क्या सीमा पर तार-बार लगाने से भारत सुरक्षित बन जायेगा ? -कैलाश महतो

कैलाश महतो,परासी, १६ मई | रोगी जो मनाये, वैद्य वही फरमाये

मई ११ के दिन से फेस बुक के सामाजिक संजाल पर गरमा गरम समाचारें लोगों को पढने को मिल रहे हैं । उस दिन के लोकसभा सत्र के दौरान भारतीय लोकसभा के एक सांसद श्री निषिकान्त दुबे ने पाकिस्तान और बंगलादेश–भारत सीमा के तरह ही साम्राज्यीय नेपाल और भारत के १४८५ कि.मी के सीमाओं को भी तारबार करने को प्रस्ताव की थी । कारण में उन्होंने बताया कि साम्यवादी चीन के सहयोग में नेपाल ने भारत को धम्की देने की कोशिश कर रही है ।

tarbar

वैसे भी किसी देश को किसी दुसरे देश ने किसी तीसरे देशों के सहयोग या उक्साहट में उसे धमकी देने या फिर उसके विरुद्ध अनर्गल व्यतव्यबाजी करे तो उस पहले राष्ट्र को लम्बे समय तक सह्य होना कठिन हो जाता है, और खास करके वो पडोसी देश जिससे वह शाम सबेरे अपने दिनचर्या के लिए नमक, हल्दी, जीरा और मरीच तक दान में, उधार में, सहयोग और अनुदान में पाकर उसीको तेवर दिखाये तो वो स्वाभाविक रुप से अपने दरबाजों पर वह ताला चाभी लगायेगा । भारतीय संसद में भारत और नेपाल के सीमाओं पर छेकबार लगाने की अवस्था भी इन्हीं कारणों से निर्माण हो सकता है । लेकिन उन सीमाओं को बन्द कर देने से भारत क्या सुरक्षित बन पायेगा ? उसके विरुद्ध नेपाल के तरफ से हो रहे शब्द युद्ध, व्यवहार युद्ध, वाक युद्ध या सम्भावित अन्य युद्धों से भारत बच पायेगा ? नेपाल के सहयोग से भारत विरुद्ध होने बाले अपराधिक घुसपैठीय कृयाकलापों को भारत रोक पायेगा ? अगर तारबार से ही उन भारत विरुद्ध के कृयाकलापों को रोक पाने की कोई अचूक उपाय होता तो भारत और पाकिस्तान के बीच आए दिन गोली तथा बमबारी नहीं होती न दिनहूँ भारतीय या पाकिस्तानी सैनिक जबान एक दुसरे के शिकार होते ।

भूखे पेट का कोई धर्म नहीं होता न वेश्याओं का कोई परिवार होता है । भूखे का धर्म सिर्फ खाना और वेश्याओं का धर्म केवल और केवल पैसे होते हैं । क्यूँकि न चाहते हुए भी वे अपने अपने धर्म और कर्म के प्रति इमानदार एवं वफादार होते हैं । और उनसे पंगा लेना किसी इज्जतदार और धनाढ्यों के लिए खतरे से खाली नहीं होती । क्यूँकि वे कुछ भी कर सकते हंै अपने धर्म को निर्वाह करने के लिए । वह नंगा है और उसे कोई नंगा कहकर गालियाँ दे तो वो उसे भी नंगा करने की कोशिश करेगा । वो अपने प्रिय ग्राहकों को भी किसी दुसरे मालदार नये ग्राहकों के सामने बेइज्जत कर सकता है । उससे बचने और निपटने के लिए जोस में नहीं, होश में रहकर काम करना शोभनीय होगा ता कि या तो उसे सुधरने का अवसर मिल जाये या वह कुकृत हमेशा के लिए दम तोड दे ।

DSCN2597

आज भारत को नेपाल और उसके शासक लोग समस्या और विरोधी नजर आने लगे हैं । हमारे ऋषि मुनि तथा बुजुर्गों ने वैसे ही थोडे ही कहा है कि “बोओगे बबुर तो आम कहाँ से पाओगे ?” हकिकत में भारत के लिए समस्या नेपाल कम और भारत स्वयं ज्यादा है । उसने अपने शत्रुओं को जाने अनजाने में खुद से पालकर रखा है । उसके विरुद्ध के आज के समस्या को उसने खुद निर्माण की है और जब वो जान पर आन पडी है तो तारबार लगाकर उससे भी बडी समस्या निर्माण करने की बातों को दिमाग में स्थान देने लगे हैं ।

एक तरफ भारत अपने को आजाद होेने का गर्व करता है तो दुसरी तरफ वह आज भी अंगे्रजी मानसिकता के तले दबा हुआ है । इंसान के रुप में भारत पर हुकुमत करने बाले अंगे्रज उस तथाकथित आजाद भारत को अपने भारतीय दिखने बाले अंगे्रजी भुतों के जिम्मे छोडकर चले गए जहाँ आज भी बदले हुए किसी न किसी रुप में अंग्रेज ही ज्यादा शासन कर रहे हैं और उसी मानसिकता ने मधेश और मधेश से जुडे कुछ अहम आधारों को शोषित और पीडित कर रखा है । एक तरफ वह सन १९५० के सन्धि को दिखाता है तो दुसरी तरफ अपने ही बगल में औपनिवेशिक शासन को बढावा देकर उसके नाम पर प्रताडित होने बाले मधेशी समुदायों को नेपाली शासकों से मिलकर प्रताडित करने में मस्ती ले रहे हैं ।

भारत अगर चिरकाल तक नेपाली और उससे मिलकर उसे धमकी देने और उसके विरुद्ध कृयाकलाप करने करबाने बालों से सुरक्षित होना चाहता है तो भारत और मधेश के बोर्डरों पर उसे तारबार लगाने से कई गुणा उचित निर्णय स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के अभियान को सफल बनाने में अन्तरराष्ट्रिय हैसियत से सहयोग और समर्थन दें और नेपाल के आड में उसके विरुद्ध के संभावित हर फिजुल के झंझटों से मुतm हों । तारबार लगाने से भारत विरोधियों को भारत के विरोध में कार्य करने में थप सहुलियत प्राप्त होना निश्चित प्रायः है जो वे चाहते भी हैं । अगर ऐसा हुआ तो यह इस रुप में भारत और उसके विरोध में कार्य करने बालों के लिए सहायक सिद्ध होगा जैसे “जो रोगी मनाये, वही वैद्य फरमाये ।”

तारबार लगाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता । तारबार लगाने से भारत को थप अनावश्यक समस्याओं का सामना करना पड सकता है । क्यूँकि राजा जनक और राजा दशरथ काल में सिर्फ एक राम और एक सीता रहे होंगे । लेकिन आज भारत और मधेश के रिश्तों में लाखों राम और सीता बन चुके हैं जिन्हें और जिनको दोनों तरफ आने जाने से न तो भारत न मधेश ही रोक पायेगा?

 

Loading...