क्या विश्वगान रचने का वक्त नहीं आया –

अभय कुमार:विभिन्न देश और समाज में अनेक अवसरों पर गीत गाए जाते हैं। जैसे किसी समारोह में राष्ट्रीय झण्डा फहराते समय, किसी राष्ट्रिय दिवस के अवसर पर, अथवा अन्तर्रर्ाा्रीय खेल का आगाज करते समय, उसी तरह स्कूल, काँलेज और विश्व विद्यालयों में खास अवसर पर खास तरह के गीत गाए जाते हैं। ऐसे हीं गीत को अंग्रेजी में ‘बलतजझ’ -एन्थम) कहते हैं। इसका क्या महत्त्व है – यह जानना जरूरी है।
यह एन्थम शब्द ग्रीक भाषा से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ होता है- संगीतमय संयोजन का एक टुकडÞा, जिसको सामूहिक रूप में गाया जाता है। परिभाषा के अनुसार एक एन्थम को खास अवसर का गीत माना जा सकता है। ऐसे गीतों में मातृभूमि, पितृभूमि, खेल भावना, शैक्षिक संस्थाएं इत्यादि की आदर्श भावनाओं को श्रद्धापर्ूवक व्यक्त किया जाता है। और इसे विभिन्न जगहों में विभिन्न किसिम से गाया जाता है। ऐसे गानों में बीते दिनों को गौरव को भी याद किया जाता है। अथवा समूहगत संस्कृति को भी दिखाया जाता है। अथवा इतिहास में वणिर्त किसी वीरतापर्ूण्ा संर्घष्ा को याद किया जाता है।
राष्ट्र गीत रचते समय प्रायः वैसे धुन को लिया जाता है, जो पहले से ही जनता में लोकप्रिय हो। लेकिन कतिपय राष्ट्रीय गीत खास समिति द्वारा रचे जाते हैं। यद्यपि अनेक देशों में अपने ही राष्ट्रीय गीत हैं। फिर भी राष्ट्र गीत का यह प्रचलन कुछ नयाँ ही है। जिसने यूरोप में १८वीं और १९वीं सदी में लोकप्रियता प्राप्त की।
देशों के अलावा अनेक सारे अन्तर्रर्ाा्रीय संगठन और संस्था भी हैं, जिन्हों अपने लिए खुद ऐसे गीतों की रचना की हैं। यहाँ वैश्विक सोसलिष्ट आन्दोलन का उदाहरण लिया जा सकता है, इसके गीत को ‘द इन्टरनेशनल’ कहते हैं। जब कि यूरोपियन यूनियन ने एक ऐसा गीत चुना है, जो प्रसिद्ध गायक वीथोभिन का ९ नम्बर सिम्फोनी है। दूसरी ओर अप्रिmकन यूनियन ने अपना खास गीत बनाया है, जिसे ‘लेट अस अल यूनाइट एंड सेल्रि्रेट टुगेदर’ नाम दिया गया है। उधर यूएन ने अपना अफिसियल एन्थम नहीं रखा है। फिर भी ‘ए हिम्न टू द युएन’ यूएन के २५वें वाषिर्क उत्सव के अवसर में अक्टोबर २४, १९७१ में रचा गया था। कवि डब्लूएच अडेन को समर्पित इस गीत के धून बनाए थे- प्रसिद्ध संगीतकार ‘पँ क्यसलस्स’ ने। तत्कालीन यूयन के महासचिव जनरल ऊ थान्ट ने आशा व्यक्त की थी कि भविष्य में यूएन का वास्तविक एन्थम यही होगा।
विश्व-गीत की आवश्यकता
विश्व के सम्मान में एक गीत रचने का वक्त क्या अब भी नहीं आया – यह गीत कैसा होना चाहिए – किस भाषा में होना चाहिए – और इसके विचार कैसे होने चाहिए – और किन अवसरों पर इन्हें गाया जाना चाहिए –
मेरे विचार में विश्व-स्तोत्र बहुत पहले रच जाना चाहिए था। क्योंकि विश्व माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना, इस गान का लक्ष्य होगा। क्योंकि हमारा अस्तित्व इसी विश्व से है। हमारी सम्पन्नता और हमारे गौरव सभी विश्व के संग जुडÞे हैं। दूसरी बात, विश्व-गीत हम लोगों में विश्व नागरिकता की भावना उत्पन्न करने और बढÞाने में बहुत ही सहयोगी हो सकता है। और तीसरी बात विस्तृत दृष्टिकोण से देखा जाए तो हमारे समाज में और देशों में जो अनेक एन्थम प्रचलित है, उसी लडÞी में यह भी एक मजबूत कडÞी के रूप में जुडÞ सकती है। विश्व भावना को इसमें सहेजा और मुखरित किया जा सकता है।
जहाँ तक विश्व-गीत की भाषा का सम्बन्ध है, इसे आङ्ल भाषा में रचना मुनासिब होगा। क्योंकि इसे हम विश्व सर्म्पर्क भाषा के रूप मे जानते, पहचानते हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह विश्व-गीत अर्थहीन संगीत मात्र रह जाएगा। इस मामले में हम उदाहरण के रूप से स्पेन, बोस्निया और हर्जगोभिना देशों के एन्थम को ले सकते हैं। जिसमें संगीत तो है, लेकिन उससे में अपेक्षित भाव और बोल अनुभूत नहीं होते।
विश्व-गीत रचने का प्रयास
इन्टरनेट में बहुत सारे विश्व-गीत पहले से ही रचे मिलते हैं। जिसे व्यक्तियों ने और संस्थाओं ने हमारी विश्व को आदर से समर्पित किया है। उनमें से बहुत सारे हाल ही में रचे गए हैं और प्रस्तुत किए गए हैं। २००९ से रचे गए वे गीत प्रायः पश्चिमी देशों की ही रचना है। इनमें से बहुतेरे गीतों में वातावरण सम्बन्धी बातों का उल्लेख है। जिसके चलते इन्हें विश्व-गीत नहीं कह सकते हैं। फिर भी एन्थम का उद्देश्य किसी भी वस्तु को प्रशंसा करते हुए आदर प्रदर्शित करना होता है।
विश्व-गीत लिखने की आवश्यकता का उद्देश्य होना चाहिए, विश्व के सभी समुदाय की भावना उस में समेटी जाए। इसी सर्न्दर्भ में मैंने खुद एक अदना सा प्रयास किया है, जो इस प्रकार हैः
इगच अयsmष्अ यबकष्क, अयsmष्अ दगिभ उभबचरितजभ mयकत दभबगतषग उिबिलभत ष्ल तजभ गलष्खभचकभ रबिि तजभ अयलतष्लभलतक बलम तजभ यअभबलक या तजभ धयचमिरगलष्तभम धभ कतबलम बक ायिचब बलम ाबगलबरगलष्तभम धभ कतबलम बक कउभअष्भक या यलभ भबचतजरबिि तजभ उभयउभि बलम तजभ लबतष्यलक या तजभ धयचमिरबिि ायच यलभ बलम यलभ ायच बििरगलष्तभम धभ गलागच तिजभ दगिभ mबचदभि ाबिनरदबिअप, दचयधल, धजष्तभ, मषाभचभलत अययिगचकरधभ बचभ जumबलक, तजभ भबचतज ष्क यगच जomभ।
यह गीत युट्यु -जततउस्ररथयगतगदभरब्ज्ञाभथ्ढीटथीअ) के द्वारा र्सार्वजनिक हो चुका है ।
आज के वैश्विक युग में जहाँ लोग थोडÞे समय में दूरदराज के लोगों से भी सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं, दूरदराज की घटनाओं से प्रभावित हो सकते हैं, भविष्य में ज्यादा से ज्यादा विश्व-गीत रचे जाएंगे, इसमें कोई शक नहीं है। और उन सारे गीतों में से कोई एक प्रतिनिधि गीत हमारे इस प्रिय ग्रह, विश्व की प्रशंसा में उपयुक्त साबित हो सकता है और हमें अन्त में विश्व-गीत की प्राप्ति हो सकती है।
-लेखक ः अंग्रेजी के जानेमाने कवि और भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव हैं।)
भावानुवादः मुकुन्द अचार्य

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