा जाए तो समग्र रुप में कामदारों की संख्या में ही कमी के कारण महिलाओं की संख्या में भी कमी आयी है । जिसका कारण, वहां की आर्थिक मंदी, विदेशिक कामदार न लेने का निर्णय, चैकिंग, मुद्रा का अवमूल्यन आदि को बताया जा रहा है । इसके बाद खाड़ी देशों की बारी आती है पर तुल्नात्मक रुप में यहां इतनी कमी नही आयी जितनी अंय  देशों में । इसके अतिरिक्त ओमान, इजरायल, बहराइन, द. कोरिया, जापान आदि जानने वालों में भी कमी आ रही है ।
घरेलू कामदार के रुप में जाने वाली महिलाओं में कमी का कारण उनके मानसिक व शारीरिक शोषण को बताया जा रहा है । इस तरह की समस्याओं से उबरने के लिए सरकार ने भी पहल की है । इसी के लिए सरकार नें “नयापिंग रिस्पोंस टीम” की स्थापना की है । इसमें मुख्य रुप से महिलाओं के उद्धार की जिम्मेदारी दी गयी है और विदेश में समस्या में आयी महिलाओं के लिए यह टीम सदैव ही तत्पर रहेगी । साथ ही साथ पारिश्रमिक का भी निर्धारण कर दिया गया है जो पहले २५० डालर था वो अब ३०० डालर हो गया है एवं महिला कामदार को प्राइवेट रुम व फोन लेने की सुविधा के साथ और अंय सुविधाएं भी दी है पर क्या इस तरह की सुविधाएं देने से वह सुरक्षित हो पाएंगी ।
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